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UIDAI ने 2 करोड़ से अधिक आधार नंबर डिएक्टिवेट किए, अब परिजन भी दे सकेंगे मृत्यु की सूचना

UIDAI ने 2 करोड़ से अधिक आधार नंबर डिएक्टिवेट किए, अब परिजन भी दे सकेंगे मृत्यु की सूचना

शोभना  शर्मा। देश में आधार पहचान प्रणाली को और अधिक सुरक्षित, प्रभावी और अद्यतन बनाने के उद्देश्य से भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने एक बड़ा कदम उठाया है। UIDAI ने हाल ही में घोषणा की है कि उसने ऐसे 2 करोड़ से ज्यादा लोगों के आधार नंबरों को निष्क्रिय कर दिया है जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। यह फैसला रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (RGI), राज्यों और केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों से प्राप्त डेटा के आधार पर लिया गया है। यह कदम न सिर्फ आधार डेटाबेस को अपडेट रखने के लिए अहम है, बल्कि पहचान धोखाधड़ी को रोकने तथा सरकारी योजनाओं के लाभ को सही पात्रों तक पहुंचाने के लिए भी बेहद जरूरी है।

नई व्यवस्था के तहत UIDAI ने यह भी सुनिश्चित किया है कि अब मृतक लोगों के आधार नंबर को डीएक्टिवेट करने की पूरी प्रक्रिया और सरल एवं पारदर्शी बने। अब परिवार के सदस्य स्वयं MyAadhaar पोर्टल पर जाकर मृत्यु की सूचना दे सकते हैं। इससे किसी व्यक्ति के निधन के बाद उसके आधार डेटा को रिकॉर्ड में समय पर अपडेट किया जा सकेगा और उसकी पहचान का किसी भी तरह का गलत उपयोग रोका जा सकेगा।

क्यों उठाया गया यह कदम

आधार कार्ड भारत में पहचान से संबंधित सबसे बड़ा डेटाबेस है और इसका उपयोग DBT, सरकारी योजनाओं, बैंक खाता, पेंशन, मोबाइल सत्यापन और कई तरह की सेवाओं में किया जाता है। ऐसे में किसी मृत व्यक्ति के नाम पर आधार का सक्रिय रहना कई तरह के जोखिम बढ़ाता है। मृत व्यक्ति के नाम पर सरकारी लाभ प्राप्त करना, पहचान धोखाधड़ी करना, या वित्तीय लेन-देन करना जैसी स्थितियां सामने आ सकती हैं, जिन्हें रोकना आवश्यक है।

UIDAI ने यह स्पष्ट किया है कि आधार नंबर किसी अन्य व्यक्ति को दोबारा आवंटित नहीं किया जाता। इसलिए किसी भी मृत व्यक्ति का आधार नंबर सक्रिय रहने से सिस्टम में भ्रम और गड़बड़ी की संभावना बनी रहती है। मृतक डेटा को साफ करना यानी Deactivate/Deactivate करने से डेटाबेस की विश्वसनीयता और पारदर्शिता बढ़ती है। इसी कारण UIDAI ने लाखों नहीं बल्कि करोड़ों आधार नंबरों को सत्यापन के बाद निष्क्रिय करने का फैसला लिया।

नयी सुविधा कैसे करेगी डेटाबेस को कारगर

UIDAI ने इस साल की शुरुआत में एक नई सुविधा लॉन्च की है, जिसके तहत मृतक व्यक्ति की मृत्यु की सूचना परिवार के सदस्य MyAadhaar पोर्टल के माध्यम से दे सकते हैं। पहले यह काम केवल सरकारी विभागों और सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) के माध्यम से ही संभव था। लेकिन अब नागरिक भी इस प्रक्रिया में प्रत्यक्ष रूप से शामिल हो सकेंगे।

यह सुविधा फिलहाल ऐसे 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में उपलब्ध है, जहां मृत्यु पंजीकरण के लिए CRS का उपयोग किया जा रहा है। अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए इस सुविधा को पोर्टल से जोड़ने की प्रक्रिया जारी है और जल्द ही पूरे देश में परिवार के सदस्य आधार मृत्यु अपडेट के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।

कैसे होगा लाभ

इस कदम से कई बड़े लाभ होने वाले हैं। सबसे पहला फायदा यह होगा कि सरकारी योजनाओं जैसे पेंशन, राशन, स्वास्थ्य बीमा, DBT और अन्य लाभ वास्तविक और जीवित पात्र लाभार्थियों तक ही पहुंचेंगे। मृत व्यक्ति की पहचान से लाभ उठाने की संभावना समाप्त होगी। इसके अलावा आधार-आधारित बैंकिंग और वित्तीय लेनदेन में धोखाधड़ी के जोखिम कम होंगे।

दूसरा बड़ा लाभ यह है कि आधार डेटाबेस हमेशा अद्यतन और सटीक रहेगा। विश्व के सबसे बड़े पहचान डेटाबेस में से एक होने के नाते इसकी शुद्धता और सुरक्षा देश की डिजिटल पहचान प्रणाली के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। UIDAI का यह फैसला आधार की विश्वसनीयता को और भी मजबूत बनाएगा।

कानूनी और प्रशासनिक महत्व

सरकार के लिए मृत लाभार्थियों के नाम पर चल रही योजनाओं में घोटालों को रोकना हमेशा बड़ी चुनौती रही है। कई रिपोर्टों में सामने आया है कि कई लाभार्थी वर्षों पहले गुजर चुके हैं, लेकिन उनके नाम पर लाभ की राशि जारी होती रही। UIDAI द्वारा आधार Deactivation की यह प्रक्रिया इन सभी संभावित दुरुपयोगों पर रोक लगाएगी।

इसके अतिरिक्त, यह सुविधा परिवार के सदस्यों के लिए भी उपयोगी है क्योंकि मृत्यु के बाद पहचान अपडेट के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की आवश्यकता कम होगी। ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से प्रक्रिया सरल और पारदर्शी हो जाएगी।

आगे का रास्ता

UIDAI ने स्पष्ट किया है कि आने वाले महीनों में इस सुविधा को पूरे देश में लागू कर दिया जाएगा। साथ ही डिजिटल मृत्यु पंजीकरण और आधार लिंकिंग को मजबूत बनाने पर भी काम किया जा रहा है, ताकि भविष्य में किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसका आधार स्वतः निष्क्रिय हो सके।

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