शोभना शर्मा। राजस्थान के सीकर जिले ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर सफलता का डंका बजाया है। लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र के बूजियानाऊ गांव के 25 वर्षीय युवा सुनील नेहरा ने ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जो देशभर के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। सुनील ने केवल पांच महीनों के भीतर सात प्रतियोगी परीक्षाएं उत्तीर्ण कर न सिर्फ अपने परिवार का, बल्कि पूरे गांव और जिले का नाम रोशन किया है। उन्होंने राष्ट्रीय और प्रादेशिक स्तर की विभिन्न सरकारी भर्ती परीक्षाओं में शानदार परिणाम देकर यह साबित कर दिया कि निरंतर परिश्रम और आत्मविश्वास के सामने कोई लक्ष्य कठिन नहीं होता।
सुनील नेहरा की राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में बेहतरीन रैंक
सुनील नेहरा ने जिस सफलता की शृंखला बनाई, वह जुलाई माह से शुरू हुई। जुलाई में घोषित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज चंडीगढ़ की नर्सिंग अधिकारी भर्ती परीक्षा के परिणाम में उन्होंने देशभर में 191वीं रैंक हासिल कर पहली उपलब्धि दर्ज की। इसके बाद अक्टूबर में घोषित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की नर्सिंग अधिकारी परीक्षा में सुनील ने ऑल इंडिया लेवल पर 52वां स्थान प्राप्त किया, जो उनकी मेहनत और उत्कृष्ट प्रदर्शन का प्रमाण है। इसके अलावा रेलवे भर्ती बोर्ड द्वारा आयोजित नर्सिंग अधीक्षक परीक्षा और फील्ड वर्कर भर्ती परीक्षा में भी सुनील ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए सफलता अपने नाम की। इस तरह राष्ट्रीय स्तर की तीन भर्ती परीक्षाओं में शानदार नतीजे हासिल कर उन्होंने अपने आत्मविश्वास और तैयारी की गहराई को साबित किया।
राजस्थान स्तर की परीक्षाओं में भी सफलता का सिलसिला जारी
राष्ट्रीय परीक्षाओं के साथ-साथ सुनील ने प्रादेशिक स्तर पर भी लगातार चार परीक्षाओं में सफलता प्राप्त की। अक्टूबर में घोषित राजस्थान ट्यूटर भर्ती परीक्षा और राजस्थान कम्यूनिटी हेल्थ ऑफिसर परीक्षा में उन्होंने अपना परचम लहराया। इसी क्रम में 20 नवंबर को घोषित राजस्थान स्टाफ नर्स सेकंड ग्रेड भर्ती परीक्षा में सुनील ने 278वीं रैंक हासिल कर अपनी सफलता को और मजबूत किया। उनकी यह उपलब्धियां साबित करती हैं कि उन्होंने केवल एक लक्ष्य नहीं बल्कि बहुआयामी तैयारी की थी।
परिवार का सहयोग और अनुशासन बना जीत का आधार
सुनील ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और परिवार को दिया। उनके पिता रामनिवास नेहरा सरकारी शिक्षक हैं, जबकि मां संतोष गृहिणी हैं। सुनील बताते हैं कि बचपन में पिता द्वारा दिया गया एक मूल मंत्र उनके जीवन की दिशा बन गया — मेहनत का कोई विकल्प नहीं। इसी विचार ने सुनील को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान हर कठिनाई में शक्ति दी। सुनील की दोनों बहनों ने भी उनके करियर को मजबूत आधार दिया। बड़ी बहन डॉ. सुनीता नेहरा लंदन (यूके) में एमडी (फिजिशियन) हैं, जबकि दूसरी बहन डॉ. अनिता नेहरा जयपुर स्थित स्टेट कैंसर सेंटर में डीएम (मेडिकल ऑन्कोलॉजी) हैं। दोनों बहनों ने न सिर्फ प्रेरणा दी बल्कि पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की रणनीति समझाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत
सुनील की उपलब्धि आज प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। एक ही समय में कई परीक्षाओं में तैयारी करना और लगभग सभी में सफलता प्राप्त करना आसान नहीं होता। लेकिन अनुशासन, नियमित अध्ययन और परिवार के सहयोग से सुनील ने यह साबित कर दिया कि लक्ष्य कितना भी बड़ा हो, उसे हासिल किया जा सकता है। वे युवा जो सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं, उनके लिए सुनील की यात्रा संदेश देती है कि सीमित संसाधन, ग्रामीण पृष्ठभूमि या प्रतिस्पर्धा जैसी कोई भी बाधा वास्तविक बाधा नहीं बनती, यदि इच्छाशक्ति और दृढ़ता साथ हों।


