मनीषा शर्मा। राजस्थान सरकार के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के राजसमंद दौरे के दौरान किए गए विद्यालय निरीक्षण को लेकर शुक्रवार को एक प्रतिष्ठित मीडिया संगठन द्वारा विवादित खबर प्रसारित की गई, जिसके बाद शिक्षा विभाग में हलचल मच गई। खबर में दावा किया गया था कि शिक्षा मंत्री ने निरीक्षण के दौरान विद्यालय के प्रधानाचार्य से कथित तौर पर यह पूछा कि क्या कोई छात्र स्कूल में बुर्का पहनकर आता है। इस कथित बयान के वायरल होते ही मामला राजनीतिक रंग लेने लगा। हालांकि, अब विद्यालय प्रधानाचार्य ने इस पूरे मामले को मनगढ़ंत बताते हुए खबर का स्पष्ट खंडन किया है।
यह पूरी घटना राजसमंद जिले के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, भाव में हुए निरीक्षण से जुड़ी है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर गुरुवार को चार सरकारी विद्यालयों के औचक निरीक्षण पर पहुंचे थे। उनका उद्देश्य विद्यालयों की वास्तविक स्थिति, संसाधन, अनुशासन और शिक्षण व्यवस्था का मूल्यांकन करना था। निरीक्षण के दौरान उन्होंने प्रत्येक स्कूल में सफाई, व्यवस्थाओं और छात्रों के शैक्षणिक प्रदर्शन का जायजा लिया और आवश्यक सुधारों के निर्देश दिए।
निरीक्षण समाप्त होने के बाद शुक्रवार को एक मीडिया कंपनी ने दावा किया कि दिलावर ने विद्यालय प्रधानाचार्य से सवाल किया कि क्या कोई विद्यार्थी बुर्का पहनकर स्कूल आता है। इस दावे के बाद कई सामाजिक संगठनों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर बहस शुरू हो गई। यह आरोप लगाया गया कि मंत्री ने धार्मिक परिधान को लेकर अनुचित टिप्पणी की। इसी बीच मामला तेजी से फैलने लगा और शिकायतें शिक्षा विभाग तक पहुँचीं।
लेकिन विवाद बढ़ने के कुछ ही घंटों बाद विद्यालय प्रधानाचार्य सीमा गहलोत ने इस खबर को पूरी तरह असत्य और भ्रामक बताते हुए खंडन जारी किया। सीमा गहलोत ने स्पष्ट कहा कि न तो मंत्री ने ऐसा कोई सवाल पूछा और न ही विद्यालय में अल्पसंख्यक समुदाय का कोई विद्यार्थी पढ़ता है। ऐसे में बुर्का पहनने का प्रश्न ही उत्पन्न नहीं होता। उन्होंने कहा कि जिस मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है उसका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि मंत्री ने विद्यालय की व्यवस्थाओं की काफी प्रशंसा की थी और शिक्षण व्यवस्था को बेहतर बताते हुए उन्हें बधाई दी थी।
प्रिंसिपल सीमा गहलोत ने आरोप लगाया कि यह खबर गलत तरीके से प्रस्तुत की गई है और ऐसा प्रतीत होता है कि किसी सस्ती लोकप्रियता या राजनीतिक उद्देश्य से सरकारी कर्मचारियों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विद्यालय का माहौल शांतिपूर्ण और अनुशासित है तथा छात्रों की प्रगति पर लगातार निगरानी रखी जाती है। इस परिस्थिति में ऐसी मनगढ़ंत खबरें विद्यालय और विभाग दोनों की छवि पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं।
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने भी इस पूरे विवाद को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि उन्होंने विद्यालय में किसी धार्मिक परिधान या किसी समुदाय से जुड़ा कोई प्रश्न नहीं पूछा। मंत्री ने कहा कि वह केवल स्कूल की व्यवस्थाओं, सफाई, अनुशासन और शिक्षा की गुणवत्ता पर ध्यान दे रहे थे। दिलावर ने विद्यालय की व्यवस्था को काफी अच्छा बताते हुए संस्था प्रधान की सराहना की थी। उन्होंने कहा कि स्कूल में अनुशासन, छात्रों का व्यवहार और शिक्षकों की व्यवस्था संतोषजनक थी और ऐसे स्कूलों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
विवादित खबर सामने आने के बाद विभागीय अधिकारियों ने भी इस मामले की जांच की और पाया कि विद्यालय की ओर से इस प्रकार का कोई बयान जारी नहीं किया गया था। न ही निरीक्षण की किसी वीडियो फुटेज में ऐसा कोई संवाद दिखाई देता है। विभाग के अनुसार, सोशल मीडिया पर चल रही यह खबर पूरी तरह से भ्रामक थी।
राजस्थान में सरकारी स्कूलों की व्यवस्था और शिक्षण गुणवत्ता को सुधारने के लिए शिक्षा मंत्री लगातार जिलों का दौरा कर रहे हैं। ऐसे में निरीक्षण को विवादित रूप देना प्रयासों को कमजोर करता है। शिक्षाविदों का मानना है कि इस तरह की गलत रिपोर्टिंग से न केवल प्रशासन की छवि खराब होती है, बल्कि स्कूलों में काम कर रहे शिक्षकों और कर्मचारियों का मनोबल भी टूटता है।


