मनीषा शर्मा। राजस्थान में अंता उपचुनाव को लेकर सियासी पारा चरम पर है। भाजपा और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग लगातार तेज होती जा रही है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने अब भाजपा सरकार और उसके मंत्रियों पर सीधा निशाना साधा है। उन्होंने कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा के लगातार हो रहे छापों पर तंज कसते हुए कहा कि अगर उनमें वास्तव में दम है तो मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) में छापा मारकर दिखाएं।
डोटासरा ने कहा, “आप में दम है तो सीएमओ में छापा मारकर वहां की पर्चियां पकड़ो। आपका क्या बिगड़ने वाला है? आप वैसे भी फ्री होने वाले हो।” उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि किरोड़ीलाल मीणा को सरकार में रहने की आदत नहीं है, क्योंकि उनकी पहचान संघर्ष से जुड़ी रही है।
“अधिकारियों का काम खुद कर रहे मंत्री” – डोटासरा
डोटासरा ने किरोड़ीलाल मीणा के छापों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो कार्य अधिकारियों का है, उसे मंत्री खुद कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “या तो मंत्री जी अधिकारियों को मानते नहीं हैं, या फिर सीएम ने अधिकारियों को आदेश दे रखा है कि वे मीणा की बात न मानें।”
डोटासरा के अनुसार, यह इस बात का संकेत है कि राज्य सरकार का गवर्नेंस मॉडल पूरी तरह फेल हो चुका है। उन्होंने कहा, “यदि मंत्री को मीडिया लेकर खुद छापे मारने जाने पड़ रहे हैं, तो इसका मतलब है कि मुख्यमंत्री अपने मंत्रियों पर नियंत्रण खो चुके हैं। यह सरकार की प्रशासनिक विफलता है।”
“वसुंधरा राजे की अनुमति के बिना अंता नहीं जा पाए मुख्यमंत्री”
डोटासरा ने अपने बयान में भाजपा की अंदरूनी कलह पर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा वसुंधरा राजे की अनुमति के बिना अंता नहीं जा पाए। उन्होंने कहा, “अंता में मुख्यमंत्री को जाना था, लेकिन वसुंधरा राजे ने कहा कि आपको आने की जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री को स्टेट हैंगर से वापस लौटना पड़ा।”
डोटासरा ने यह भी कहा कि झालावाड़ और कोटा में भी सीएम बिना वसुंधरा राजे की मंजूरी के नहीं जा सकते। उन्होंने व्यंग्य किया कि मुख्यमंत्री ने केवल यह दिखाने के लिए रोड शो किया कि वे और वसुंधरा राजे एकजुट हैं, जबकि हकीकत में दोनों के बीच मतभेद स्पष्ट हैं।
“हाड़ौती के लोगों ने वसुंधरा को मुख्यमंत्री मानकर वोट दिया”
डोटासरा ने कहा कि हाड़ौती क्षेत्र की जनता ने 2023 के विधानसभा चुनाव में वसुंधरा राजे को मुख्यमंत्री मानकर वोट दिया था। उन्होंने कहा, “भजनलाल शर्मा तो मुख्यमंत्री बने ही नहीं, हाड़ौती के लोग आज भी वसुंधरा राजे को ही मुख्यमंत्री मानते हैं।”
डोटासरा ने तंज कसते हुए कहा, “अब हालत यह है कि न भजनलाल जी की चल रही है, न वसुंधरा जी की। एक तरफ मुख्यमंत्री बने नहीं, दूसरी तरफ जो थीं, उनकी बात अब सुनी नहीं जा रही है।”
“बीजेपी की अंतर्कलह सबके सामने”
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने अंता में भाजपा की टिकट चयन प्रक्रिया पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि भाजपा को टिकट तय करने में दस दिन लग गए, यह इस बात का संकेत है कि पार्टी में अंदरूनी फूट गहरी है। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री 10 दिन तक टिकट तय नहीं कर पाए, इससे बड़ा उदाहरण बीजेपी की अंतर्कलह का क्या हो सकता है?”
डोटासरा ने भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ पर भी निशाना साधते हुए कहा, “वे अंता जाकर कहते हैं कि अगर इस उम्मीदवार को जिताओगे तो मंत्री बना देंगे। यह वही झूठा प्रलोभन है जो हारने वाली पार्टी देती है। जब जीत नहीं रही, तो मंत्री कहां से बनेगा?”
“श्रीकरणपुर की तरह अंता में भी हार तय” – डोटासरा
डोटासरा ने भाजपा की पिछली नीतियों पर व्यंग्य करते हुए कहा, “आपने श्रीकरणपुर में अग्निवीर मंत्री बनाया था, उसका क्या हुआ? उसे अग्निवीर बनाकर छोड़ दिया और उसका करियर तबाह कर दिया।” उन्होंने कहा कि भाजपा नेतृत्व को अब यह समझ आ गया है कि दो साल के शासन में उन्होंने कोई ऐसा काम नहीं किया जिससे जनता का भरोसा जीता जा सके।
उन्होंने कहा, “बीजेपी अब हार स्वीकार कर चुकी है, इसलिए झूठे वादों और प्रलोभनों का सहारा ले रही है।”
“बीजेपी सरकार में नहीं होती जनसुनवाई”
डोटासरा ने भाजपा सरकार की कार्यशैली पर तीखा हमला करते हुए कहा कि राज्य सचिवालय में किसी भी मंत्री के पास जनसुनवाई की व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा, “किसी मंत्री का गेट खुला नहीं मिलेगा, और न ही कोई जनता की सुनवाई करता है। रोज 100 पास भी नहीं बनते, जनता दरबार सिर्फ नाम का रह गया है।”
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार में जनता के लिए ‘जनसुनवाई संस्कृति’ थी, जबकि भाजपा सरकार ने इसे पूरी तरह समाप्त कर दिया है।


