मनीषा शर्मा। राजस्थान में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए शिक्षा विभाग ने एक बड़ा और सख्त लक्ष्य निर्धारित किया है। गुरुवार को प्रदेश के शिक्षा सचिव कृष्ण कुणाल ने सभी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि आगामी बोर्ड परीक्षाओं में कक्षा 10वीं और 12वीं के कम से कम 50 फीसदी विद्यार्थी 75 फीसदी से अधिक अंक प्राप्त करें। यह लक्ष्य केवल एक सामान्य निर्देश नहीं बल्कि शिक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
हाल ही में राज्य स्तरीय मूल्यांकन में जोधपुर का प्रदर्शन बेहद कमजोर पाया गया था। इसी को ध्यान में रखते हुए गुरुवार को आयोजित समीक्षा बैठक में शिक्षा सचिव ने विभागीय जिम्मेदारियों और परिणामों को लेकर कड़ा रुख अपनाया।
जोधपुर के कमजोर प्रदर्शन के बाद कड़े निर्देश
पिछले महीने हुए मूल्यांकन में जोधपुर प्रदेश के सबसे कमजोर जिलों में शामिल रहा। इस रिपोर्ट के बाद शिक्षा सचिव कृष्ण कुणाल ने समीक्षा बैठक में अधिकारियों से कहा कि अब समय मात्रात्मक काम का नहीं, बल्कि गुणात्मक सुधार का है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रत्येक जिला अधिकारी यह सुनिश्चित करे कि बोर्ड परीक्षाओं में छात्रों का प्रदर्शन बेहतर हो और कम से कम आधे विद्यार्थी 75 प्रतिशत से ऊपर अंक प्राप्त करें।
बैठक में शामिल एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अब सभी जिलों को ‘क्वालिटी आउटपुट’ पर ही काम करना होगा। हर विद्यालय को अपना प्रदर्शन उठाने के लिए ठोस रणनीतियां बनानी होंगी।
शिक्षकों को सप्ताह में तीन बार अनिवार्य होमवर्क देने के निर्देश
अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि शिक्षक सप्ताह में कम से कम तीन बार छात्रों को होमवर्क दें, उसका नियमित रूप से परीक्षण करें और मूल्यांकन के बाद जरूरी सुधारात्मक कदम उठाएं।
यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कई रिपोर्टों में पाया गया है कि छात्रों की बुनियादी पढ़ने-लिखने और समझने की क्षमता में कमी आ रही है। नियमित होमवर्क और उसकी जांच छात्रों के सीखने की प्रक्रिया को मजबूत करेगा।
शिक्षण दिवस घटेंगे, पर पाठ्यक्रम समय पर पूरा करना आवश्यक
राज्य सरकार अगले शैक्षणिक सत्र की शुरुआत 1 अप्रैल से करने की तैयारी कर रही है। ऐसे में वर्तमान सत्र में शिक्षण दिवस कम हो जाएंगे तथा 10 से 15 दिनों का अंतराल बनेगा। इस कमी की भरपाई के लिए शिक्षा सचिव ने अधिकारियों और शिक्षकों को अतिरिक्त प्रयास करने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि बोर्ड कक्षाओं का पाठ्यक्रम हर हाल में समय पर पूरा होना चाहिए ताकि विद्यार्थियों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
पाठ्यक्रम में कटौती नहीं होगी, लेकिन विकल्प बढ़ सकते हैं
शिक्षा सचिव ने स्पष्ट किया कि पाठ्यक्रम में कटौती नहीं की जाएगी। हालांकि, प्रश्नपत्रों में अधिक विकल्प देने या मध्यावधि परीक्षा में बोनस अंक देने जैसे उपायों पर विचार किया जा रहा है। यह बदलाव छात्रों के प्रदर्शन को बेहतर बनाने में सहायता कर सकते हैं।
इसके साथ ही आगामी वर्ष में जनगणना कार्य शुरू होने की भी संभावना है, ऐसे में शिक्षकों को अपने नियमित शिक्षण दायित्वों के साथ संतुलन बनाकर काम करना होगा।
DEAR पहल को प्राथमिकता: पढ़ने की आदत होगी मजबूत
बैठक में शिक्षा सचिव कृष्ण कुणाल ने ‘ड्रॉप एवरीथिंग एंड रीड’ (DEAR) पहल को सर्वोच्च प्राथमिकता देने को कहा। यह पहल छात्रों की पढ़ने और समझने की क्षमता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
उन्होंने कहा कि जब तक छात्र पढ़कर समझना नहीं सीखेंगे, तब तक वे प्रश्नों के सही उत्तर नहीं दे पाएंगे। इसलिए पठन अभियान को गंभीरता से लागू किया जाए और प्रत्येक विद्यालय में इसे सख्ती से अपनाया जाए।


