मनीषा शर्मा। राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर हलचल बढ़ गई है। मंत्रिमंडल फेरबदल और विस्तार की संभावनाओं को लेकर लंबे समय से चर्चाएं चल रही थीं। इसी बीच, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने जोधपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत करते हुए कई अहम संकेत दिए। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि मंत्रिमंडल में बदलाव या विस्तार पूरी तरह मुख्यमंत्री का अधिकार क्षेत्र है, लेकिन राजनीतिक नियुक्तियों का सिलसिला लगातार जारी है।
राठौड़ ने बताया कि हाल ही में वित्त आयोग के अध्यक्ष पद पर अरुण चतुर्वेदी की नियुक्ति की गई है और आने वाले समय में और भी राजनीतिक नियुक्तियां की जाएंगी। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार संगठनात्मक और प्रशासनिक मोर्चे पर तेजी से काम कर रही है।
जोधपुर के कार्यकर्ताओं की उपेक्षा दूर करने का भरोसा
मीडिया ने जब उनसे पूछा कि जोधपुर शहर व जिले के कई कार्यकर्ताओं को अभी तक संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां क्यों नहीं मिलीं, तो राठौड़ ने भरोसा दिलाया कि यह कमी भी जल्द पूरी होगी।
उन्होंने कहा कि संगठनात्मक संतुलन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए कई स्तरों पर विचार-विमर्श हो रहा है। आने वाले समय में कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां देकर क्षेत्रीय असंतुलन दूर किया जाएगा।
प्रवासी राजस्थानी निवेश को लेकर बड़ा संदेश
प्रवासी राजस्थानी सम्मेलन का जिक्र करते हुए मदन राठौड़ ने कहा कि राजस्थान में उद्योगों के लिए अपार संभावनाएं हैं।
उन्होंने बताया कि—
प्रदेश में पर्याप्त रॉ मैटेरियल उपलब्ध है
यहाँ स्किल्ड और सेमी-स्किल्ड लेबर की कोई कमी नहीं
और बाजार की उपलब्धता भी उत्कृष्ट है
राठौड़ ने कहा कि सरकार चाहती है कि प्रवासी राजस्थानी प्रदेश में निवेश करें और नए उद्योग स्थापित करें।
उन्होंने यह भी दावा किया कि राजस्थान बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होता जा रहा है और जल्द ही प्रदेश बिजली बेचने की स्थिति में होगा। किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध कराने की पहल भी जारी है।
ऐसे में यदि प्रवासी राजस्थानी उद्यम स्थापित करते हैं, तो यह प्रदेश की अर्थव्यवस्था और निवेशकों दोनों के लिए लाभकारी साबित होगा।
निकाय चुनाव: वार्डों का पुनर्निर्धारण
निकाय चुनावों को लेकर उन्होंने बड़ा बयान दिया। राठौड़ ने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने वार्डों का निर्धारण अनियमित तरीके से किया था, जिससे अनेक वार्डों में आबादी का औसत गड़बड़ था।
भाजपा सरकार ने सभी वार्डों का पुनःनिर्धारण कराया है ताकि जनसंख्या के आधार पर समान प्रतिनिधित्व मिल सके। नए निर्धारण के बाद माना जा रहा है कि निकाय चुनाव अधिक पारदर्शी और संतुलित तरीके से कराए जा सकेंगे।
राजनीतिक संकेतों से बढ़ी हलचल
राठौड़ के इन बयानों को राज्य की मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
एक तरफ राजनीतिक नियुक्तियों का तेजी से जारी रहना,
दूसरी ओर मंत्रिमंडल फेरबदल पर संकेत,
और निकाय चुनावों की तैयारी,
ये सभी बातें बताती हैं कि आने वाले दिनों में राजस्थान की राजनीति में कई अहम बदलाव देखने को मिल सकते हैं।


