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खाद संकट पर भड़के किसान: बारां में नेशनल हाईवे जाम, छबड़ा में कार्यालय पर ताला

खाद संकट पर भड़के किसान: बारां में नेशनल हाईवे जाम, छबड़ा में कार्यालय पर ताला

शोभना शर्मा । राजस्थान के बारां जिले में खाद संकट गहराने के बाद किसानों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। सोमवार सुबह छीपाबड़ौद सहकारी समिति में खाद वितरण में अव्यवस्था सामने आने के बाद नाराज किसानों ने अकलेरा रोड स्थित नेशनल हाईवे पर जाम लगा दिया। इस प्रदर्शन के चलते हाईवे पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। किसानों के अनुसार सुबह 6 बजे से ही महिलाएं और पुरुष खाद के लिए लाइन में खड़े थे, लेकिन निर्धारित समय बीतने के बाद भी समिति का कोई कर्मचारी या अधिकारी मौजूद नहीं था। लगातार इंतजार और अनदेखी से क्षुब्ध किसानों ने सड़क पर प्रदर्शन किया और हाईवे को अवरुद्ध कर दिया।

किसानों ने आरोप लगाया कि बीते कई दिनों से खाद वितरण प्रणाली में अनियमितता बनी हुई है। समय पर समिति नहीं खुलती और कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण उन्हें अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ती है। विरोध प्रदर्शन के दौरान भी न तो प्रशासन और न ही समिति का कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचा। इससे किसानों में और ज्यादा आक्रोश फैल गया। किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि खाद वितरण व्यवस्था में तत्काल सुधार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

खाद की कमी और वितरण अव्यवस्था को लेकर प्रदेश के एक अन्य क्षेत्र छबड़ा में भी तनावपूर्ण हालात बन गए। खेल मैदान में खाद वितरण के लिए टोकन प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन कुछ ही मिनटों में टोकन समाप्त हो गए। टोकन न मिलने से असंतुष्ट किसान बड़ी संख्या में कृषि कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने पाया कि कार्यालय पर ताला लगा हुआ था और अधिकारी अनुपस्थित थे। इस स्थिति ने किसानों के गुस्से को और भड़का दिया और वहां भी प्रदर्शन शुरू हो गया।

कृषि विभाग की ओर से दावा किया गया कि टोकन वितरण पूरी पारदर्शिता से किया गया है। कृषि विभाग के अधिकारी सुरेश मालव के अनुसार मैदान में कुल 1790 कूपन वितरित किए गए और प्रत्येक किसान को तीन-तीन कट्टे खाद दिए गए। इस हिसाब से कुल 5370 कट्टों का वितरण किया गया। हालांकि किसानों ने विभाग के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया। किसानों का कहना है कि वास्तव में मौके पर लगभग 200 कूपन ही बांटे गए, जिसके चलते सैकड़ों किसान खाली हाथ लौट गए और खाद के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं।

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