शोभना शर्मा। राजस्थान की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नगरी बूंदी में ‘बूंदी महोत्सव 2025’ के कार्यक्रमों की श्रृंखला के तहत रविवार को कुंभा स्टेडियम में उद्योग एवं हस्तशिल्प मेले का शुभारंभ हुआ।
इस मेले का उद्घाटन जिला कलक्टर अक्षय गोदारा, पुलिस अधीक्षक राजेंद्र कुमार मीणा और नगर परिषद सभापति सरोज अग्रवाल ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया। मेले के शुभारंभ के साथ ही बूंदी में कला, संस्कृति और परंपरा का जीवंत संगम देखने को मिला।
कारीगरों का हुनर बना आकर्षण का केंद्र
मेले में राजस्थान सहित विभिन्न प्रांतों से आए कारीगरों ने अपने अनोखे हुनर का प्रदर्शन किया। इन स्टॉलों में पारंपरिक कला, लोक शिल्प, मिट्टी के बर्तन, लाख की चूड़ियां, नक्काशीदार मूर्तियां और ऑर्गेनिक उत्पाद प्रमुख आकर्षण रहे।
जिला कलक्टर अक्षय गोदारा ने मेले में सजे विभिन्न स्टॉलों का बारीकी से अवलोकन किया और स्थानीय कारीगरों के कार्यों की सराहना की।
उन्होंने बूंदी की पारंपरिक लाख की चूड़ियां बनाने की प्रक्रिया को करीब से देखा। इस अवसर पर कारीगरों ने मौके पर ही लाख की चूड़ी बनाकर जिला कलक्टर को भेंट की, जिसे उन्होंने प्रशंसा के साथ स्वीकार किया।
स्थानीय कला और हस्तशिल्प को मिला प्रोत्साहन
मेले में बड़ानयागांव के एक किसान द्वारा पत्थर से बनाई गई सुंदर मूर्तियां विशेष आकर्षण बनीं। पत्थर पर नक्काशी कर तैयार की गई इन मूर्तियों की कलक्टर ने सराहना की और मूर्ति निर्माण की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी ली।
ठीकरदा गांव से आए एक ग्रामीण कारीगर ने चाक पर मिट्टी से मटके और बर्तन बनाने का लाइव प्रदर्शन किया। उनके काम ने पारंपरिक ग्रामीण कला की झलक को जीवंत कर दिया।
इसके अलावा मेले में स्थानीय शहद उत्पादक किसानों ने अपने ऑर्गेनिक उत्पाद प्रदर्शित किए। कलक्टर ने बूंदी में तैयार ऑर्गेनिक शहद का स्वाद भी लिया और इसे स्थानीय ब्रांडिंग के माध्यम से बाजार तक पहुँचाने पर बल दिया।
सेंड आर्ट ने खींचा सबका ध्यान
मेले का सबसे प्रमुख आकर्षण रहा पुष्कर से आए सेंड आर्टिस्ट का शानदार प्रदर्शन। कलाकार ने रेत पर बूंदी की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को उकेर कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
रेत पर बनाई गई कलाकृतियों में सुखमहल, चौरासी खंभों की छतरी, हाथीपोल, हाड़ी रानी का त्याग, और रामगढ़ सेंचुरी का टाइगर जैसी प्रतीकात्मक रचनाएँ शामिल थीं। इसके अलावा कलाकार ने महाराणा प्रताप, वंदे मातरम @150 और भारत के मानचित्र को भी रेत पर सजीव रूप में प्रस्तुत किया, जिसने दर्शकों को देशभक्ति और सांस्कृतिक गौरव से भर दिया।
200 स्टॉलों में झलकी भारत की विविधता
इस उद्योग एवं हस्तशिल्प मेले में देश के विभिन्न राज्यों से आए व्यापारियों, स्वयं सहायता समूहों और महिला उद्यमियों ने लगभग 200 स्टॉल सजाए हैं। इन स्टॉलों में पारंपरिक वस्त्र, जरी-जरदोज़ी का काम, हैंडलूम, लकड़ी और धातु शिल्प, हर्बल उत्पाद और जनजातीय कला जैसी वस्तुएं उपलब्ध हैं।
मेले का उद्देश्य न केवल स्थानीय कला को मंच देना है, बल्कि कारीगरों और ग्रामीण उत्पादकों को आर्थिक सशक्तिकरण का अवसर प्रदान करना भी है।
सांस्कृतिक धरोहर और लोक परंपरा का संगम
बूंदी महोत्सव 2025 के अंतर्गत आयोजित यह मेला केवल व्यापार का मंच नहीं, बल्कि बूंदी की लोक परंपरा, कला और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उत्सव है।
यह मेला स्थानीय कलाकारों को पहचान दिलाने के साथ-साथ आने वाले पर्यटकों को राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर से रूबरू कराता है।
जिला प्रशासन ने मेले के दौरान सुरक्षा, यातायात और स्वच्छता के लिए विशेष प्रबंध किए हैं ताकि पर्यटक और स्थानीय नागरिक आराम से खरीदारी और प्रदर्शनी का आनंद ले सकें।


