मनीषा शर्मा। राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर राजस्थान में 7 नवंबर से राज्यव्यापी कार्यक्रमों की श्रृंखला शुरू होगी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशानुसार इन आयोजनों को “वंदे मातरम्@150” के नाम से देशभक्ति और एकता के उत्सव के रूप में मनाया जाएगा। इस विशेष अवसर की तैयारियों की समीक्षा को लेकर मंगलवार को मुख्य सचिव सुधांश पंत की अध्यक्षता में शासन सचिवालय, जयपुर में उच्च स्तरीय बैठक आयोजित हुई। बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, संभागीय आयुक्त, जिला कलेक्टर और अन्य प्रशासनिक अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। मुख्य सचिव ने सभी जिलों में कार्यक्रमों की भव्यता, जनसहभागिता और सोशल मीडिया प्रचार पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
7 नवंबर को जयपुर के एसएमएस स्टेडियम में होगा राज्यस्तरीय आयोजन
राज्यस्तरीय मुख्य समारोह 7 नवंबर को जयपुर के सवाई मान सिंह (एसएमएस) स्टेडियम में आयोजित होगा। इस अवसर पर राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन, 50 हजार तिरंगा झंडों का वितरण, स्कूली छात्रों, पुलिस और आर्मी बैंड की प्रस्तुतियां और महापुरुषों की प्रदर्शनी जैसे कार्यक्रम आयोजित होंगे। कार्यक्रम में सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों, तकनीकी कॉलेजों, मेडिकल संस्थानों, एनसीसी, एनएसएस, स्काउट-गाइड, पुलिस बलों और सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी रहेगी। मुख्य सचिव सुधांश पंत ने अधिकारियों से कहा कि यह आयोजन देशभक्ति और एकता का प्रतीक बने, जिससे नई पीढ़ी राष्ट्रप्रेम की भावना से ओत-प्रोत हो।
जिला स्तरीय आयोजन भी होंगे भव्य
7 नवंबर को ही अजमेर, बीकानेर, उदयपुर, भरतपुर, कोटा, जोधपुर, सीकर, भीलवाड़ा और अलवर में भी जिला स्तरीय आयोजन होंगे। इसके बाद 8 और 9 नवंबर को शेष 31 जिलों में प्रभारी मंत्रियों की उपस्थिति में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन आयोजनों में स्थानीय कलाकारों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान, राष्ट्रभक्ति और भारतीय एकता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्य सचिव ने कहा कि कार्यक्रम स्थलों पर सेल्फी बूथ लगाए जाएं ताकि युवा सोशल मीडिया पर इस आयोजन को प्रचारित कर सकें।
सामूहिक वंदे मातरम् वाचन से गूंजेंगे विद्यालय
राज्य सरकार ने इस अवसर को शिक्षा संस्थानों से जोड़ने के लिए भी एक विशेष योजना बनाई है। 7 नवंबर से 26 नवंबर (संविधान दिवस) तक सभी विद्यालयों और महाविद्यालयों में ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक वाचन कराया जाएगा। इस अवधि के दौरान छात्रों को राष्ट्रगीत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के बारे में जानकारी दी जाएगी। मुख्य सचिव पंत ने कहा कि विद्यार्थियों को यह बताया जाए कि ‘वंदे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की स्वतंत्रता आंदोलन की आत्मा रहा है, जिसने लाखों देशवासियों में आज़ादी का जोश भर दिया था।
विभिन्न विभागों की भूमिका और कार्यक्रमों की समय-सारणी
बैठक में तय किया गया कि राज्य सरकार के सभी विभाग अपनी-अपनी जिम्मेदारी के अनुसार कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। डीओआईटी विभाग को सभी कार्यक्रमों के लाइव प्रसारण और तकनीकी तैयारियां समय पर पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य सरकार द्वारा तय कार्यक्रमों की श्रृंखला इस प्रकार है —
10 नवंबर: सभी सरकारी कार्यालयों में ‘वंदे मातरम्@150’ एवं स्वदेशी संकल्प कार्यक्रम
11 नवंबर: नगर निकायों में आयोजन
12 नवंबर: पंचायती राज संस्थानों में विशेष आयोजन
13 नवंबर: स्कूलों व छात्रावासों में राष्ट्रगीत कार्यक्रम
14 नवंबर: उच्च शिक्षा संस्थानों में सांस्कृतिक गतिविधियां
15 नवंबर: अस्पतालों और पुलिस थानों में ‘वंदे मातरम्’ कार्यक्रम
26 नवंबर (संविधान दिवस): राज्यभर में समापन समारोह और सामूहिक गायन
इन कार्यक्रमों के माध्यम से राज्य सरकार का लक्ष्य है कि ‘वंदे मातरम्’ की भावना को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाया जाए।
स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को नमन करने का अवसर
मुख्य सचिव सुधांश पंत ने कहा कि यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को नमन करने का अवसर भी है।
उन्होंने कहा — “वंदे मातरम् भारत की आत्मा है। इस गीत ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लोगों में राष्ट्रप्रेम की भावना जगाई थी। आज इसकी 150वीं वर्षगांठ हमें अपने कर्तव्यों और राष्ट्रीय एकता की याद दिलाती है।” उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर जिले में स्थानीय कलाकारों, विद्यालयों और सामाजिक संगठनों को शामिल किया जाए ताकि यह कार्यक्रम जनआंदोलन का रूप ले सके।
बैठक में उपस्थित अधिकारी
इस अवसर पर बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें —
अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह भास्कर ए. सावंत
प्रमुख शासन सचिव पर्यटन राजेश कुमार यादव
प्रमुख शासन सचिव स्वास्थ्य गायत्री ए. राठौड़
प्रमुख शासन सचिव नगरीय विकास डॉ. देबाशीष
शासन सचिव स्वायत्त शासन रवि जैन
शासन सचिव डीओआईटी डॉ. रवि कुमार सुरपुर
सचिव सूचना एवं जनसंपर्क संदेश नायक
शामिल रहे।सभी अधिकारियों ने संयुक्त रूप से यह आश्वासन दिया कि ‘वंदे मातरम्@150’ को राज्यस्तरीय देशभक्ति उत्सव के रूप में भव्यता से मनाया जाएगा।
‘वंदे मातरम्’: भारत की आत्मा और एकता का प्रतीक
‘वंदे मातरम्’ की रचना 1875 में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी, जिसे 1882 में उनके उपन्यास आनंदमठ में शामिल किया गया। यह गीत भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान स्वदेशी आंदोलन का नारा बना और आज भी राष्ट्रगौरव का प्रतीक है। ‘वंदे मातरम्@150’ कार्यक्रम इसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास है। राजस्थान सरकार का उद्देश्य है कि नई पीढ़ी को इस गीत की ऐतिहासिक भावना से जोड़ा जाए और युवाओं में देशभक्ति, अनुशासन व एकता का संदेश दिया जाए।


