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चार दिन चली हड़ताल खत्म: राजस्थान में निजी स्लीपर बसें फिर सड़कों पर, सरकार से बनी सहमति

चार दिन चली हड़ताल खत्म: राजस्थान में निजी स्लीपर बसें फिर सड़कों पर, सरकार से बनी सहमति

शोभना शर्मा।  राजस्थान में बीते चार दिनों से चल रही निजी स्लीपर बस ऑपरेटर्स की हड़ताल मंगलवार रात समाप्त हो गई। परिवहन मुख्यालय, जयपुर में हुई लंबी वार्ता के बाद बस ऑपरेटर्स यूनियन और सरकार के बीच समझौता हुआ। इसके बाद यूनियन ने घोषणा की कि वे बिना किसी शर्त के हड़ताल वापस ले रहे हैं और बसों का संचालन सुरक्षा मानकों के अनुरूप करेंगे। इस निर्णय के बाद देर रात से ही बसें फिर से सड़कों पर उतर आईं, जिससे यात्रियों को बड़ी राहत मिली। हड़ताल के कारण पिछले छह दिनों से लाखों यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।

समझौते से पहले चली लंबी वार्ता

मंगलवार को परिवहन विभाग में हुई अहम बैठक में ऑल राजस्थान कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बस यूनियन के प्रतिनिधि शामिल हुए। वार्ता में परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और यूनियन पदाधिकारी मौजूद रहे। बैठक में यह सहमति बनी कि सभी बस ऑपरेटर्स अपनी बसों को सुरक्षा मानकों और बॉडी कोड के अनुसार तैयार करेंगे, ताकि यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो। इसके अलावा सरकार ने आश्वासन दिया कि जिन बसों के दस्तावेज़ सही हैं, उनके खिलाफ किसी तरह की जबरन कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसी आश्वासन के बाद यूनियन ने देर शाम हड़ताल खत्म करने का ऐलान किया।

परिवहन मंत्री और डिप्टी सीएम से हुई थी मुलाकात

इससे पहले सोमवार को यूनियन का प्रतिनिधिमंडल राजस्थान के परिवहन मंत्री और डिप्टी सीएम डॉ. प्रेमचंद बैरवा से भी मिला था। इस मुलाकात में बस ऑपरेटर्स ने कहा था कि वे यात्रियों की सुरक्षा के विरोध में नहीं हैं, लेकिन अचानक नियमों के बदलाव से उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। डिप्टी सीएम बैरवा ने उन्हें स्पष्ट कहा कि सरकार यात्रियों की सुरक्षा के मामले में कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने ऑपरेटर्स से अपील की कि वे जल्द से जल्द सुरक्षा मानकों को पूरा करें ताकि जनता को असुविधा न हो।

यूनियन ने जताया खेद, यात्रियों से मांगी माफी

हड़ताल समाप्ति की घोषणा के दौरान यूनियन अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा ने कहा, “हम यात्रियों से हुई असुविधा के लिए खेद व्यक्त करते हैं। हमारी मंशा सरकार से टकराव की नहीं थी, बल्कि यह सुनिश्चित करने की थी कि नियम व्यावहारिक हों। अब हमने तय किया है कि हम सभी बसों का संचालन पूरी सुरक्षा के साथ करेंगे।” राजेंद्र शर्मा ने यह भी कहा कि अब सभी ऑपरेटर्स को निर्देश दिया गया है कि वे जल्द से जल्द अपनी बसों को निर्धारित सुरक्षा मापदंडों के अनुसार संशोधित करें। उन्होंने कहा कि सरकार से सहयोग मिलने पर यात्रियों को भविष्य में और बेहतर सेवाएं मिलेंगी।

जैसलमेर बस हादसे के बाद बढ़ा था विवाद

इस पूरे विवाद की शुरुआत जैसलमेर में हुए एक दर्दनाक बस हादसे के बाद हुई थी। उस दुर्घटना में कई यात्रियों की मौत हो गई थी, जिसके बाद सरकार ने निजी स्लीपर बसों की सुरक्षा जांच का अभियान शुरू किया। परिवहन विभाग ने कई बसों को बॉडी कोड और सेफ्टी मानकों के अनुरूप न होने पर जब्त कर लिया था। इसके विरोध में बस ऑपरेटर्स ने 30 अक्टूबर से राज्यव्यापी हड़ताल शुरू कर दी थी। इस हड़ताल के चलते जयपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर, बीकानेर, अजमेर और सीकर जैसे बड़े शहरों में निजी बस सेवाएं ठप हो गईं।

यात्रियों को राहत, बसें फिर सड़कों पर

चार दिनों की हड़ताल के कारण यात्रियों को लंबी दूरी की यात्रा के लिए बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा। बसें बंद होने के कारण यात्रियों को ट्रेन या निजी टैक्सियों पर निर्भर रहना पड़ा, जिससे किराए भी बढ़ गए थे। समझौते के बाद मंगलवार रात से ही बसों का संचालन शुरू कर दिया गया। जयपुर, कोटा, अजमेर और जोधपुर जैसे रूटों पर रातभर बसें चलीं। यात्रियों ने राहत की सांस ली और कहा कि अब उन्हें अपने कामकाज और यात्रा में आसानी होगी।

सरकार ने दोहराई सुरक्षा प्राथमिकता

राजस्थान सरकार ने हड़ताल समाप्त होने के बाद बयान जारी करते हुए कहा कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। परिवहन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि अब सभी निजी बसों की तकनीकी जांच नियमित अंतराल पर की जाएगी। साथ ही, बिना सुरक्षा प्रमाणपत्र वाली किसी भी बस को संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी। विभाग ने यह भी बताया कि जो ऑपरेटर्स नए नियमों के अनुसार बसों को संशोधित करेंगे, उन्हें तकनीकी सहायता और आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा।

भविष्य में सहयोग की अपील

सरकार और यूनियन दोनों पक्षों ने एक स्वर में कहा कि भविष्य में किसी भी मतभेद की स्थिति में संवाद के माध्यम से समाधान निकाला जाएगा। ऑल राजस्थान कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बस यूनियन ने यह भी कहा कि वे आने वाले समय में बसों में CCTV, फायर सेफ्टी सिस्टम और GPS ट्रैकिंग उपकरण लगाने पर भी विचार कर रहे हैं, ताकि यात्रा और भी सुरक्षित बन सके।

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