शोभना शर्मा, अजमेर। राजस्थान की मिट्टी, संस्कृति और लोक परंपराओं का जीवंत प्रतीक विश्व प्रसिद्ध पुष्कर पशु मेला 2025 बुधवार को भव्य समापन के साथ संपन्न हो गया। अजमेर जिले के पुष्कर में आयोजित इस मेले का क्लोजिंग सेरेमनी (समापन समारोह) न केवल रंगों और ध्वनियों का उत्सव था, बल्कि इसने भारत की परंपरा, खेल भावना और अंतरराष्ट्रीय मित्रता का शानदार उदाहरण भी पेश किया। इस वर्ष के समापन समारोह का मुख्य आकर्षण रहा देसी और विदेशी महिलाओं के बीच रस्साकशी का रोमांचक मुकाबला, जिसने स्थानीय और विदेशी दर्शकों दोनों का मन मोह लिया।
देसी महिलाओं ने दिखाई मिट्टी की ताकत
पुष्कर मेले के अंतिम दिन आयोजित रस्साकशी प्रतियोगिता में देसी महिलाओं की टीम ने शुरुआत से ही अपना दबदबा कायम किया। राजस्थान के ग्रामीण अंचलों से आई इन महिलाओं ने जब रस्सी थामी, तो मैदान में मानो शक्ति और जोश की लहर दौड़ गई। पहली पारी में, राजस्थानी ग्रामीण महिलाओं की टीम ने अपने परंपरागत आत्मविश्वास और असाधारण तालमेल का परिचय दिया। महज दो मिनट के संघर्ष में ही उन्होंने विदेशी महिलाओं की टीम को अपनी ओर खींच लिया। उनकी इस जीत के साथ ही पूरा मैदान तालियों और जयकारों से गूंज उठा। ग्रामीण दर्शक, बच्चे और महिलाएं झूम उठीं। कई स्थानीय पुरुषों ने ढोल-नगाड़ों पर नाचकर विजेता देसी टीम का उत्साहवर्धन किया। इस जीत के साथ देसी महिलाओं ने यह साबित किया कि राजस्थान की मिट्टी की महिलाएं केवल घर-आंगन की ताकत नहीं, बल्कि खेल के मैदान में भी अपनी शक्ति का परिचय दे सकती हैं।
विदेशी महिलाओं की शानदार वापसी
पहली पारी हारने के बावजूद विदेशी टीम का जोश कम नहीं हुआ। अमेरिका, रूस, इंग्लैंड, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया से आई महिलाओं ने हार को चुनौती मानते हुए दूसरी पारी में जोरदार वापसी की। दूसरी पारी में करीब तीन मिनट तक दोनों टीमों के बीच जबरदस्त संघर्ष हुआ। विदेशी महिलाओं की टीम ने अपने संतुलन और टीम भावना का बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए आखिरकार देसी टीम को पीछे खींच लिया। विदेशी टीम की जीत के बाद मैदान में जोश और उत्साह का माहौल छा गया। पशुपालन विभाग के अधिकारी, विदेशी समर्थक और दर्शक सभी ने खड़े होकर तालियां बजाईं और विदेशी टीम का स्वागत किया। प्रतियोगिता के बाद विदेशी प्रतिभागियों ने कहा कि पुष्कर मेला का अनुभव उनके लिए अविस्मरणीय रहा। उनके अनुसार, “यह केवल खेल नहीं था, बल्कि भारतीय संस्कृति से जुड़ने का एक सुंदर अवसर था।”
खेल भावना का अनोखा संदेश
दोनों पारियों के रोमांचक मुकाबले के बाद परिणाम बराबरी पर रहा। ऐसे में आयोजकों ने खेल की भावना और अंतरराष्ट्रीय मित्रता के संदेश को आगे बढ़ाते हुए दोनों टीमों को संयुक्त विजेता (Joint Winner) घोषित किया। पुरस्कार वितरण के दौरान देसी और विदेशी महिलाओं ने एक-दूसरे को गले लगाकर जीत और हार से ऊपर उठने का उदाहरण प्रस्तुत किया। दोनों टीमों ने मिलकर दर्शकों को यह संदेश दिया कि खेल में असली जीत प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि सहभागिता की होती है। पशुपालन विभाग के अधिकारियों और मेले के आयोजकों ने दोनों टीमों को प्रतीक चिह्न, प्रमाणपत्र और पारंपरिक शॉल भेंट कर सम्मानित किया।
ढोल-नगाड़ों और नृत्य से गूंज उठा पुष्कर
समापन समारोह का दूसरा आकर्षण रहा सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का संगम। राजस्थान के लोक कलाकारों ने ढोल, नगाड़े, मुरली और अल्हा की धुनों पर प्रस्तुतियां दीं। विदेशी नागरिकों ने भी भारतीय पारंपरिक वेशभूषा पहनकर मंच पर आकर लोक नृत्य में भाग लिया। राजस्थानी गेर, घूमर और कालबेलिया नृत्य की प्रस्तुति पर पूरा मैदान तालियों से गूंज उठा। क्लोजिंग सेरेमनी में स्थानीय स्कूलों और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने भी लोकगीतों के माध्यम से “नारी शक्ति” और “लोक संस्कृति के संरक्षण” का संदेश दिया। ढोल-नगाड़ों की थाप पर विदेशी पर्यटकों और ग्रामीण महिलाओं ने एक साथ नृत्य किया, जिससे पूरा माहौल उत्सवमय हो गया।
पुष्कर मेला: संस्कृति, व्यापार और पर्यटन का संगम
पुष्कर पशु मेला न केवल ऊंट, घोड़े, गाय और अन्य पशुओं के व्यापार का मंच है, बल्कि यह राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर और अंतरराष्ट्रीय पहचान का प्रतीक बन चुका है। हर साल हजारों विदेशी सैलानी यहां भारतीय लोक संस्कृति, पारंपरिक जीवनशैली और आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव करने आते हैं। पुष्कर झील और ब्रह्मा मंदिर की धार्मिक आस्था के साथ यह मेला एक अद्वितीय अनुभव प्रदान करता है। मेले में इस वर्ष भी हजारों पशुपालकों और व्यापारियों ने भाग लिया। सरकार की ओर से लगाए गए प्रदर्शनी स्टॉल्स में हस्तशिल्प, ऊंट सवारी, लोककला, ग्रामीण उत्पाद और राजस्थान के खानपान का स्वाद सैलानियों के आकर्षण का केंद्र रहा।
आयोजन की सराहना और भविष्य की उम्मीदें
पुष्कर मेला 2025 के सफल आयोजन की सराहना करते हुए अजमेर जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग ने इसे राज्य की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बताया। आयोजकों ने कहा कि यह मेला न केवल राजस्थान के ग्रामीण जीवन को उजागर करता है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर भारत की संस्कृति, मैत्री और सहिष्णुता का संदेश भी देता है। विदेशी मेहमानों ने राजस्थान सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “पुष्कर मेला भारत की आत्मा को दर्शाता है — जहां संस्कृति और खेल दोनों साथ चलते हैं।” आयोजकों ने अगले वर्ष यानी पुष्कर मेला 2026 को और अधिक भव्य एवं पर्यावरण अनुकूल बनाने की घोषणा भी की।


