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कैल्शियम की कमी से बचने के लिए सेवन का सही तरीका

कैल्शियम की कमी से बचने के लिए सेवन का सही तरीका

शोभना शर्मा। कैल्शियम हमारे शरीर में पाया जाने वाला सबसे जरूरी और सबसे अधिक मात्रा में मौजूद खनिज है। यह हमारे हड्डियों और दांतों की मजबूती के लिए अनिवार्य है। कैल्शियम न सिर्फ हमारी हड्डियों को सख्त बनाता है बल्कि उन्हें लचीला और मजबूत बनाए रखता है ताकि शरीर आसानी से हिल-डुल सके।

इसके अलावा, शरीर के खून और ऊतकों में मौजूद थोड़ी-सी कैल्शियम की मात्रा भी बहुत जरूरी काम करती है — जैसे खून का थक्का जमाना, नसों के जरिए संदेश पहुंचाना, मांसपेशियों का सही से काम करना और हार्मोन रिलीज करने में मदद करना।

कैल्शियम शरीर में कैसे जाता है

नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) के अनुसार, जब हम कैल्शियम युक्त भोजन करते हैं, तो यह हमारी आंतों के माध्यम से शरीर में अवशोषित होता है।
यह प्रक्रिया दो तरह से होती है:

  1. सक्रिय अवशोषण: जब शरीर में कैल्शियम की कमी होती है, तब यह मेहनत से कैल्शियम को सोखता है।

  2. निष्क्रिय अवशोषण: जब शरीर में पर्याप्त कैल्शियम मौजूद होता है, तब यह धीरे-धीरे स्वाभाविक रूप से अवशोषित होता है।

किन चीजों में पाया जाता है कैल्शियम

कैल्शियम के सबसे अच्छे स्रोत दूध और दूध से बनी चीजें हैं जैसे:

  • दूध

  • दही

  • पनीर

इनसे शरीर लगभग 30% कैल्शियम आसानी से अवशोषित कर लेता है।

इसके अलावा, कुछ गैर-डेयरी खाद्य पदार्थों में भी कैल्शियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है:

  • हरी सब्ज़ियां जैसे केल, ब्रोकली, चीनी पत्तागोभी

  • डिब्बाबंद सार्डिन और सैल्मन मछली (हड्डियों सहित)

  • टोफू, अनाज, कैल्शियम युक्त जूस और दूध के विकल्प

हालांकि, कुछ पौधों और सब्ज़ियों में ऐसे तत्व होते हैं जो कैल्शियम को बांध लेते हैं और शरीर में इसके अवशोषण को रोकते हैं, जिससे उसकी उपलब्धता कम हो जाती है।

शरीर को रोज कितनी कैल्शियम की जरूरत होती है

आयु वर्गपुरुष (mg)महिला (mg)गर्भवती (mg)स्तनपान कराने वाली (mg)
0–6 महीने200200
7–12 महीने260260
1–3 वर्ष700700
4–8 वर्ष1,0001,000
9–13 वर्ष1,3001,300
14–18 वर्ष1,3001,3001,3001,300
19–50 वर्ष1,0001,0001,0001,000
51–70 वर्ष1,0001,200
70 वर्ष से अधिक1,2001,200

कैल्शियम की कमी के लक्षण और खतरे

जब शरीर में कैल्शियम की कमी हो जाती है, तो कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

  1. हड्डियां कमजोर होना (Osteoporosis):
    कैल्शियम की कमी से हड्डियां पतली और नाज़ुक हो जाती हैं। यह स्थिति उम्र के साथ और बढ़ जाती है, जिससे गिरने पर हड्डियां आसानी से टूट सकती हैं।

  2. रिकेट्स (Rickets):
    यह समस्या बच्चों में देखी जाती है, जिसमें हड्डियां ठीक से विकसित नहीं हो पातीं। इससे शरीर का ढांचा टेढ़ा-मेढ़ा हो सकता है।

  3. ऑस्टियोमलेशिया (Osteomalacia):
    यह वयस्कों में पाया जाने वाला रोग है, जिसमें हड्डियां मुलायम और कमजोर हो जाती हैं।

इन सभी बीमारियों में विटामिन D और कैल्शियम दोनों की भूमिका अहम होती है। अगर शरीर में विटामिन D की कमी होती है, तो कैल्शियम सही तरीके से अवशोषित नहीं हो पाता।

कैल्शियम लेने का सही समय

कैल्शियम के अवशोषण के लिए सही समय और तरीका जानना जरूरी है:

  • कैल्शियम हमेशा खाने के बाद लेना चाहिए, जैसे नाश्ते या दोपहर के भोजन के बाद।

  • खाली पेट कैल्शियम नहीं लेना चाहिए, क्योंकि इस स्थिति में शरीर इसे सही से सोख नहीं पाता।

  • शरीर एक बार में केवल 500–600 mg कैल्शियम ही अवशोषित कर पाता है। इसलिए, अगर डॉक्टर ने ज्यादा मात्रा लेने की सलाह दी है, तो इसे दो हिस्सों में बांटकर लें।

  • रात में कैल्शियम सप्लीमेंट लेने से बचें, क्योंकि उस समय इसका असर कम हो जाता है।

कैल्शियम और विटामिन D का संबंध

कैल्शियम तभी प्रभावी होता है जब शरीर में पर्याप्त मात्रा में विटामिन D मौजूद हो।
विटामिन D सूरज की रोशनी से और कुछ खाद्य पदार्थों जैसे अंडे की जर्दी, फोर्टिफाइड दूध, और मछली से प्राप्त किया जा सकता है।

विटामिन D कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है और हड्डियों को मजबूत बनाए रखता है।

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