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जन्मदिन की रात किरोड़ी लाल मीणा का एक्शन: फैक्ट्री पर छापा

जन्मदिन की रात किरोड़ी लाल मीणा का एक्शन: फैक्ट्री पर छापा

शोभना शर्मा। राजस्थान सरकार के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने अपने जन्मदिन की रात ऐसा कदम उठाया जिसने प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग को हिला दिया। सोमवार देर रात उन्होंने दौसा जिले के महवा क्षेत्र में दौसा-भरतपुर बॉर्डर पर स्थित एक फूड प्रोसेसिंग फैक्ट्री पर अचानक छापेमारी की। यह फैक्ट्री लंबे समय से संदिग्ध गतिविधियों को लेकर चर्चा में थी।

छापेमारी के दौरान मंत्री मीणा के साथ दौसा के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. सीताराम मीणा, खाद्य सुरक्षा अधिकारी और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे। जैसे ही छापे की सूचना फैक्ट्री में काम कर रहे मजदूरों को मिली, वहां अफरा-तफरी मच गई।

नकली घी, बटर और मिल्क पाउडर बनाने की आशंका

मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने फैक्ट्री का गहन निरीक्षण किया और कहा कि यहां बड़े पैमाने पर मिलावटी उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। निरीक्षण के दौरान हजारों लीटर दूध नष्ट करवाया गया, क्योंकि उसमें नकलीपन की आशंका जताई गई। मौके पर कई ड्रमों में संदिग्ध केमिकल पाए गए जो तूड़ी (चारे) के ढेर में दबाकर रखे गए थे। जब इन्हें बाहर निकाला गया तो तेज दुर्गंध उठी, जिससे स्पष्ट हुआ कि यह स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक पदार्थ हैं।

मंत्री मीणा ने कहा कि “यह सीधे-सीधे मानव जीवन से खिलवाड़ है। इस तरह के विषाक्त पदार्थों से तैयार उत्पाद अगर बाजार में पहुंचते हैं, तो आम जनता की सेहत पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।”

उन्होंने सीएमएचओ को तत्काल सभी संदिग्ध उत्पादों के सैंपल लेने और उन्हें प्रयोगशाला जांच के लिए भेजने के निर्देश दिए। साथ ही दौसा कलेक्टर देवेंद्र कुमार और एसपी सागर राणा को भी पूरी घटना की जानकारी दी और कार्रवाई के आदेश दिए।

फैक्ट्री में मिले कई कंपनियों के रैपर

छापेमारी के दौरान जांच टीम को कई कंपनियों के रैपर, पैकिंग सामग्री और नकली ब्रांडिंग के सबूत मिले। फैक्ट्री के अंदर विभिन्न ब्रांडों के नाम से घी, बटर और मिल्क पाउडर तैयार करने का काम किया जा रहा था। अधिकारियों ने बताया कि यहां मिलने वाले केमिकल खाद्य पदार्थों में मिलाकर नकली उत्पाद तैयार किए जाते थे।

सीएमएचओ डॉ. सीताराम मीणा ने बताया कि फैक्ट्री में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक केमिकल का इस्तेमाल किया जा रहा था। मौके से कई तरह के रैपर, कंटेनर और खाली डिब्बे बरामद किए गए हैं। उन्होंने कहा कि फैक्ट्री संचालक के पास खाद्य सुरक्षा का वैध लाइसेंस है या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है।

पहले भी हो चुकी है कार्रवाई

सूत्रों के अनुसार, यह फैक्ट्री पहले भी प्रशासन के निशाने पर आ चुकी है। कुछ महीने पहले भी यहां से नकली घी और बटर के नमूने लिए गए थे, जिनमें मिलावट की पुष्टि हुई थी। उस समय भी फैक्ट्री का कुछ माल सीज किया गया था, लेकिन अब फिर से उत्पादन शुरू कर दिया गया था।

मंत्री मीणा ने अधिकारियों से कहा कि ऐसी फैक्ट्रियों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है, क्योंकि यह आम लोगों के स्वास्थ्य और जीवन से खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि “ऐसे लोग समाज के लिए खतरा हैं, जो सिर्फ मुनाफे के लिए मिलावट कर रहे हैं।”

सरकार करेगी सख्त कार्रवाई

कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार खाद्य सुरक्षा को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी जिले में इस तरह की मिलावटखोरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद फैक्ट्री संचालक पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को जेल भेजा जाएगा।

उन्होंने कहा कि “हमारा उद्देश्य जनता को शुद्ध खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना है। कोई भी व्यक्ति अगर मानव जीवन से खिलवाड़ करेगा, तो उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।”

सैंपलिंग और जांच की प्रक्रिया शुरू

छापेमारी के बाद फैक्ट्री में मौजूद सभी उत्पादों — दूध, घी, बटर और मिल्क पाउडर — की सैंपलिंग की गई। इन नमूनों को खाद्य प्रयोगशाला भेजा गया है। विभाग ने फैक्ट्री में उपयोग किए जा रहे केमिकल के स्रोत की भी जांच शुरू की है।

फिलहाल फैक्ट्री को अस्थायी रूप से सील कर दिया गया है और प्रशासनिक अधिकारी इसके लाइसेंस व अनुमति से जुड़ी सभी जानकारी एकत्रित कर रहे हैं। जांच में अगर फैक्ट्री अवैध पाई गई तो उसे स्थायी रूप से बंद कर दिया जाएगा।

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