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पुष्कर मेले में ब्रह्म चतुर्दशी पर शाही स्नान, संतों ने की हवन-आरती और नशा त्याग का आह्वान

पुष्कर मेले में ब्रह्म चतुर्दशी पर शाही स्नान, संतों ने की हवन-आरती और नशा त्याग का आह्वान

मनीषा शर्मा, अजमेर।  तीर्थराज पुष्कर में चल रहे विश्व प्रसिद्ध पुष्कर मेले 2025 में सोमवार को पंचतीर्थ स्नान का तीसरा दिन धार्मिक उत्साह और आध्यात्मिक भक्ति से सराबोर रहा। ब्रह्म चतुर्दशी के पावन अवसर पर देशभर से आए संत-महंतों ने सप्तऋषि घाट पर शाही स्नान किया। हजारों श्रद्धालु इस दिव्य क्षण के साक्षी बने। सुबह मंगला आरती से पहले ब्रह्मा जी का महा अभिषेक किया गया। इसके बाद 56 भोग की झांकी सजाई गई और भगवान ब्रह्मा का मनमोहक श्रृंगार हुआ। सुबह की महाआरती में देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य लाभ प्राप्त किया।

शाही यात्रा में उमड़ी भक्तों की भीड़

सैन भक्ति पीठ के सैनाचार्य अचलानंदाचार्य महाराज और राम रमैया आश्रम के महंत संत प्रेमदास महाराज के सानिध्य में संतों की शाही यात्रा की शुरुआत हुई। यात्रा सैन भक्ति पीठ से प्रारंभ होकर रामधाम तिराहा, गुरुद्वारा, और हाईलेवल ब्रिज होते हुए सप्तऋषि घाट पहुंची। इस दौरान संतों ने संकीर्तन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति और नशा मुक्ति का संदेश दिया। यात्रा में सैकड़ों साधु-संतों, भक्तों और स्थानीय श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। घाट पर पहुंचकर संतों ने ब्रह्म सरोवर का पूजन-अभिषेक किया और फिर शाही डुबकी लगाई।

नशा मुक्ति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश

शाही स्नान के अवसर पर सैनाचार्य अचलानंद महाराज ने भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के युवा वर्ग को नशे से दूर रहना चाहिए और अपने जीवन को धर्म और सेवा के मार्ग पर लगाना चाहिए। उन्होंने कहा, “गुरु, तीर्थ और माता-पिता की सेवा ही सच्चे अर्थों में भगवान की सेवा है। हमें ब्रह्म चतुर्दशी के इस पावन दिन पर सभी प्रकार के व्यसनों का त्याग कर स्वस्थ समाज की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए।” अचलानंदाचार्य ने हाल ही में राजस्थान में हो रही दुर्घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि “हमने परमात्मा से प्रार्थना की है कि इन हादसों पर अंकुश लगे और मृतकों की आत्मा को शांति प्राप्त हो।”

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुई पूजा-अर्चना और हवन

सप्तऋषि घाट पर संतों की शोभायात्रा पहुंचने के बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना और हवन किया गया। इस अवसर पर घाटों पर सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। संतों ने भगवान भोलेनाथ की आराधना करते हुए डमरू बजाया और पुष्कर सरोवर के पवित्र जल में डुबकी लगाई। स्थानीय संत महादेव महाराज ने भगवान शिव का स्वरूप धारण कर विशेष आरती की, जिससे माहौल पूरी तरह आध्यात्मिक और भक्ति से भर गया।

पौराणिक महत्व: ब्रह्म चतुर्दशी और पुष्कर तीर्थ

पुष्कर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित कैलाश नाथ दाधीच ने बताया कि पद्म पुराण के अनुसार भगवान शिव ने स्वयं ब्रह्मा को यह वरदान दिया था कि ब्रह्म चतुर्दशी के दिन वे पुष्कर तीर्थ में विराजमान रहेंगे। इस दिन पुष्कर सरोवर में स्नान और पूजन करने से जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसलिए देशभर के संत और श्रद्धालु इस दिन पुष्कर पहुंचकर पुण्य स्नान करते हैं।

प्रशासन की तैयारियां और सुरक्षा व्यवस्था

पुष्कर में बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने मुख्य बाजार से ब्रह्मा चौक तक वन-वे यातायात व्यवस्था लागू की है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। पुष्कर सरोवर में इस बार पानी की मात्रा अधिक होने के कारण सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। स्थानीय पुलिस, आपदा प्रबंधन टीम और स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से घाटों पर निगरानी रखी जा रही है।

पंचतीर्थ स्नान का समापन कार्तिक पूर्णिमा पर

ब्रह्म चतुर्दशी के साथ पंचतीर्थ स्नान का यह तीसरा दिन रहा। अब इस धार्मिक पर्व का समापन बुधवार को कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर महास्नान के साथ होगा। शाम को सरोवर पर महाआरती का आयोजन होगा। इसके बाद वॉइस ऑफ पुष्कर में लोक कलाकारों की प्रस्तुति, रामायण मंचन और रात को कवि सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।

पशु मेले में अब तक 3.5 करोड़ का कारोबार

इस वर्ष पुष्कर पशु मेले में व्यापारिक गतिविधियां भी तेज रही हैं। अब तक 6685 पशुओं की आमद दर्ज की गई है, जिनमें 5214 राजस्थान के अंदर से और 1471 बाहर के राज्यों से आए हैं। अब तक 790 पशुओं की बिक्री हो चुकी है, जिससे कुल 3 करोड़ 50 लाख 92 हजार 500 रुपये का कारोबार हुआ है। 232 ऊंट बिके हैं, जिनकी कीमत 8 हजार से 84 हजार रुपये तक रही। 551 घोड़े बिके हैं, जिनमें सबसे महंगे घोड़े की कीमत 7 लाख रुपये रही। इन व्यापारिक गतिविधियों से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ मिला है।

बॉलीवुड नाइट में रूप कुमार और सोनाली राठौड़ ने बिखेरा संगीत का जादू

सोमवार रात को पुष्कर मेला स्टेडियम में आयोजित बॉलीवुड नाइट ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रसिद्ध पार्श्व गायक रूप कुमार राठौड़ और उनकी पत्नी सोनाली राठौड़ ने सुरों और गज़लों की जुगलबंदी से दर्शकों का मन मोह लिया। उनके लोकप्रिय गीतों पर उपस्थित संगीत प्रेमी देर रात तक झूमते रहे। कार्यक्रम की शुरुआत सोनाली राठौड़ के लाइव कंसर्ट से हुई, जिसके बाद रूप कुमार राठौड़ ने अपने प्रसिद्ध गीतों से माहौल को संगीतमय बना दिया।

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