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जयपुर में फिर एक निगम, सरकार को भेजा कैडर रिव्यू प्रस्ताव

जयपुर में फिर एक निगम, सरकार को भेजा कैडर रिव्यू प्रस्ताव

शोभना शर्मा। राजधानी जयपुर में तीन दिन बाद नगर निकायों की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। जयपुर नगर निगम ग्रेटर और जयपुर नगर निगम हैरिटेज का कार्यकाल 9 नवंबर 2025 को पूरा हो जाएगा। इसके साथ ही 10 नवंबर से एकीकृत जयपुर नगर निगम (Unified Jaipur Nagar Nigam) अस्तित्व में आ जाएगा।
इस फैसले के बाद शहर में फिर से एक निगम मॉडल लागू होगा। दोनों निगमों की ओर से इस एकीकरण के लिए राज्य सरकार को कैडर रिव्यू रिपोर्ट भेजी गई है, जिसमें प्रशासनिक ढांचे और पदों के पुनर्गठन से जुड़े बड़े सुझाव शामिल हैं।

निगम आयुक्त के साथ होंगे तीन अतिरिक्त आयुक्त

भेजे गए प्रस्ताव में सुझाव दिया गया है कि एकीकृत निगम में निगम आयुक्त के अलावा तीन अतिरिक्त आयुक्त नियुक्त किए जाएं। इनमें एक अधिकारी आईएएस और दो आरएएस कैडर से होंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य बड़े निगम क्षेत्र में प्रशासनिक निगरानी और कार्य विभाजन को प्रभावी बनाना है।
इसके साथ ही मुख्य अग्निशमन अधिकारी के ऊपर एक नया पद — वरिष्ठ मुख्य अग्निशमन अधिकारी — सृजित करने का भी प्रस्ताव है। यह बदलाव फायर विभाग की कार्यक्षमता और कमान संरचना को मजबूत करने के उद्देश्य से सुझाया गया है।

हालांकि, अभी राजस्थान सरकार ने इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय नहीं लिया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, प्रस्ताव में मामूली संशोधन संभव है। फिलहाल, 10 नवंबर से संभागीय आयुक्त प्रशासक के रूप में कार्यभार संभालेंगे।

कैडर रिव्यू प्रस्ताव में पांच बड़े बदलाव

एकीकृत जयपुर नगर निगम के लिए भेजे गए कैडर रिव्यू में पांच प्रमुख बदलाव शामिल हैं —

  1. कुल पदों की संख्या में संशोधन:
    पुराने दोनों निगमों में स्वीकृत 14,441 पदों में से 56 पद समाप्त किए गए हैं, जबकि 118 नए पद जोड़े गए हैं। इस तरह अब कुल 14,503 पदों का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है।

  2. छोटे स्तर के पदों में कटौती:
    निगमों में पहले से मौजूद कई छोटे पद जैसे बेलदार, भिश्ती, ड्राइवर, माली, गजधर और लिपिक वर्ग में कटौती की गई है। इन पदों को कार्यप्रणाली में बदलाव और तकनीकी उन्नयन के चलते अनावश्यक माना गया है।

  3. लंबे समय से रिक्त पद समाप्त:
    ऐसे पद जहां वर्षों से कोई कर्मचारी कार्यरत नहीं था, उन्हें अनुपयोगी समझते हुए समाप्त करने का प्रस्ताव किया गया है। इससे विभागीय ढांचे में निष्क्रिय पदों की संख्या घटेगी।

  4. प्रशासनिक और तकनीकी पद बढ़ाने का सुझाव:
    निगम की सीमा विस्तार और कार्यभार में वृद्धि को देखते हुए यूडीसी और एलडीसी के 82 नए पद मांगे गए हैं। यह निर्णय दफ्तरों में बढ़ती फाइलों और जनसेवाओं के दबाव को देखते हुए लिया गया है।

  5. नई श्रेणी के पद सृजित करने का प्रस्ताव:
    प्रस्ताव में सूचना सहायक के 13, हेड कॉन्स्टेबल के 12, लीडिंग फायरमैन के 21, स्वास्थ्य निरीक्षक प्रथम के 18 और स्वास्थ्य निरीक्षक द्वितीय के 7 पद जोड़े गए हैं। यह व्यवस्था नागरिक सुरक्षा और स्वास्थ्य विभाग को सशक्त करने के लिए की गई है।

जोन व्यवस्था में बदलाव की संभावना कम

वर्तमान में जयपुर के दोनों निगमों में कुल 15 जोन हैं — ग्रेटर में 8 और हैरिटेज में 7। सूत्रों के अनुसार, इन जोनों की संरचना फिलहाल यथावत रखी जा सकती है क्योंकि एकीकृत निगम का क्षेत्र इस बार पहले से बड़ा होगा।

हालांकि, शहरी निकायों से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि नए निगम गठन के बाद जोनों का पुनर्गठन किया जाना चाहिए ताकि संसाधनों का समुचित उपयोग और नागरिक सेवाओं की बेहतर निगरानी सुनिश्चित की जा सके।

नया निगम ढांचा और प्रशासनिक दिशा

एक निगम मॉडल लागू होने से जयपुर का प्रशासनिक ढांचा पूरी तरह बदल जाएगा। दो अलग-अलग निगमों की जगह अब एक बड़ा एकीकृत निकाय बनेगा जो पूरे जयपुर शहर के शहरी प्रबंधन, सफाई, अग्निशमन और स्वास्थ्य सेवाओं को एक समान ढंग से संचालित करेगा।

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