मनीषा शर्मा। राजस्थान के पुष्कर में आज कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर पंचतीर्थ स्नान का आखिरी महास्नान शुरू हो गया। ब्रह्म मुहूर्त से आरंभ हुआ यह स्नान पूरे दिन चलेगा। आस्था से ओत-प्रोत माहौल में हजारों नहीं बल्कि लाखों श्रद्धालु ब्रह्म सरोवर और 52 घाटों पर डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित कर रहे हैं। इसी के साथ पुष्कर का प्रसिद्ध धार्मिक मेला भी आज संपन्न हो जाएगा। मेले के अंतिम दिन धार्मिक उत्साह और भक्ति का माहौल चरम पर है। आस्था से सराबोर श्रद्धालु “हर-हर गंगे”, “जय पुष्करराज” जैसे जयघोष लगाते हुए सरोवर में स्नान कर रहे हैं।
कैबिनेट मंत्री सुरेश रावत ने की पूजा-अर्चना, मुख्यमंत्री जुड़े वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से
कार्तिक पूर्णिमा के इस शुभ अवसर पर कैबिनेट मंत्री सुरेश रावत ने पुष्कर सरोवर के सावित्री घाट पर पूजा-अर्चना की। उन्होंने प्रदेश की शांति, समृद्धि और खुशहाली के लिए विशेष प्रार्थना की। इस दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। तीर्थ पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ मंत्रोचित विधि से पूजा संपन्न कराई। सुरेश रावत ने कहा, “कार्तिक पूर्णिमा के पावन पर्व पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। लाखों श्रद्धालु पुण्य स्नान कर रहे हैं और पुष्कर वासी ‘अतिथि देवो भव’ की परंपरा निभा रहे हैं।” उन्होंने मेले को भव्य आयोजन बनाने के लिए मुख्यमंत्री और प्रशासन का आभार व्यक्त किया और कहा कि इस आयोजन ने राजस्थान की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को और समृद्ध किया है।
मेले के समापन पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम
मेले के समापन अवसर पर पर्यटन विभाग की ओर से कई विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस बार पहली बार पुष्कर में कैमल शो (Camel Show) और हॉर्स शो (Horse Show) का आयोजन किया जा रहा है। मेला ग्राउंड में पारंपरिक खेलों की झलक देखने को मिली, जिसमें मटका रेस, बोरी रेस, चम्मच रेस और ग्रुप डांस प्रतियोगिताएं शामिल थीं। कार्यक्रम के अंत में विजेताओं को पुरस्कार वितरण भी किया जाएगा। शाम के समय सरोवर की महाआरती का आयोजन होगा, जिसमें दीपों की लौ से सरोवर का हर कोना आलोकित होगा। महाआरती के दौरान वातावरण भक्ति और श्रद्धा से परिपूर्ण रहेगा।
सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद, प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद
मेले के अंतिम दिन भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। महास्नान के दौरान सुरक्षा और कानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए घाटों और मंदिरों की सुरक्षा की कमान आईएएस और आरएएस अफसरों को कार्यपालक मजिस्ट्रेट के रूप में सौंपी गई है। पुलिस, आरएसी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और सिविल डिफेंस के जवान हर घाट पर तैनात हैं। भीड़ नियंत्रण और यातायात व्यवस्था को बनाए रखने के लिए विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया गया है।
ट्रैफिक पुलिसकर्मियों से उलझे युवक, नियमों का उल्लंघन
पुष्कर मेले के दौरान मंगलवार शाम पत्रकार कॉलोनी के सामने लगाए गए नो एंट्री और ट्रैफिक डायवर्जन क्षेत्र में चार युवकों ने हंगामा खड़ा कर दिया। जानकारी के अनुसार, युवकों ने अपनी कार बीच सड़क पर खड़ी कर दी, जिससे ट्रैफिक बाधित हुआ। जब पुलिसकर्मियों ने उन्हें वाहन हटाने को कहा, तो उन्होंने अभद्रता और धमकी भरे शब्दों का इस्तेमाल किया। हालांकि बाद में युवक वहां से चले गए और पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, “भीड़भाड़ और धार्मिक माहौल को देखते हुए कोई अप्रिय स्थिति न बने, इसलिए मामला शांतिपूर्ण तरीके से सुलझा लिया गया।”
2 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे, महिलाओं की रही विशेष भागीदारी
आखिरी दिन के इस महास्नान में 2 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के शामिल होने का अनुमान है। भोर से ही घाटों पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। श्रद्धालु न केवल राजस्थान बल्कि हरियाणा, पंजाब, गुजरात, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश से भी पुष्कर पहुंचे हैं। इस बार स्नान में महिलाओं की संख्या अधिक देखी जा रही है। आस्थावान महिलाएं अपने परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना करते हुए सरोवर में डुबकी लगा रही हैं।
महास्नान में श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़, आस्था और उत्साह का संगम
ब्रह्म सरोवर में आज श्रद्धालुओं की भीड़ देखते ही बन रही है। पंचतीर्थ स्नान के अंतिम दिन हर घाट पर धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन और पूजा-पाठ का आयोजन किया गया है। भक्तों ने सूर्योदय के समय स्नान कर सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित किया। सरोवर के चारों ओर फूलों की सजावट और दीपों की रौशनी से वातावरण दिव्यता से भरा हुआ है। घाटों पर “जय पुष्करराज, हर हर महादेव, ॐ ब्रह्माय नमः” के जयघोष गूंज रहे हैं।
धार्मिक मेला संपन्न, श्रद्धा और सांस्कृतिक परंपरा का अद्भुत संगम
कार्तिक पूर्णिमा का यह मेला, पुष्कर की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का प्रतीक माना जाता है। हर साल लाखों श्रद्धालु पंचतीर्थ स्नान के लिए यहां पहुंचते हैं। इस बार का मेला भी सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसमें धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यटन और व्यापार का भी संगम देखने को मिला। स्थानीय व्यापारियों, कारीगरों और होटल कारोबारियों को भी मेले से विशेष लाभ हुआ। मेले के साथ ही पुष्कर की पवित्र भूमि पर फिर एक बार “आस्था, अध्यात्म और परंपरा” का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रद्धालु भाव-विभोर होकर सरोवर से लौटते हुए एक ही संदेश दे रहे थे — “हर वर्ष आऊंगा, पुष्करराज में डुबकी लगाऊंगा।”


