शोभना शर्मा। राजस्थान की सियासत एक बार फिर नए मोड़ पर पहुंच गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि राज्य मंत्रिमंडल विस्तार पर कोई भी निर्णय अंता विधानसभा उपचुनाव के परिणाम के बाद ही लिया जाएगा। इस बयान से यह लगभग तय हो गया है कि राजस्थान में मंत्रिमंडल फेरबदल अब उपचुनाव और बिहार विधानसभा चुनावों के परिणाम के बाद ही संभव होगा।
राठौड़ बोले – भाजपा जीत रही है अंता उपचुनाव
कोटा प्रवास के दौरान मीडिया से बातचीत में मदन राठौड़ ने दावा किया कि भाजपा अंता उपचुनाव जीतने जा रही है। वे इन दिनों बारां जिले में दो दिवसीय दौरे पर हैं और अंता विधानसभा क्षेत्र में पार्टी प्रत्याशी मोरपाल सुमन के समर्थन में जनसभाएं कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “अंता में जनता भाजपा के साथ है। हमारा प्रत्याशी स्वच्छ छवि का, ईमानदार और जनसेवा की भावना से प्रेरित व्यक्ति है। पार्टी कार्यकर्ता घर-घर जाकर भाजपा की नीति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास मॉडल की जानकारी दे रहे हैं।”
“अंता से जीतने वाले को भी मिल सकता है मंत्रिमंडल में स्थान”
जब राठौड़ से पूछा गया कि राजस्थान में मंत्रिमंडल विस्तार कब होगा, तो उन्होंने कहा, “अंता चुनाव के परिणाम आने के बाद इस विषय पर चर्चा होगी। संभव है कि अंता से जीतने वाले उम्मीदवार का भी नाम मंत्रिमंडल में शामिल किया जाए।” उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। भाजपा के भीतर कई वरिष्ठ नेताओं और नए विधायकों की नजर मंत्रिमंडल में अपनी संभावित भूमिका पर है। अब माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व अंता की जीत के बाद ही किसी भी तरह के फेरबदल पर अंतिम निर्णय करेगा।
पार्टी के लिए विकास ही मुख्य एजेंडा
राठौड़ ने साफ किया कि भाजपा का फोकस सिर्फ विकास पर है। उन्होंने कहा, “हमारा मुख्य मुद्दा विकास है। जनता देख रही है कि भाजपा शासन में किस तरह से योजनाएं धरातल पर उतरीं। हमारे लिए देश, काल और वर्तमान परिस्थिति में विकास ही सर्वोच्च प्राथमिकता है।” उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा की सरकार जनता के विश्वास पर टिकी है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व पटल पर एक मजबूत पहचान बना रहा है।
निर्दलीय प्रत्याशी पर बोले राठौड़ – “किसी की उम्मीद पर पानी नहीं फेरना चाहता”
मीडिया ने जब राठौड़ से निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा के बारे में सवाल पूछा, तो उन्होंने किसी भी सीधी टिप्पणी से बचते हुए कहा, “हर उम्मीदवार अपनी उम्मीदों के साथ चुनाव मैदान में उतरता है। मैं किसी की उम्मीद पर पानी नहीं फेरना चाहता।” हालांकि बाद में उन्होंने विपक्षी प्रत्याशी पर अप्रत्यक्ष हमला बोलते हुए कहा कि “हमारे सामने जो उम्मीदवार हैं, उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। वे जमानत पर हैं और भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे हुए हैं।”
भाजपा प्रत्याशी मोरपाल सुमन को बताया “निष्कलंक और कर्मठ”
भाजपा ने अंता विधानसभा सीट से मोरपाल सुमन को टिकट दिया है। राठौड़ ने उनकी तारीफ करते हुए कहा, “मोरपाल सुमन किसान परिवार से हैं और राजनीति में आने का उनका उद्देश्य सेवा करना है। जनता का स्नेह और समर्थन उनके साथ है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि अंता क्षेत्र ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के कार्यकाल में और सांसद दुष्यंत सिंह के नेतृत्व में विकास देखा है। अब जनता जानती है कि क्षेत्र का विकास कौन कर सकता है।
मंत्रिमंडल विस्तार पर भाजपा का रुख स्पष्ट
राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार के कार्यकाल के बाद भाजपा सत्ता में आने के बाद लगातार मंत्रिमंडल गठन और विस्तार को लेकर चर्चा में रही है। मदन राठौड़ के बयान से यह साफ हो गया है कि पार्टी अब किसी जल्दबाजी में नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा की रणनीति स्पष्ट है — पहले अंता उपचुनाव जीतकर शक्ति संतुलन मजबूत किया जाए, फिर मंत्रिमंडल विस्तार के माध्यम से नए समीकरण बनाए जाएं। राज्य में भाजपा की नजर 2028 विधानसभा चुनावों पर है और पार्टी नेतृत्व यह सुनिश्चित करना चाहता है कि संगठनात्मक और प्रशासनिक स्तर पर संतुलन कायम रहे।
अंता उपचुनाव क्यों महत्वपूर्ण है?
अंता विधानसभा सीट पर भाजपा और निर्दलीय नरेश मीणा के बीच मुकाबला दिलचस्प हो गया है। यह सीट न केवल कोटा-बूंदी संभाग के राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करेगी, बल्कि भविष्य में पार्टी के मंत्री पदों की दिशा भी तय कर सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर भाजपा यहां जीत दर्ज करती है, तो यह मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व को मजबूती देगा और संगठनात्मक स्तर पर मदन राठौड़ की रणनीति को सफल घोषित करेगा।


