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RPSC में 1.14 लाख उम्मीदवारों ने वापस लिया आवेदन, आयोग को करोड़ों की बचत

RPSC में 1.14 लाख उम्मीदवारों ने वापस लिया आवेदन, आयोग को करोड़ों की बचत

मनीषा शर्मा, अजमेर। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा शुरू की गई आवेदन विड्रॉ सुविधा ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, आर्थिक बचत और प्रशासनिक दक्षता को नया आयाम दिया है। आयोग की 44 भर्तियों में आवेदन करने वाले 1 लाख 14 हजार 736 उम्मीदवारों ने अपने आवेदन वापस ले लिए हैं। यह संख्या न केवल भर्ती प्रक्रिया में अनावश्यक दबाव कम करती है, बल्कि सरकारी संसाधनों के प्रभावी उपयोग की दिशा में भी बड़ा कदम साबित हुई है।

दो करोड़ रुपए की संभावित बचत, कम करने पड़े कई परीक्षा केंद्र

आयोग के अनुसार, आवेदन विड्रॉ की सुविधा मिलने से हजारों अनावश्यक आवेदन हट गए, जिससे परीक्षा केंद्रों की संख्या में भी उल्लेखनीय कमी आई। प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर करीब 50 हजार रुपए का खर्च होता है। आवेदन विड्रॉ की वजह से कई सेंटर कम लगाने पड़े। अनुमान है कि आयोग को लगभग 2 करोड़ रुपए की बचत हुई। यह बचत न केवल वित्तीय स्तर पर महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे पूरे व्यवस्थापन पर पड़ने वाले दबाव में भी कमी आई है।

आयोग अध्यक्ष ने बताया—पारदर्शी और समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

RPSC अध्यक्ष उत्कल रंजन साहू ने इस फैसले को एक बड़े नवाचार के रूप में सराहा। उन्होंने कहा कि— अनावश्यक आवेदनों के कम होने से आयोग अब योग्य उम्मीदवारों की तेजी से स्क्रूटनी कर पा रहा है। समय पर भर्ती करना आसान हुआ है। यह मॉडल अन्य भर्ती संस्थाओं द्वारा भी अपनाया जा रहा है। साहू ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन उम्मीदवारों ने योग्यता नहीं होने के बावजूद आवेदन वापस नहीं लिया है, उन पर नियमानुसार कार्रवाई होगी।

योग्यता न होने पर आवेदन नहीं लौटाने वालों के खिलाफ कार्रवाई

पिछले वर्ष असिस्टेंट प्रोफेसर (संस्कृत कॉलेज शिक्षा विभाग) भर्ती–2024 में भी कई अभ्यर्थियों ने योग्यता न होने के बावजूद आवेदन किए थे। आयोग ने चेतावनी देने के बाद भी आवेदन न हटाने वाले 14 उम्मीदवारों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 217 के तहत परिवाद दायर किया। यही प्रक्रिया अब अन्य भर्तियों में भी लागू होगी। आयोग का कहना है कि यह कदम भर्ती प्रक्रिया की गंभीरता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

वित्तीय बचत के साथ प्रशासनिक भार में भी कमी

RPSC सचिव रामनिवास मेहता ने बताया कि यह नवाचार सिर्फ वित्तीय लाभ तक सीमित नहीं है। इसके कई प्रशासनिक फायदे भी हुए— लाखों अनावश्यक आवेदनों के हटने से प्रश्नपत्र छपाई, परीक्षा केंद्र प्रबंधन, परीक्षा सत्र निर्धारण सहित कई चरणों में बड़ा बोझ कम हुआ। इससे सरकारी धन की कई करोड़ों की बचत हुई। भर्ती प्रक्रिया अब और सुचारू और कम खर्चीली हो गई है।

आवेदन फॉर्म मुफ्त होने से बढ़ती है गलत आवेदनों की संख्या

आयोग ने माना कि आवेदन शुल्क शून्य होने का फायदा उठाकर कई अभ्यर्थी बिना योग्यता देखे ही आवेदन कर देते हैं। इससे न केवल प्रक्रिया जटिल होती है, बल्कि सार्वजनिक संसाधनों का अपव्यय भी होता है। आयोग ने स्पष्ट अपील की है कि— जो उम्मीदवार विज्ञापन में दी गई न्यूनतम योग्यता रखते हों और परीक्षा देने का इरादा रखते हों, वही आवेदन करें। यह कदम परीक्षा आयोजन को समयबद्ध, निर्बाध और पारदर्शी बनाए रखने में सहायक है।

भर्ती प्रक्रिया में सुधार का बड़ा कदम

RPSC द्वारा शुरू की गई आवेदन विड्रॉ प्रणाली— प्रशासनिक बोझ घटाती है, योग्य उम्मीदवारों पर फोकस बढ़ाती है, और सरकारी संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। यह पहल भविष्य में होने वाली सभी भर्ती प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित और कुशल बनाने का आधार तैयार करती है।

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