latest-newsबांराराजनीतिराजस्थान

नरेश मीणा के बयान पर भड़के अशोक चांदना, बोले– ‘अस्पताल भेजो, विधानसभा नहीं’

नरेश मीणा के बयान पर भड़के अशोक चांदना, बोले– ‘अस्पताल भेजो, विधानसभा नहीं’

शोभना शर्मा।  राजस्थान की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। बारां जिले की अंता विधानसभा सीट पर 11 नवंबर को होने वाले उपचुनाव के लिए प्रचार अपने चरम पर है। बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा था, लेकिन अब निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा ने मैदान में उतरकर और तीखे बयान देकर इस मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। पिछले कुछ दिनों से अंता में बड़े नेताओं का जमावड़ा लगा हुआ है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, पूर्व मंत्री अशोक चांदना समेत कई दिग्गज नेता लगातार प्रचार में जुटे हैं। लेकिन नरेश मीणा के एक बयान ने चुनावी हवा में नया मोड़ ला दिया है।

‘चांदनी’ बयान से भड़की कांग्रेस, अशोक चांदना ने दिया पलटवार

निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा ने हाल ही में एक सभा के दौरान पूर्व मंत्री अशोक चांदना को “चांदनी” कहकर संबोधित किया। यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई। इस बयान से नाराज़ होकर अशोक चांदना ने दो वीडियो जारी कर पलटवार किया। पहले वीडियो में उन्होंने कहा – “जो अपने कार्यकर्ताओं को दुख और लात की बात देता है, उसे अस्पताल भेजो, विधानसभा नहीं।” दूसरे वीडियो में उन्होंने संयमित लहजे में कहा कि चुनावी माहौल में भाषा की मर्यादा बनाए रखना जरूरी है, खासकर तब जब निर्दलीय प्रत्याशी उनके समाज से आते हैं।

‘मेरे मीणा समाज के दोस्त हैं, मैं मर्यादा नहीं लांघूंगा’

अशोक चांदना ने आगे कहा, “कई मेरे मीणा समाज में अच्छे दोस्त हैं। अगर मैं भी निर्दलीय प्रत्याशी की भाषा में बोलने लग जाऊं, तो मेरे दोस्तों का दिल दुखेगा। यह सब चुनावी बातें हैं, 11 तारीख के बाद ये सब समाप्त हो जाएंगी।” चांदना के इस जवाब से उन्होंने एक तरफ जहां शालीनता बनाए रखी, वहीं दूसरी तरफ नरेश मीणा के आक्रामक तेवरों पर निशाना भी साधा। उनका यह बयान कांग्रेस खेमे में जोश भरने वाला माना जा रहा है।

कांग्रेस बनाम बीजेपी का मुकाबला, बीच में निर्दलीय का असर

अंता विधानसभा उपचुनाव अब तीन धाराओं में बंटता नजर आ रहा है। कांग्रेस की ओर से प्रमोद जैन भाया मैदान में हैं। भाजपा ने मोरपाल सुमन पर दांव लगाया है। जबकि निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा ने दोनों दलों की चिंता बढ़ा दी है। नरेश मीणा पहले भी क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं और अपने समुदाय में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। उनके चुनाव मैदान में उतरने से अंता में समीकरण तेजी से बदले हैं, खासकर मीणा और ग्रामीण वोट बैंक पर असर पड़ने की संभावना है।

बागियों के नामांकन वापसी से बीजेपी को राहत

अंता उपचुनाव में कुल 15 प्रत्याशी मैदान में हैं, लेकिन बीजेपी को तब बड़ी राहत मिली जब उसके 5 बागी उम्मीदवारों ने अपने नामांकन वापस ले लिए। इनमें पूर्व विधायक रामपाल मेघवाल भी शामिल हैं। नामांकन वापसी के बाद अब बीजेपी का संगठन और प्रचार पूरी तरह मोरपाल सुमन के पीछे एकजुट हो गया है। दूसरी ओर, कांग्रेस भी एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रही है, हालांकि नरेश मीणा की उपस्थिति उसके लिए चुनौती बन सकती है।

अंता में नेताओं का जमावड़ा, प्रचार में जोर

उपचुनाव की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, अंता में नेताओं का जमावड़ा और बढ़ता जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे लगातार सभाएं कर रही हैं और कांग्रेस सरकार को विफल बताने में कोई कसर नहीं छोड़ रहीं। वहीं गोविंद सिंह डोटासरा और अशोक चांदना भी कांग्रेस उम्मीदवार प्रमोद भाया के समर्थन में रैलियां कर रहे हैं। स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ राज्य की सियासत, बेरोजगारी, किसानों की स्थिति और पेयजल संकट जैसे विषय भी इस चुनाव में प्रमुख बन गए हैं।

चुनावी समीकरणों में बदलाव की संभावना

अंता विधानसभा सीट का यह उपचुनाव कई मायनों में खास माना जा रहा है। राजस्थान में विधानसभा चुनाव के बाद यह पहला बड़ा उपचुनाव है, जिसे सभी दल प्रतिष्ठा से जोड़कर देख रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, भाजपा और कांग्रेस के बीच पारंपरिक मुकाबले में नरेश मीणा की एंट्री ने वोट शेयर का संतुलन बिगाड़ दिया है। अगर मीणा समुदाय के वोटों में सेंध लगती है, तो यह कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। वहीं बीजेपी को उम्मीद है कि विपक्षी मतों के बंटवारे से उसे फायदा मिलेगा।

राजनीतिक मर्यादा और भाषा पर फिर उठे सवाल

अंता उपचुनाव की रैलियों और भाषणों में जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है, उसने एक बार फिर राजनीतिक शालीनता पर बहस छेड़ दी है। चांदना और मीणा के बयानों के बाद दोनों खेमों के समर्थक सोशल मीडिया पर एक-दूसरे पर हमलावर हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के बयानों से चुनावी विमर्श विकास और जनता के मुद्दों से भटक जाता है।

post bottom ad

Discover more from MTTV INDIA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading