मनीषा शर्मा। राजस्थान में पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा देने वाली मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना का नया चरण वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए सोमवार से शुरू हो गया है। इस वर्ष योजना में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जिनका उद्देश्य बीमा प्रक्रिया को तेज, सरल और पारदर्शी बनाना है। पशुपालन विभाग की ओर से राज्यभर के गांवों में विशेष शिविर लगाकर बीमा कार्य करवाया जा रहा है। इस बार 21 लाख पशुओं का निःशुल्क बीमा किया जाएगा, जिससे बड़े स्तर पर पशुपालकों को राहत मिलेगी।
बीमा प्रक्रिया में किया गया बड़ा बदलाव
योजना के तहत इस वर्ष बीमा का आधार “पहले आओ पहले पाओ” रखा गया है। पिछले वर्ष यह प्रक्रिया लॉटरी सिस्टम के तहत की गई थी, जिससे कई पशुपालक लाभ से वंचित रह गए थे। इस बार नई प्रक्रिया अपनाकर यह सुनिश्चित किया गया है कि जो भी पशुपालक समय पर पंजीकरण करवाएगा, उसे प्राथमिकता के साथ बीमा का लाभ मिलेगा।
पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत ने बताया कि इस बार पशु चिकित्सक और सर्वेयर एक साथ शिविरों में काम करेंगे। इससे पशुओं का स्वास्थ्य प्रमाण पत्र और बीमा पॉलिसी एक ही स्थान पर तुरंत जारी कर दी जाएगी। इससे काम में तेजी आएगी और पशुपालकों को बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
अजमेर की सुरता देवी ने कराया पहला बीमा
योजना की शुरुआत के पहले ही दिन अजमेर जिले के जीरोता गांव की सुरता देवी ने अपनी दो भैंसों का बीमा करवाकर प्रदेश में पहला बीमा कराने का गौरव हासिल किया। सरकार की ओर से बताया गया कि शुरुआती दिनों में बड़ी संख्या में पशुपालक शिविरों में पहुंच रहे हैं और पंजीकरण करवा रहे हैं।
1 दिसंबर से हर राजस्व गांव में शिविर
राज्य सरकार ने 1 दिसंबर से हर राजस्व गांव में विशेष शिविर लगाए हैं, ताकि अधिक से अधिक पशुपालक प्रारंभिक चरण में ही योजना का लाभ ले सकें। इस वर्ष एक पशुपालक अपने जन आधार कार्ड के आधार पर दो गाय, दो भैंस या एक गाय और एक भैंस, 10 ऊंट तथा 10 बकरियां या भेड़ का निःशुल्क बीमा करवा सकेगा। इससे छोटे और सीमांत पशुपालकों को बड़ी आर्थिक सुरक्षा प्राप्त होगी।
मोबाइल एप और ई-मित्र से भी कर सकेंगे पंजीकरण
पंजीकरण प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए इस वर्ष मंगला पशु बीमा योजना 2025-26 का आधिकारिक मोबाइल एप भी लॉन्च किया गया है, जो गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। इस एप के माध्यम से पशुपालक अपने जन आधार का उपयोग कर कुछ ही मिनटों में पशुओं का पंजीकरण कर सकते हैं।
इसके अलावा जो पशुपालक मोबाइल एप का उपयोग नहीं करना चाहते, वे नजदीकी ई-मित्र केंद्र के माध्यम से 30 रुपए का शुल्क जमा कर पंजीकरण करवा सकते हैं। शिविरों में भी प्रत्यक्ष रूप से यह सुविधा उपलब्ध रहेगी।
योजना से जुड़े लाभ
इस योजना का उद्देश्य आपदा, दुर्घटना या बीमारी की स्थिति में पशुपालकों को आर्थिक हानि से बचाना है। राजस्थान में पशुपालन प्रमुख आय स्रोतों में से एक है, इसलिए इस बीमा योजना को छोटे किसानों और पशुपालकों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच माना जा रहा है।


