मनीषा शर्मा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत 13 नवंबर से चार दिन के जयपुर प्रवास पर रहेंगे। संघ की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, वे 13 से 16 नवंबर तक राजस्थान में रहकर संघ के शताब्दी वर्ष से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे और राज्य के प्रमुख संघ कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद करेंगे।
यह प्रवास संघ के संगठनात्मक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इस दौरान डॉ. भागवत संघ की भावी दिशा, वैचारिक प्रसार और समाज में संगठन की भूमिका पर चर्चा करेंगे।
चार दिन का जयपुर प्रवास, कई कार्यक्रमों में भागीदारी
संघ के राजस्थान क्षेत्र संघचालक डॉ. रमेश अग्रवाल ने बताया कि मोहन भागवत अपने चार दिवसीय प्रवास के दौरान जयपुर में कई बैठकें और कार्यक्रम करेंगे।
15 नवंबर को शाम साढ़े पांच बजे वे जयपुर के एसएमएस इंडोर स्टेडियम में एक विशेष कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। इस कार्यक्रम का विषय होगा — ‘वर्तमान वैश्विक परिदृश्य एवं एकात्मक मानव दर्शन’। इस संबोधन में वे वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, सामाजिक समरसता, और भारतीय विचारधारा के योगदान पर अपने विचार रखेंगे।
संघ सूत्रों के अनुसार, इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्वयंसेवक, शिक्षाविद, समाजसेवी और प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहेंगे।
ग्रंथ विमोचन समारोह में होंगे शामिल
डॉ. भागवत 16 नवंबर को सुबह 10 बजे एक विशेष समारोह में भाग लेंगे, जिसमें राजस्थान के दिवंगत प्रचारकों के जीवन और कार्यों पर आधारित ग्रंथ “…और यह जीवन समर्पित” का विमोचन किया जाएगा।
यह ग्रंथ उन प्रचारकों की स्मृति को समर्पित है जिन्होंने अपने जीवन का संपूर्ण समय समाज सेवा और संगठन विस्तार को अर्पित किया। इस अवसर पर भागवत संघ कार्यकर्ताओं और आमजन को संघ की वैचारिक यात्रा से जुड़ी प्रेरणादायक कहानियों से अवगत कराएंगे।
संघ कार्यकर्ताओं से अनौपचारिक संवाद और बैठकें
अपने प्रवास के दौरान मोहन भागवत संघ के विभिन्न समूहों के साथ बैठकें भी करेंगे। वे राजस्थान क्षेत्र के प्रमुख कार्यकर्ताओं, प्रचारकों और विभाग प्रमुखों से संघ के आगामी कार्यक्रमों और योजनाओं पर चर्चा करेंगे।
संघ के शताब्दी वर्ष की तैयारियों पर भी होगी समीक्षा
इस प्रवास का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष (2025–26) के आयोजन की तैयारियों की समीक्षा करना भी है। संघ के लिए यह वर्ष विशेष रूप से ऐतिहासिक है, और देशभर में सामाजिक समरसता, पर्यावरण, ग्राम विकास, शिक्षा और स्वदेशी अभियानों पर कई गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं।


