शोभना शर्मा। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नई संगठनात्मक टीम घोषित होते ही कई प्रमुख नाम सुर्खियों में आ गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व मंत्री सुरेन्द्र पाल सिंह टीटी की हो रही है, जिन्हें विधायक न होने के बावजूद फिर से बड़े पद पर नियुक्त किया गया है। भाजपा सरकार बनने के बाद उन्हें मंत्री बनाया गया था, लेकिन चुनाव में हार के बाद उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ा था। इसके बाद भी पार्टी ने उन पर पूर्ण विश्वास जताते हुए उन्हें प्रदेश उपाध्यक्ष नियुक्त कर दिया है। माना जा रहा है कि यह नियुक्ति टीटी की राजनीतिक सक्रियता, जनसंपर्क और संगठन में मजबूत पकड़ को देखते हुए की गई है।
दूसरी ओर, संगठन में महामंत्री पद पर केवल एक ही नाम दोबारा जगह बनाने में सफल रहा है — श्रवण सिंह बगड़ी। वे पिछली टीम में भी महामंत्री के पद पर थे और नए कार्यकाल में भी पार्टी ने उन पर भरोसा कायम रखा है। प्रदेश संगठन में उपलब्ध नामों की बात करें तो बगड़ी के अनुभव और कार्य पद्धति को देखते हुए उन्हें फिर से अहम जिम्मेदारी मिली है।
नई टीम में भूपेंद्र सैनी, मिथलेश गौतम और कैलाश मेघवाल को प्रमोशन देकर महामंत्री बनाया गया है। भूपेंद्र सैनी और मिथलेश गौतम पहले प्रदेश मंत्री थे, जबकि कैलाश मेघवाल एससी मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष रहे हैं। इस तरह तीनों नेताओं को संगठन में बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है और इसे प्रदेश संगठन के भीतर नई ऊर्जा लाने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।
भाजपा पदाधिकारियों की सूची पर नजर डालें तो जयपुर जिला सबसे आगे रहा है। कुल 34 पदाधिकारियों में से सबसे ज्यादा 13 नेता जयपुर के शामिल हैं। वहीं सीएम भजनलाल शर्मा के गृह जिला भरतपुर से किसी भी नेता को शामिल नहीं किया गया है, जो राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। नई टीम में 18 सामान्य वर्ग, 10 ओबीसी और 5 एससी-एसटी वर्ग के नेताओं को जगह दी गई है। इससे जातिगत और भौगोलिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश साफ दिखाई देती है। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि टीम के चयन में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, आरएसएस नेतृत्व, पूर्व सीएम वसुंधरा राजे और प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के सुझावों को महत्व दिया गया है।
इस टीम को तैयार करने की प्रक्रिया सहज नहीं रही। अगस्त में टीम घोषित की जानी थी, लेकिन इससे पहले कथित तौर पर दो बार पूरी सूची सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। इससे संगठन में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई और आधिकारिक सूची जारी नहीं हो सकी। उस समय प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने स्पष्ट किया था कि पार्टी द्वारा कोई अंतिम सूची जारी नहीं की गई है। अब आधिकारिक सूची जारी होने के साथ विवादों और अटकलों पर विराम लग गया है।
नई टीम में कई पुराने कार्यकर्ताओं और दिग्गज नेताओं को भी दोबारा जिम्मेदारी दी गई है, जिनमें मुकेश दाधीच, ज्योति मिर्धा, नाहर सिंह जोधा, श्रवण सिंह बगड़ी, विजेंद्र पूनिया, भूपेंद्र सैनी, अजीत मांडन, स्टेफी चौहान, मिथलेश गौतम, आईदान सिंह भाटी, पंकज गुप्ता, मुकेश पारीक, प्रमोद वशिष्ठ, हीरेन्द्र कौशिक, अविनाश जोशी, कैलाश मेघवाल, कुलदीप धनखड़, रामलाल शर्मा, राखी राठौड़ और अपूर्वा सिंह प्रमुख नाम हैं। ये सभी पहले भी अलग-अलग जिम्मेदारियों पर सक्रिय रहे हैं और अब उन्हें फिर से अवसर दिया गया है।
विशेष रूप से सुरेन्द्र पाल सिंह टीटी की नियुक्ति को भाजपा की रणनीति के केंद्र में देखा जा रहा है। चुनाव हारने के बाद भी टीटी को संगठन में रखा जाना इस बात का संकेत है कि भाजपा उनके प्रभाव और राजनीतिक व संगठनात्मक संभावनाओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहती। वहीं श्रवण सिंह बगड़ी पर दोबारा भरोसा जताया जाना बताता है कि संगठन अनुभवी नेतृत्व को भी प्राथमिकता देता है।
नई टीम के गठन के साथ राजस्थान में भाजपा संगठन के लिए अगले पांच वर्षों की रणनीति तय मानी जा रही है। पार्टी का उद्देश्य सरकार और संगठन के बीच तालमेल, बूथ स्तर पर मजबूती और 2028 विधानसभा चुनाव के लिए तैयारी को गति देना है। अब यह देखने वाली बात होगी कि यह नई टीम संगठन को किस दिशा में आगे बढ़ाती है और राजनीतिक व चुनावी परिणामों में इसका कितना प्रभाव दिखता है।


