मनीषा शर्मा। राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) में चल रहा सियासी और प्रशासनिक टकराव अब खुले विवाद में बदल चुका है। सरकार द्वारा गठित एडहॉक कमेटी के भीतर ही ऐसा मतभेद पैदा हो गया है कि एक ही राज्य की दो अलग-अलग टीमें रणजी ट्रॉफी और अंडर-23 टूर्नामेंट के लिए घोषित कर दी गई हैं। यह पहली बार नहीं है जब राजस्थान क्रिकेट आंतरिक संघर्ष का शिकार बना है, लेकिन इस बार मामला खिलाड़ियों तक पहुँच चुका है। अब सवाल यह उठता है कि आगामी रणजी ट्रॉफी मुकाबले में आखिर कौन सी टीम मैदान में उतरेगी — एडहॉक कमेटी कन्वीनर डीडी कुमावत की घोषित टीम या चार अन्य सदस्यों द्वारा घोषित टीम।
दो टीमें, एक टूर्नामेंट — RCA में अभूतपूर्व स्थिति
राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन की एडहॉक कमेटी में पाँच सदस्य शामिल हैं। इस कमेटी के कन्वीनर डीडी कुमावत ने अपनी ओर से रणजी और अंडर-23 टीमों की घोषणा कर दी, जबकि चार अन्य सदस्य — धनंजय सिंह खींवसर, पिंकेश जैन, मोहित यादव और आशीष तिवारी — ने अलग से दूसरी टीम घोषित कर दी। इस स्थिति ने न सिर्फ खिलाड़ियों और चयनकर्ताओं को उलझन में डाल दिया है, बल्कि RCA की विश्वसनीयता और प्रशासनिक स्थिरता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कन्वीनर डीडी कुमावत का पक्ष — “मेरे द्वारा घोषित टीम ही वैध”
RCA एडहॉक कमेटी के कन्वीनर डीडी कुमावत ने दावा किया कि उनके द्वारा घोषित टीम ही वैध और अधिकृत है। उन्होंने कहा, “मैं एडहॉक कमेटी का अधिकृत कन्वीनर हूं। टीम चयन की प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुसार हुई है। चयनकर्ताओं की नियुक्ति RCA की पिछली AGM में की गई थी। अगर किसी सदस्य को आपत्ति थी, तो उन्हें उसी समय बताना चाहिए था।” कुमावत ने कहा कि वे राज्य सरकार की अधिसूचना और RCA के संविधान के अनुसार काम कर रहे हैं, इसलिए उनका निर्णय अंतिम माना जाना चाहिए।
दूसरी ओर, चार सदस्यों का मत — “बहुमत का निर्णय ही मान्य”
दूसरी ओर एडहॉक कमेटी के चार सदस्य — पिंकेश जैन, धनंजय सिंह खींवसर, मोहित यादव और आशीष तिवारी — ने कुमावत के फैसले को अस्वीकार करते हुए कहा कि टीम चयन बहुमत से होना चाहिए। पिंकेश जैन ने कहा, “हमारे बीच कोई व्यक्तिगत विवाद नहीं है, लेकिन कन्वीनर का एकतरफा निर्णय स्वीकार्य नहीं। हमने बहुमत से जो टीम चुनी है, वही वैध है। कमेटी लोकतांत्रिक तरीके से चलती है और बहुमत का फैसला ही मान्य होना चाहिए।” उन्होंने आगे कहा कि अगर कन्वीनर को कोई आपत्ति है, तो वे बैठकर समाधान निकालने के लिए तैयार हैं।
किसे मिली जगह और किसे हटाया गया – टीम चयन में हुआ बदलाव
इस विवाद का सबसे सीधा असर खिलाड़ियों पर पड़ा है। दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी टीमों में कुछ खिलाड़ियों को हटाया और कुछ नए नाम जोड़े।
अंडर-23 टीम में बदलाव:
हटाए गए: सर्वज्ञ पानेरी, शोभित मिश्रा, राज शर्मा, भगवान सिंह
शामिल किए गए: नीलेश टांक, राहुल गर्ग, अमोल चेलानी, प्रशांत माली
रणजी टीम में बदलाव:
हटाए गए: दीपक चौधरी, अभिजीत तोमर
शामिल किए गए: रामनिवास गोलाडा, साहिल दीवान
इन परिवर्तनों के कारण अब खिलाड़ियों में स्पष्ट भ्रम की स्थिति है कि कौन सी टीम आधिकारिक मानी जाएगी और बीसीसीआई किस टीम को मंजूरी देगा।
RCA का विवादों से पुराना रिश्ता
राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन में आंतरिक संघर्ष और दोहरी राजनीति कोई नई बात नहीं है। 90 के दशक में भी RCA में दो अलग-अलग टीमों का विवाद सामने आया था। इसके बाद 2007 और 2008 में भी ऐसी स्थिति बनी थी जब रणजी मैचों के लिए दो-दो टीमें मैदान पर पहुंच गई थीं। उस समय बीसीसीआई को हस्तक्षेप करना पड़ा था और उसने RCA के कामकाज पर अस्थायी रोक लगाई थी।
बीसीसीआई तक पहुंचा मामला, हस्तक्षेप की संभावना
सूत्रों के अनुसार, राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन का यह विवाद अब बीसीसीआई के संज्ञान में आ चुका है। अगर RCA जल्द कोई समाधान नहीं निकालता है, तो बीसीसीआई अपनी एक अलग कमेटी गठित कर सकता है जो राजस्थान में क्रिकेट संचालन की जिम्मेदारी संभालेगी। पूर्व में भी जब ललित मोदी ने RCA में सक्रिय भूमिका निभाने की कोशिश की थी, तब बीसीसीआई ने RCA को निलंबित कर दिया था। उस समय बीसीसीआई ने ‘टीम राजस्थान’ नाम से एक अलग इकाई बनाकर राज्य के क्रिकेट संचालन की जिम्मेदारी ली थी, जो कई वर्षों तक सक्रिय रही। अब एक बार फिर वही स्थिति बनने की आशंका जताई जा रही है।
खिलाड़ियों में अनिश्चितता और मानसिक दबाव
RCA में यह सत्ता संघर्ष खिलाड़ियों के लिए सबसे बड़ी परेशानी बन गया है। दो अलग-अलग टीमों के ऐलान के बाद खिलाड़ी असमंजस की स्थिति में हैं कि वे किस टीम के साथ अभ्यास करें और किसकी ओर से खेलें। एक तरफ रणजी ट्रॉफी जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट का दबाव है, तो दूसरी ओर चयन को लेकर अनिश्चितता। कई युवा क्रिकेटरों का कहना है कि RCA की आंतरिक राजनीति का नुकसान प्रतिभावान खिलाड़ियों के करियर को झेलना पड़ रहा है।
राजस्थान क्रिकेट की साख पर संकट
इस विवाद ने राजस्थान क्रिकेट की साख और विश्वसनीयता को गहरा झटका दिया है। एक समय राजस्थान ने रणजी ट्रॉफी में लगातार दो खिताब जीतकर अपनी मजबूत पहचान बनाई थी, लेकिन अब प्रशासनिक टकराव और गुटबाजी ने उस उपलब्धि पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति जल्दी नहीं सुलझाई गई, तो राजस्थान के खिलाड़ियों का चयन राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावित हो सकता है, क्योंकि बीसीसीआई किसी भी विवादित इकाई के खिलाड़ियों को प्राथमिकता नहीं देती।
सरकार और RCA के बीच संबंध भी बने विवाद का कारण
राज्य सरकार की ओर से गठित एडहॉक कमेटी का गठन राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के नियमित चुनावों में देरी के कारण हुआ था। इस कमेटी का उद्देश्य अस्थायी रूप से क्रिकेट संचालन संभालना था, लेकिन अब यह कमेटी खुद सत्ता संघर्ष का केंद्र बन गई है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, RCA की इस स्थिति में राजनीतिक प्रभाव और हस्तक्षेप भी अहम भूमिका निभा रहा है, जिससे क्रिकेट प्रशासन और खिलाड़ियों के बीच विश्वास की खाई और बढ़ गई है।
बीसीसीआई की अगली चाल पर निगाहें
अब सभी की निगाहें बीसीसीआई की अगली चाल पर टिकी हैं। अगर RCA अपने विवाद को आंतरिक रूप से हल नहीं कर पाता, तो बीसीसीआई राजस्थान क्रिकेट के लिए नई संचालन समिति बना सकता है, जैसा कि पहले भी किया गया था। ऐसे में आने वाले कुछ दिनों में यह तय होगा कि राजस्थान क्रिकेट की कमान किसके हाथ में रहेगी — कन्वीनर कुमावत गुट या चार सदस्यों का बहुमत गुट।


