शोभना शर्मा। राजस्थान सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए बड़ा कदम उठाया है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने घोषणा की है कि आगामी शैक्षणिक सत्र से राज्य के कम नामांकन वाले सरकारी स्कूलों को पास के स्कूलों में मर्ज किया जाएगा। बुधवार को जयपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में मंत्री ने बताया कि पहले चरण में कुल 312 स्कूलों का विलय किया जाएगा।
इन स्कूलों में 25 से कम नामांकन वाले 155 सीनियर सेकंडरी स्कूल और शून्य नामांकन वाले 157 प्राथमिक विद्यालय शामिल हैं। शिक्षा मंत्री ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना और संसाधनों का समुचित उपयोग सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अब तक 449 स्कूलों का मर्ज पहले ही किया जा चुका है, जिससे शिक्षकों और छात्रों दोनों को लाभ हुआ है।
भर्ती और प्रमोशन पर दिलावर का बड़ा बयान
शिक्षा मंत्री ने राज्य में शिक्षा विभाग से जुड़े लंबे समय से लंबित प्रमोशन और भर्ती मामलों पर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले 22 महीनों में 50,000 कर्मचारियों के प्रमोशन किए हैं, जिससे विभागीय प्रक्रियाएं तेज हुई हैं।
दिलावर ने आश्वासन दिया कि आगामी समय में 21,000 पदों पर नई भर्ती और प्रमोशन किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होते ही इन नियुक्तियों को अमल में लाया जाएगा। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
अब प्रदेश में लागू होगा स्टाफिंग पैटर्न
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि राज्य में अब स्टाफिंग पैटर्न (Staffing Pattern) लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कई जगहों पर स्थिति ऐसी है कि छात्रों की संख्या कम और अध्यापकों की अधिक है, जबकि कुछ स्कूलों में इसका उलटा हाल है।
उन्होंने कहा कि नई नीति के तहत शिक्षकों की तैनाती स्कूलों की आवश्यकता और छात्र संख्या के आधार पर की जाएगी। इससे शिक्षण कार्य में समानता और गुणवत्ता दोनों को बल मिलेगा।
एक निजी स्कूल में छात्रा की मृत्यु के मामले में उन्होंने कहा कि जांच टीम गठित की जा चुकी है और दो दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंप दी जाएगी। सरकार इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।
विलायती बबूल होंगे समूल नष्ट
प्रेस वार्ता के दौरान शिक्षा मंत्री ने पर्यावरण और स्वास्थ्य से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान लगाए गए विलायती बबूल (Prosopis Juliflora) के पेड़ों को समूल नष्ट किया जाएगा।
मंत्री ने बताया कि प्रदेश में बड़ी संख्या में यह बबूल फैला हुआ है, जो न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि जल स्तर में गिरावट और मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट का भी कारण बन रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि पर्यावरण के लिए नुकसानदायक इस प्रजाति को धीरे-धीरे समाप्त किया जाए।


