शोभना शर्मा। संविधान दिवस के अवसर पर अलवर जिले के कलेक्ट्रेट परिसर में ऐसा नज़ारा दिखाई दिया जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया। आमतौर पर विवाह समारोह संगीत, शोर-शराबे और भव्य इंतजामों के बीच संपन्न होते हैं, लेकिन यहां दो युवा न्यायिक अधिकारियों ने समाज के सामने सादगी और विचारों से भरा ऐसा उदाहरण पेश किया, जिसे हर कोई सराहता नजर आया। संविधान को साक्षी मानकर प्रेम और विश्वास से बंधे इस विवाह ने यह संदेश दिया कि यदि देश के न्याय देने वाले दहेज और दिखावे से दूर रहकर सादगी को अपना सकते हैं तो समाज क्यों नहीं।
बानसूर के गूंता शाहपुर निवासी हेमंत मेहरा और हनुमानगढ़ जिले की करीना काला, दोनों न्यायिक अधिकारी, लंबे समय से विवाह की इच्छाओं के साथ अपने व्यावसायिक मूल्यों और सामाजिक संदेश को जोड़ना चाहते थे। इसीलिए दोनों ने विवाह के लिए संविधान दिवस यानी 26 नवंबर का दिन चुना। उनका कहना था कि संविधान न्याय, समानता और सामाजिक समरसता का प्रतिनिधित्व करता है और उनका मिलन उसी मूल भावना पर आधारित होना चाहिए।
विवाह समारोह अलवर जिला कलेक्ट्रेट परिसर में पूरी सादगी और शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित किया गया। जिला कलक्टर प्रियंका गोस्वामी और एडीएम ओमप्रकाश सहारण की उपस्थिति में हुए इस विवाह में दोनों परिवार मौजूद रहे। बिना बैंड-बाजे, कार्ड वितरण, बड़े आयोजन और फिजूलखर्ची के आयोजित यह विवाह सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय हलकों तक चर्चा का विषय बन गया। उपस्थित लोगों का कहना था कि आधुनिकता और दिखावे के इस दौर में ऐसा विवाह समाज में कई सकारात्मक बदलावों की नींव रख सकता है।
हेमंत मेहरा—परिश्रम और संघर्ष की कहानी
हेमंत मेहरा का जीवन संघर्ष और मेहनत से भरा रहा है। गूंता शाहपुर में जन्मे हेमंत के पिता रिटायर्ड शिक्षक हैं, जबकि उनकी मां गृहणी और बड़े भाई कृषि कार्य संभालते हैं। हेमंत ने 2021 में कोरोना संक्रमण के बाद अपनी प्रथम पोस्टिंग ली और बानसूर में प्रशिक्षण के दौरान क्षेत्र की समस्याओं और न्याय व्यवस्था को करीब से समझा। बाद में उन्हें जोधपुर में पोस्टिंग प्राप्त हुई और प्रोविजनल काल के बाद जयपुर जिला एवं सेशन कोर्ट में पदस्थापित हुए। न्यायिक सेवा में आने से पहले उन्होंने बानसूर में वकालत भी की, जहां से न्याय के प्रति उनकी समझ और संवेदनशीलता और पुख्ता हुई।
करीना काला—सपनों और मूल्यों के साथ आगे बढ़ती युवती
करीना काला का मूल निवास हनुमानगढ़ जिले के नोहर में है। उनके पिता एमपी काला रिटायर्ड प्राचार्य हैं और मां गृहणी। करीना ने आरजेएस परीक्षा पास कर न्यायिक सेवा में प्रवेश किया और वर्तमान में प्रशिक्षण अवधि में हैं। उन्होंने हमेशा सामाजिक मूल्यों को महत्व दिया है और उसी सोच के साथ उन्होंने विवाह के लिए सादगी और बिना दहेज का मार्ग चुना। उनके अनुसार सामाजिक बदलाव बड़े नारे लगाने से नहीं, बल्कि छोटे व्यक्तिगत निर्णयों से शुरू होते हैं।
समाज के लिए प्रेरणा
कलेक्ट्रेट परिसर में संपन्न हुए इस विवाह में किसी प्रकार का भौतिक प्रदर्शन नहीं किया गया। केवल परिवार, कुछ अधिकारी और सीमित साक्षी मौजूद थे। विवाह का सबसे विशेष पल वह था जब दोनों युवा जजों ने संविधान की प्रति को साक्षी मानकर जीवनभर साथ निभाने का संकल्प लिया। यह दृश्य इस संदेश को मजबूत करता है कि विवाह केवल रस्म नहीं बल्कि जिम्मेदारी और समानता का संबंध है।
जिला कलेक्टर प्रियंका गोस्वामी ने दोनों नवविवाहितों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि दहेज-मुक्त और सादगी भरे विवाह समाज के लिए अनुकरणीय उदाहरण बन सकते हैं। यह कदम न केवल न्याय व्यवस्था का सम्मान बढ़ाता है, बल्कि समाज को यह भी बताता है कि बदलाव की शुरुआत स्वयं से की जा सकती है।


