मनीषा शर्मा। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया का डूंगरपुर दौरा शनिवार को प्रदेश की राजनीति में नई हलचल का कारण बन गया। राजे बांसवाड़ा के गढ़ी जा रही थीं, जहां उन्हें एक शोक संतप्त परिवार से मिलना था, लेकिन रास्ते में उन्होंने डूंगरपुर सर्किट हाउस में ठहरकर भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं से अनौपचारिक संवाद किया। मीडिया की मौजूदगी से दूर हुई इस बैठक ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू कर दी हैं।
सर्किट हाउस में गर्मजोशी से स्वागत
डूंगरपुर पहुंचने पर भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने राजे का जोरदार स्वागत किया। स्वागत के तुरंत बाद राजे सर्किट हाउस के एक कमरे में पहुंचीं, जहां वरिष्ठ पदाधिकारियों, पूर्व पदाधिकारियों और सक्रिय कार्यकर्ताओं के साथ बैठक शुरू हुई। इस बैठक में किसी भी मीडिया प्रतिनिधि को प्रवेश नहीं दिया गया।
जैसे ही बातचीत शुरू हुई, राजे ने सहज अंदाज में पूछा, “बताओ आजकल क्या चल रहा है?” इस एक सवाल के बाद कार्यकर्ताओं ने खुलकर अपनी समस्याएं और नाराजगी सामने रखनी शुरू कर दी।
प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्यकर्ताओं की नाराजगी
सबसे पहले, पूर्व जिलाध्यक्ष और पूर्व सभापति गुरुप्रसाद पटेल ने बेबाकी से प्रशासनिक ढांचे पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी न तो जनता की सुन रहे हैं और न ही भाजपा कार्यकर्ताओं की। कई समस्याएं बार-बार उठाने के बावजूद अधिकारियों का रवैया उदासीन बना हुआ है।
गुरुप्रसाद पटेल ने यह भी कहा कि स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार से पार्टी कार्यकर्ताओं में निराशा बढ़ रही है। उन्होंने राजे से इस मुद्दे पर ध्यान दिलाने की मांग की।
स्वच्छता बजट और पुरस्कार राशि को लेकर शिकायत
बैठक के दौरान नगर परिषद सभापति अमृत कलासुआ ने स्वच्छता से जुड़े मुद्दे पर महत्वपूर्ण बात रखी। उन्होंने बताया कि डूंगरपुर नगर परिषद लगातार स्वच्छता पुरस्कार जीत रही है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें पर्याप्त बजट या इनाम राशि उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।
सभापति ने कहा कि यदि नगर परिषद को उचित बजट मिले तो सफाई के नए उपकरण खरीदे जा सकते हैं, जिससे शहर की स्वच्छता को और बेहतर किया जा सके। उन्होंने बताया कि स्वच्छता टीम और नगर परिषद कई वर्षों से बेहतर प्रदर्शन कर रही है, लेकिन संसाधनों की कमी बाधा बनती जा रही है।
राजनीतिक संकेत या सामान्य चर्चा?
जब राजे से मीडिया ने बंद कमरे की बैठक को लेकर सवाल किया, विशेष रूप से राज्य सरकार के दो साल के कार्यकाल पर उनकी प्रतिक्रिया जाननी चाही, तो उन्होंने किसी भी तरह के राजनीतिक बयान से दूरी बना ली। राजे ने कहा, “मैं बांसवाड़ा के लिए जा रही हूं। यह मेरा कोई पॉलिटिकल कार्यक्रम नहीं है।”
इसके बाद वह तुरंत बांसवाड़ा के गढ़ी के लिए रवाना हो गईं, जहां वह विधायक कैलाश मीणा के पुत्र के निधन पर शोक संतप्त परिवार से मिलने पहुंचीं।
बैठक से उभरे संभावित राजनीतिक संदेश
भले ही राजे ने इसे राजनीतिक दौरा मानने से इंकार कर दिया हो, लेकिन डूंगरपुर में उनके इस अचानक बैठक ने कई राजनीतिक संकेतों को जन्म दे दिया है। कार्यकर्ताओं की प्रशासन के प्रति शिकायतें सीधे तौर पर राज्य सरकार के कामकाज पर सवाल उठाती हैं। साथ ही, राजे का नेताओं और कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद करना पार्टी के अंदर उनकी सक्रियता और पकड़ को दर्शाता है।


