शोभना शर्मा। देश की एकता और स्वतंत्रता की भावना का प्रतीक ‘वंदे मातरम्’ आज अपने 150वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। इस अवसर पर राजस्थान की राजधानी जयपुर में भव्य राज्य स्तरीय समारोह का आयोजन किया जा रहा है। 7 नवंबर 2025 को सवाई मानसिंह (SMS) स्टेडियम में करीब 50 हजार लोग एक साथ ‘वंदे मातरम्’ गाकर इतिहास रचेंगे। यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि राष्ट्रभक्ति, एकता और स्वदेशी की भावना को समर्पित वर्षभर चलने वाले राष्ट्रीय अभियान ‘वंदे मातरम् @150’ का औपचारिक शुभारंभ है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा करेंगे कार्यक्रम की अगुवाई
राज्य सरकार इस आयोजन को एक ऐतिहासिक अवसर के रूप में मना रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा स्वयं इस समारोह में शामिल होंगे। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि “वंदे मातरम् मातृभूमि के प्रति समर्पण और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक है।”
मुख्यमंत्री के नेतृत्व में पूरा प्रदेश इस आयोजन को देशभक्ति के महाअभियान के रूप में मना रहा है। उनके निर्देशानुसार, जयपुर से लेकर प्रत्येक जिले तक इस गीत की गूंज पहुंचाने के लिए विशेष आयोजन किए जा रहे हैं।
SMS स्टेडियम में देशभक्ति का भव्य नज़ारा
सवाई मानसिंह स्टेडियम में आयोजित होने वाले इस राज्य स्तरीय समारोह में 50 हजार से अधिक प्रतिभागी एक साथ ‘वंदे मातरम्’ गाएंगे। इस दौरान 50 हजार तिरंगे झंडों का वितरण किया जाएगा। समारोह में स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों के छात्र-छात्राएं, NSS, NCC, पुलिस एवं RAC के जवान, हिंदुस्तान स्काउट-गाइड, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और आम नागरिक शामिल होंगे।
स्टेडियम में स्कूल, पुलिस और आर्मी बैंड अपनी शानदार प्रस्तुतियों से देशभक्ति का माहौल बनाएंगे। साथ ही ‘भारत माता’, स्वतंत्रता सेनानियों और महापुरुषों के जीवन पर आधारित विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी, जो आगंतुकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
‘वंदे मातरम्’ का 150 वर्ष का गौरवशाली सफर
‘वंदे मातरम्’ की रचना 7 नवंबर 1875 को बंकिमचंद्र चटर्जी ने अक्षय नवमी के दिन की थी। यह गीत पहली बार उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ के हिस्से के रूप में साहित्यिक पत्रिका ‘बंगदर्शन’ में प्रकाशित हुआ था।
इस गीत ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देश के वीर सेनानियों और क्रांतिकारियों को अदम्य साहस और प्रेरणा दी। ‘वंदे मातरम्’ सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का स्वर बन गया। इसने मातृभूमि की शक्ति, समृद्धि और गौरव का भाव जन-जन तक पहुँचाया। 150 वर्ष बाद भी यह गीत राष्ट्रीय एकता और स्वाभिमान का सशक्त प्रतीक बना हुआ है।
राज्य के नौ जिलों में भी होंगे जिला स्तरीय कार्यक्रम
मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार ‘वंदे मातरम् @150’ उत्सव केवल जयपुर तक सीमित नहीं रहेगा। आज प्रदेश के नौ प्रमुख जिलों — अजमेर, बीकानेर, उदयपुर, भरतपुर, कोटा, जोधपुर, सीकर, भीलवाड़ा और अलवर में भी जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रत्येक जिले में प्रभारी मंत्री और स्थानीय जनप्रतिनिधि की उपस्थिति में सामूहिक गायन और तिरंगा रैली निकाली जाएगी।
8 और 9 नवंबर को जन-जागरूकता अभियान
इस ऐतिहासिक उत्सव को राज्यव्यापी अभियान का रूप देने के लिए 8 और 9 नवंबर को शेष 31 जिलों में प्रभात फेरी, रन अथवा बाइक रैली, सांस्कृतिक कार्यक्रम और जन-जागरूकता रैलियां आयोजित की जाएंगी।
शहीद स्मारकों पर श्रद्धांजलि समारोह, निबंध लेखन, चित्रकला और रंगोली प्रतियोगिताएं होंगी। NSS और युवा संगठनों द्वारा स्वच्छता अभियान और रक्तदान शिविर आयोजित किए जाएंगे। स्वतंत्रता सेनानियों और उनके परिजनों को सम्मानित किया जाएगा।
साथ ही थीमैटिक प्रदर्शनी, फोटो गैलरी, डिजिटल पैनल और कला प्रदर्शनियों के माध्यम से ‘वंदे मातरम्’ की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और भारत के स्वतंत्रता संग्राम में इसकी भूमिका को प्रस्तुत किया जाएगा।
ग्राम पंचायत स्तर तक पहुंचेगा ‘वंदे मातरम्’ का संदेश
‘वंदे मातरम् @150’ को जन आंदोलन का स्वरूप देने के लिए इसे ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है।
“एक स्थान, एक समय, एक गीत – वंदे मातरम्” की थीम पर पूरे राजस्थान में एक साथ सामूहिक गायन कार्यक्रम आयोजित होंगे। इन आयोजनों में पंचायत प्रतिनिधि, विद्यार्थी, सामाजिक संस्थाएं और आम नागरिक सक्रिय भागीदारी निभाएंगे।


