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चाय न मिलने पर क्यों होता है सिरदर्द: कैफीन की लत के पीछे का असली विज्ञान

चाय न मिलने पर क्यों होता है सिरदर्द: कैफीन की लत के पीछे का असली विज्ञान

शोभना शर्मा। भारत में अधिकांश लोगों की सुबह एक कप चाय से शुरू होती है। बहुतों के लिए यह दिनचर्या का इतना अहम हिस्सा बन चुकी है कि अगर एक भी दिन चाय न मिले, तो दिनभर सिरदर्द, थकान और चिड़चिड़ापन महसूस होने लगता है।
लेकिन यह सिर्फ एक आदत नहीं बल्कि शरीर में होने वाले रासायनिक बदलावों का परिणाम होता है। आइए समझते हैं कि आखिर ऐसा क्यों होता है।

कैफीन से बनती है ‘चाय की आदत’

चाय में मौजूद कैफीन एक प्राकृतिक उत्तेजक तत्व (stimulant) है, जो हमारे दिमाग की नसों को सक्रिय रखता है। जब कोई व्यक्ति रोजाना एक निश्चित समय पर चाय पीता है, तो शरीर कैफीन की एक निश्चित मात्रा का आदी हो जाता है।
इससे दिमाग को रोज उस उत्तेजना की उम्मीद रहने लगती है।

जब किसी दिन चाय नहीं मिलती, तो शरीर कैफीन की कमी महसूस करने लगता है। यही स्थिति कैफीन विदड्रॉल (Caffeine Withdrawal) कहलाती है, जिसके दौरान सिरदर्द, थकान, चिड़चिड़ापन और नींद आने जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं।

कैफीन की कमी से क्यों होता है सिरदर्द?

कैफीन का असर हमारे ब्लड वेसल्स (रक्त वाहिकाओं) पर पड़ता है। यह उन्हें हल्का-सा सिकोड़ देता है, जिससे दिमाग में रक्त का प्रवाह संतुलित रहता है।
जब रोजाना चाय पीने वाले लोग अचानक चाय पीना बंद कर देते हैं, तो ये रक्त वाहिकाएं फिर से फैल जाती हैं, जिससे दिमाग में ब्लड फ्लो बढ़ जाता है और सिरदर्द होने लगता है।

यह सिरदर्द कुछ लोगों में हल्का होता है, लेकिन कुछ लोगों को पूरे दिन परेशानी होती है। यह प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति रोज कितनी मात्रा में कैफीन लेता है।

दिमाग में एडेनोसिन का असर

हमारे दिमाग में एक प्राकृतिक रसायन एडेनोसिन (Adenosine) होता है, जो शरीर को थकान महसूस कराता है और नींद के संकेत देता है।
कैफीन इस एडेनोसिन की गतिविधि को रोक देता है, जिससे हमें जाग्रत और ऊर्जावान महसूस होता है।

लेकिन जब शरीर को कैफीन नहीं मिलता, तो एडेनोसिन का असर फिर से बढ़ जाता है और व्यक्ति को थकान, नींद और सुस्ती महसूस होने लगती है।
यही कारण है कि चाय न मिलने पर लोगों का मूड अचानक नीचे गिर जाता है और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होती है।

विशेषज्ञों की राय: धीरे-धीरे कम करें चाय की मात्रा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कैफीन की लत से बचने के लिए चाय की मात्रा धीरे-धीरे घटानी चाहिए
जो लोग दिन में कई बार चाय पीते हैं, वे इसे कम करके 2 कप तक सीमित करें और धीरे-धीरे इसे हर्बल चाय या ग्रीन टी से बदल सकते हैं।

साथ ही, चाय में शुगर की मात्रा को भी घटाना चाहिए, क्योंकि ज्यादा चीनी शरीर में ग्लूकोज स्तर बढ़ाकर थकान और निर्भरता दोनों को बढ़ाती है।

क्या चाय पूरी तरह छोड़ देनी चाहिए?

चाय पूरी तरह हानिकारक नहीं है। सीमित मात्रा में ली गई चाय शरीर के लिए फायदेमंद होती है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स (Antioxidants) शरीर से टॉक्सिन्स (गंदे पदार्थ) को बाहर निकालने में मदद करते हैं, जिससे पाचन सुधरता है और मूड अच्छा रहता है

लेकिन अगर जरूरत से ज्यादा चाय पी जाए तो यह डिहाइड्रेशन (पानी की कमी), एसिडिटी, और नींद की कमी जैसी दिक्कतें पैदा कर सकती है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि दिन में 2 कप से ज्यादा चाय नहीं पीनी चाहिए और उसे खाने के तुरंत बाद या खाली पेट लेने से बचना चाहिए।

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