शोभना शर्मा। राजस्थान की राजनीति में अंता विधानसभा उपचुनाव सुर्खियों में है। यह चुनाव न केवल स्थानीय बल्कि प्रदेशस्तर पर भी राजनीतिक प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। 11 नवंबर को मतदान होना है और 14 नवंबर को परिणाम घोषित किए जाएंगे। इस सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय होता दिख रहा है, जहां कांग्रेस, बीजेपी और निर्दलीय नरेश मीणा के बीच सीधी टक्कर है। अंता विधानसभा सीट कांग्रेस के लिए एक प्रतिष्ठित सीट रही है, जिसे पार्टी किसी भी सूरत में खोना नहीं चाहती। इसी कारण कांग्रेस संगठन ने यहां अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। प्रचार अभियान को धार देने के लिए पार्टी ने निचले स्तर तक व्यापक रणनीति तैयार की है।
सचिन पायलट का रोड शो बनेगा प्रचार का केंद्रबिंदु
कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट 5 नवंबर को अंता में बड़ा रोड शो करने जा रहे हैं। पायलट का यह दौरा कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश भरने और ग्रामीण मतदाताओं को साधने की दृष्टि से अहम माना जा रहा है। पायलट सुबह 10 बजे अंता पहुंचेंगे और पूरे दिन क्षेत्र में रोड शो तथा जनसंपर्क करेंगे। उनके साथ प्रहलाद गुंजल समेत कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता मौजूद रहेंगे। यह रोड शो कांग्रेस के चुनाव प्रचार का मुख्य आकर्षण बनेगा और संगठन को एकजुटता का संदेश देगा। सचिन पायलट का जनाधार विशेषकर युवाओं और किसानों में मजबूत माना जाता है, इसलिए कांग्रेस उन्हें अंता के मतदाताओं के बीच अपने उम्मीदवार प्रमोद जैन भाया के समर्थन में निर्णायक चेहरा बनाना चाहती है।
कांग्रेस की चुनावी रणनीति: 56 नेताओं को सौंपे गांव-गांव के मोर्चे
कांग्रेस ने अंता उपचुनाव में प्रचार को मजबूत करने के लिए 56 नेताओं की एक विशेष टीम गठित की है। हर नेता को तीन-तीन गांवों का प्रभारी बनाया गया है। ये नेता स्थानीय स्तर पर जाकर मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं और कांग्रेस के पक्ष में माहौल बना रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के निर्देश पर बनी इस टीम का लक्ष्य ग्रामीण इलाकों में संगठन की पकड़ मजबूत करना और मतदाताओं तक सीधा संवाद स्थापित करना है। सभी प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे गांवों में जाकर स्थानीय मुद्दों पर बातचीत करें, आम लोगों की समस्याओं को सुनें और कांग्रेस सरकार की योजनाओं की जानकारी दें। यह रणनीति कांग्रेस के ‘घर-घर संपर्क’ अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण वोट बैंक को मजबूत बनाना और मतदाताओं में विश्वास कायम करना है।
प्रमुख उम्मीदवारों के बीच दिलचस्प मुकाबला
अंता उपचुनाव में कुल 15 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं, लेकिन मुकाबला तीन प्रमुख उम्मीदवारों के बीच सिमटता नजर आ रहा है।
कांग्रेस: प्रमोद जैन भाया
भाजपा (BJP): मोरपाल सुमन
निर्दलीय: नरेश मीणा
कांग्रेस के प्रमोद जैन भाया पहले भी इस सीट से विधायक रह चुके हैं और क्षेत्र में उनकी व्यक्तिगत पकड़ मजबूत मानी जाती है। वहीं, बीजेपी के मोरपाल सुमन स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच सक्रिय चेहरा हैं, जिन्हें पार्टी ने एक बार फिर मौका दिया है। निर्दलीय नरेश मीणा का मुकाबले में आना इस चुनाव को और दिलचस्प बना रहा है। मीणा समुदाय के समर्थन के कारण उन्हें तीसरे विकल्प के रूप में देखा जा रहा है, जो दोनों बड़ी पार्टियों के लिए चुनौती बन सकते हैं।
कांग्रेस का ग्रामीण वोट बैंक पर फोकस
कांग्रेस का ध्यान इस बार विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों पर है। पार्टी यह मानती है कि यदि ग्रामीण मतदाता एकजुट रहते हैं तो अंता सीट पर उसकी स्थिति मजबूत हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ने अपने नेताओं को गांवों में जाकर जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित करने, किसान, महिला और युवा मतदाताओं से जुड़ने और स्थानीय मुद्दों जैसे बिजली, पानी, सड़क और रोजगार पर बात करने के निर्देश दिए हैं। पार्टी रणनीतिकारों का मानना है कि यदि गांव-गांव में कांग्रेस की उपस्थिति मजबूत रही तो प्रमोद जैन भाया के लिए जीत का रास्ता आसान हो सकता है।
बीजेपी भी नहीं पीछे, बढ़ाई प्रचार की रफ्तार
हालांकि कांग्रेस ने अपने प्रचार अभियान को धारदार बनाया है, लेकिन भाजपा भी पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरी है। पार्टी ने मोरपाल सुमन को उम्मीदवार बनाकर स्थानीय समीकरणों को साधने की कोशिश की है। बीजेपी का फोकस शहरी मतदाताओं और पारंपरिक वोट बैंक पर है। वहीं, पार्टी अपने प्रचार में केंद्र और राज्य की पिछली नीतियों का हवाला देकर कांग्रेस पर हमला बोल रही है।
निर्दलीय नरेश मीणा बने तीसरे मोर्चे की चुनौती
अंता उपचुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार नरेश मीणा ने मुकाबले को और कठिन बना दिया है। वे स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ रखते हैं और मीणा समाज के वोट बैंक पर असर डाल सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर नरेश मीणा को उल्लेखनीय वोट मिलते हैं, तो यह कांग्रेस और बीजेपी दोनों के लिए समीकरण बदलने वाला साबित हो सकता है।
चुनावी माहौल और संभावनाएं
अंता विधानसभा उपचुनाव अब पूरी तरह से कांटे की टक्कर में बदल चुका है। कांग्रेस अपने संगठन, वरिष्ठ नेताओं और प्रचार रणनीति पर निर्भर है, जबकि बीजेपी अपने पारंपरिक वोट बैंक और संगठनात्मक ढांचे पर भरोसा कर रही है। वहीं निर्दलीय उम्मीदवार का उभार चुनाव परिणामों को अप्रत्याशित बना सकता है। स्थानीय मुद्दों जैसे बेरोजगारी, जल संकट, कृषि समर्थन मूल्य और सड़क निर्माण इस चुनाव के केंद्र में हैं।


