मनीषा शर्मा। दौसा जिले में समग्र शिक्षा अभियान (समसा) के तहत बनाए गए नए भवनों के शिलान्यास को लेकर विवाद लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। मामला उस समय गरमाया जब कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के छोटे भाई और हाल ही में भाजपा के विधानसभा प्रत्याशी रहे जगमोहन मीणा से सरकारी भवनों का शिलान्यास करवा दिया गया। इस घटनाक्रम के बाद पहले स्थानीय विधायक दीनदयाल बैरवा ने कड़ी आपत्ति जताई और अब दौसा सांसद मुरारीलाल मीणा ने इसे गंभीर प्रोटोकॉल उल्लंघन बताते हुए औपचारिक रूप से विरोध दर्ज कराया है। सांसद ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राजस्थान के मुख्य सचिव को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की है।
17 नवंबर को हुआ था विवादित शिलान्यास
दौसा जिले के लवाण ब्लॉक की बूटौली और मूसोलाई ग्राम पंचायतों में 17 नवंबर को समसा द्वारा बनाए जा रहे नए सरकारी भवनों का शिलान्यास कराया गया। कार्यक्रम में भाजपा प्रत्याशी रहे जगमोहन मीणा मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे और उन्हीं से पट्टिका का अनावरण करवाया गया। इस कार्यक्रम में न तो क्षेत्रीय विधायक को बुलाया गया और न ही सांसद को आमंत्रित किया गया। शिलान्यास पट्टिका पर भी निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के नाम अंकित नहीं किए गए।
इस घटना के तुरंत बाद दौसा विधायक दीनदयाल बैरवा ने इसे जनप्रतिनिधियों का अपमान बताते हुए गंभीर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि किसी भी सरकारी कार्यक्रम में चुने हुए प्रतिनिधियों की अनदेखी करना परंपराओं और नियमों के खिलाफ है। मामले ने और जोर तब पकड़ा जब सांसद मुरारीलाल मीणा ने भी इसी मुद्दे पर अपनी असहमति सार्वजनिक की।
सांसद ने इसे बताया अधिकारों का हनन
25 नवंबर को सांसद मुरारीलाल मीणा ने मुख्य सचिव को एक विस्तृत पत्र भेजा है। सांसद ने लिखा कि उनके संसदीय क्षेत्र में केंद्र सरकार के अंतर्गत आने वाली कई योजनाओं और परियोजनाओं पर कार्य चल रहे हैं। इन विकास कार्यों के लिए वे स्वयं संसद में आवाज उठाते रहे हैं, संबंधित मंत्रियों से मुलाकात कर आवश्यक स्वीकृतियां दिलाते रहे हैं। ऐसे में उन योजनाओं की पट्टिकाओं पर उनका नाम न जोड़ना और उद्घाटन कार्यक्रमों में उन्हें आमंत्रण न भेजना बेहद खेदजनक है।
सांसद ने पत्र में स्पष्ट कहा कि पट्टिकाओं पर उन व्यक्तियों के नाम अंकित किए जा रहे हैं, जो सिर्फ लोकसभा या विधानसभा के उम्मीदवार रहे हैं, जबकि वे वर्तमान में क्षेत्र के निर्वाचित सांसद हैं। यह स्थिति न केवल प्रोटोकॉल के विपरीत है, बल्कि संसदीय परंपराओं का उल्लंघन भी है। सांसद ने यह भी मांग की कि जिन योजनाओं में केंद्र सरकार की निधि का उपयोग हो रहा है, उनकी सभी पट्टिकाओं में उनका नाम जोड़ा जाए और भविष्य में कार्यक्रमों में उन्हें अनिवार्य रूप से आमंत्रित किया जाए।
संसद की विशेषाधिकार समिति में मुद्दा उठाने की चेतावनी
सांसद मुरारीलाल मीणा ने कहा कि यह मामला सिर्फ अनदेखी का नहीं, बल्कि संसदीय विशेषाधिकार के उल्लंघन का है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आगे भी इसी प्रकार नियमों का उल्लंघन होता रहा तो वे लोकसभा की विशेषाधिकार समिति के सामने यह मुद्दा उठाने के लिए बाध्य होंगे। सांसद ने कहा कि केंद्रीय निधि से होने वाले कार्यों में क्षेत्रीय सांसद की उपस्थिति अनिवार्य होती है, ऐसे में अधिकारियों का यह रवैया स्वीकार योग्य नहीं है। उन्होंने मांग की कि नियमों की अवहेलना करने वाले अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जाए।
विधायक दीनदयाल बैरवा ने अधिकारियों पर लगाया तानाशाही का आरोप
मामले पर स्थानीय विधायक दीनदयाल बैरवा भी शुरुआत से ही मुखर हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी पार्टी की सरकार रही हो, लेकिन चुने हुए जनप्रतिनिधियों का सम्मान हमेशा बनाए रखा गया है। इस बार विभागीय अधिकारियों ने बिना किसी पूर्व सूचना के भाजपा प्रत्याशी से शिलान्यास करवाकर खुलकर पक्षपात दिखाया है। विधायक के अनुसार पट्टिकाओं पर सांसद, विधायक, जिला परिषद सदस्यों सहित किसी का नाम नहीं दिया गया, जिससे साफ है कि अधिकारियों पर दबाव है और वे तानाशाही रवैया अपना रहे हैं। विधायक ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में भी ऐसी घटनाएं दोहराई गईं तो वे विधानसभा सत्र में यह मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाएंगे और शिक्षा मंत्री से इस बारे में औपचारिक शिकायत करेंगे।
विवाद से बढ़ा राजनीतिक तापमान
इस पूरे मामले ने दौसा जिले में राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। सांसद और विधायक दोनों ही इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर आघात और नियमों का उल्लंघन बता रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनावों के बाद जिले में भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच बढ़ते तनाव की यह एक और कड़ी है। शिलान्यास जैसे सरकारी कार्यक्रमों में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की अनदेखी नया विवाद खड़ा कर सकती है।


