मनीषा शर्मा। राजस्थान सरकार ने राज्य में देशभक्ति की भावना को और प्रबल करने के उद्देश्य से एक बड़ा फैसला लिया है। अब प्रदेश के सभी सरकारी दफ्तरों, स्कूलों, कॉलेजों और मदरसों में रोजाना ‘वंदे मातरम’ गाया जाएगा। यह आदेश शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर जारी किया। राज्य सरकार इस ऐतिहासिक अवसर को ‘देशभक्ति वर्ष’ के रूप में मना रही है, जिसके तहत यह नियम लागू किया गया है। साथ ही, शिक्षा विभाग ने घोषणा की है कि अगले साल 312 स्कूलों को मर्ज किया जाएगा, जिनमें छात्रों की संख्या बेहद कम है।
‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे – देशभक्ति वर्ष के रूप में मनाया जाएगा
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने जानकारी दी कि 7 नवंबर 2025 को ‘वंदे मातरम’ गीत के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इसे ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने यह वर्ष देशभक्ति वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। मदन दिलावर ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है। यह गीत प्रत्येक नागरिक के हृदय में देशप्रेम और एकता की भावना उत्पन्न करता है। इसलिए अब हर सरकारी संस्थान में इसे रोजाना गाया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ी अपने संस्कृति और राष्ट्रभक्ति से जुड़े रहें। उन्होंने कहा कि यह नियम सभी सरकारी संस्थानों, जैसे –
सरकारी दफ्तर,
सरकारी स्कूल,
कॉलेज,
और राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त मदरसे — सभी पर लागू होगा।
शिक्षा मंत्री बोले – वंदे मातरम भारत की आत्मा है
मदन दिलावर ने कहा, “वंदे मातरम कोई साधारण गीत नहीं है, यह वह ध्वनि है जो भारत माता की आत्मा से निकलती है। इसे गाने से देशभक्ति की भावना प्रबल होती है और नागरिकों में राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना बढ़ती है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि प्रदेश के सभी सरकारी कर्मचारी और छात्र जब रोजाना ‘वंदे मातरम’ गाएंगे, तो इससे समाज में राष्ट्रीय एकता का संदेश फैलेगा।
नीरजा मोदी स्कूल प्रकरण पर शिक्षा मंत्री की प्रतिक्रिया
जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल में हाल ही में हुई छात्रा की आत्महत्या के मामले में भी शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने बयान दिया। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुखद घटना है और राज्य सरकार इस मामले में गंभीरता से जांच कर रही है। राज्य सरकार की टीम और केंद्र की सीबीएसई जांच टीम दोनों घटनास्थल पर जांच कर रही हैं। राज्य टीम को रिपोर्ट तैयार करने के लिए दो दिन का अतिरिक्त समय दिया गया है। शिक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि उन्हें इस बात की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है कि स्कूल प्रबंधन ने जांच टीम को प्रवेश से रोका था। लेकिन अगर ऐसा हुआ है और इसकी शिकायत शिक्षा विभाग के किसी अधिकारी ने दी, तो संबंधित स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कम नामांकन वाले स्कूलों को मर्ज करने की तैयारी
राजस्थान में शिक्षा विभाग ने शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कम नामांकन वाले स्कूलों के मर्ज की प्रक्रिया तेज कर दी है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने बताया कि इस साल राज्य में 449 स्कूलों को मर्ज किया जा चुका है, जबकि अगले साल 312 और स्कूलों का विलय किया जाएगा। इनमें शामिल हैं –
155 उच्च माध्यमिक विद्यालय जिनमें 25 से कम विद्यार्थी हैं,
157 प्राथमिक विद्यालय जिनमें 5 या उससे कम नामांकन है।
दिलावर ने कहा कि पिछले दो वर्षों के प्रयासों के बावजूद जिन स्कूलों में छात्रों की संख्या नहीं बढ़ी, उन्हें नजदीकी विद्यालयों में समायोजित किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में विद्यार्थियों को अधिक दूरी तय न करनी पड़े, इसका ध्यान रखा जाएगा। साथ ही, शिक्षा विभाग ने सर्वेक्षण शुरू कर दिया है और यह पूरी प्रक्रिया अगले साल की शुरुआत तक पूरी की जाएगी।
स्कूलों के विलय से शिक्षा व्यवस्था को होगा लाभ
राज्य सरकार का मानना है कि कम विद्यार्थियों वाले स्कूलों को मर्ज करने से –
शिक्षकों का बेहतर उपयोग होगा,
संसाधनों की बचत होगी,
और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिलेगा।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिन इलाकों में छात्र संख्या कम है, वहां के बच्चों को निकटतम विद्यालयों में प्रवेश दिलाया जाएगा ताकि उनकी पढ़ाई में कोई बाधा न आए।
देशभक्ति और अनुशासन को मजबूत करने की पहल
राजस्थान सरकार का यह कदम केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक और राष्ट्रभक्ति से जुड़ा निर्णय भी है। राज्य के शिक्षा विभाग का कहना है कि रोजाना वंदे मातरम गाने से विद्यार्थियों में अनुशासन, एकता और देश के प्रति सम्मान की भावना जागेगी। विशेष रूप से मदरसों और कॉलेजों में वंदे मातरम गाने का निर्णय समाज में सद्भाव और समरसता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
शिक्षा मंत्री का संदेश – युवा पीढ़ी में जागे देशप्रेम
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने अपने संबोधन में कहा कि नई पीढ़ी को देश के आदर्शों और स्वतंत्रता संग्राम के मूल्यों को समझना चाहिए। उन्होंने कहा – “हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे और युवा केवल किताबों तक सीमित न रहें, बल्कि वे अपनी संस्कृति और देश की महान परंपरा से जुड़ें। रोजाना वंदे मातरम गाने से यह भावना स्वाभाविक रूप से विकसित होगी।”


