शोभना शर्मा। राजस्थान सरकार ने प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों को गति देने और स्थानीय उद्यमियों को प्रोत्साहन देने की दिशा में बड़ा निर्णय लिया है। सरकार ने राज्य के सात नवगठित जिलों में जिला उद्योग एवं वाणिज्य केन्द्र खोलने के आदेश जारी किए हैं। इनमें से दो केन्द्र—ब्यावर और बालोतरा—पहले से उपकेन्द्र के रूप में कार्यरत थे, जिन्हें अब पूर्ण जिला उद्योग एवं वाणिज्य केन्द्र का दर्जा प्रदान किया गया है। वहीं डीग, डीडवाना-कुचामन, कोटपुतली-बहरोड़, खैरथल-तिजारा और सलूंबर जैसे नए जिलों में नवीन जिला उद्योग एवं वाणिज्य केन्द्र की स्थापना की जाएगी। यह कदम राज्य में औद्योगिक निवेश, रोजगार सृजन और लघु उद्योगों के विकास को नई दिशा देगा।
ब्यावर और बालोतरा को मिला क्रमोन्नति का दर्जा
ब्यावर और बालोतरा दोनों ही जिले औद्योगिक दृष्टि से पहले से सक्रिय माने जाते हैं। ब्यावर में सीमेंट, टेक्सटाइल और मिनरल आधारित उद्योग बड़ी संख्या में संचालित हैं, जबकि बालोतरा वस्त्र प्रसंस्करण उद्योग का प्रमुख केंद्र है। अब इन दोनों स्थानों पर उपकेन्द्रों को क्रमोन्नत कर पूर्ण जिला उद्योग एवं वाणिज्य केन्द्र बनाया गया है। इससे न केवल उद्योगों को सरकारी योजनाओं तक सीधी पहुंच मिलेगी, बल्कि स्थानीय उद्यमियों को लोन, सब्सिडी, प्रशिक्षण और पंजीयन जैसी सेवाओं के लिए अन्य जिलों की निर्भरता नहीं रहेगी।
नवगठित जिलों में होंगे नए केन्द्र
राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि नवगठित जिलों—डीग, डीडवाना-कुचामन, कोटपुतली-बहरोड़, खैरथल-तिजारा और सलूंबर—में पूर्ण रूप से नए जिला उद्योग एवं वाणिज्य केन्द्र स्थापित किए जाएंगे। इन केन्द्रों का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर लघु, कुटीर, हस्तशिल्प, कृषि-आधारित और सेवा उद्योगों को बढ़ावा देना है। उद्योग विभाग के अनुसार, ये केन्द्र स्थानीय युवाओं के रोजगार प्रशिक्षण, उद्योग पंजीकरण, निवेश परामर्श और परियोजना मार्गदर्शन जैसे कार्यों को भी संभालेंगे।
कुल 14 पदों का सृजन, पदों का विस्तृत विवरण
नवगठित जिलों के जिला उद्योग एवं वाणिज्य केन्द्रों के संचालन के लिए सरकार ने 14 नए पद सृजित किए हैं। ये पद इस प्रकार हैं—
उपायुक्त – 1 पद
सहायक लेखाधिकारी द्वितीय – 1 पद
उद्योग प्रसार अधिकारी – 2 पद
निजी सहायक ग्रेड द्वितीय – 1 पद
सूचना सहायक – 1 पद
वरिष्ठ सहायक – 2 पद
कनिष्ठ सहायक – 3 पद
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी – 3 पद
इन पदों के माध्यम से नए केन्द्रों में प्रशासनिक कार्यों की सुचारु रूप से व्यवस्था की जाएगी और स्थानीय स्तर पर औद्योगिक नीतियों के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।
भवन निर्माण और कार्यालय व्यवस्था के निर्देश
उद्योग विभाग ने सभी नए जिलों के जिला उद्योग एवं वाणिज्य केन्द्रों के महाप्रबंधक या विशेषाधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि वे नए भवन के निर्माण या किसी उपलब्ध भवन के उपयोग को लेकर प्रस्ताव तैयार कर शीघ्र भेजें। ब्यावर में पहले से संचालित उपकेन्द्र का भवन कार्यरत है, जहां फिलहाल अन्य सरकारी कार्यालय भी चल रहे हैं। जैसे ही ब्यावर जिला उद्योग केन्द्र का संचालन पूर्ण रूप से शुरू होगा, इन कार्यालयों को अन्य स्थानों पर स्थानांतरित किया जाएगा। वर्तमान में उपखंड कार्यालय के लिए एक अतिरिक्त कक्ष का निर्माण भी किया जा रहा है, ताकि स्थानांतरण की प्रक्रिया सुचारु रूप से हो सके।
ब्यावर जिला उद्योग केन्द्र के अधीन आने वाले उपखंड
नए आदेश के तहत जिला उद्योग एवं वाणिज्य केन्द्र ब्यावर के अधीन निम्न उपखंड और तहसीलें शामिल की गई हैं—
उपखंड: ब्यावर, टॉडगढ़, जैतारण, रायपुर, मसूदा और ब्यावर उपखंड।
तहसीलें: ब्यावर, टॉडगढ़, जैतारण, रायपुर, मसूदा, बिजयनगर और बदनोर।
इन क्षेत्रों के सभी औद्योगिक कार्य—लाइसेंसिंग, उद्योग पंजीकरण, परियोजना स्वीकृति, और ऋण योजना—अब ब्यावर केन्द्र से ही संचालित होंगे। इससे क्षेत्र के उद्यमियों को समय और खर्च दोनों की बचत होगी।
स्थानीय उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा
ब्यावर और बालोतरा क्षेत्र पहले से ही माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइज (MSME) के प्रमुख केंद्र माने जाते हैं। ब्यावर में सीमेंट, खनन और मिनरल प्रोसेसिंग उद्योग, जबकि बालोतरा में वस्त्र प्रसंस्करण उद्योग राज्य की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देते हैं। अब जिला उद्योग केन्द्र खुलने से इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ने की संभावना है। इसके साथ ही डीग और डीडवाना-कुचामन जैसे जिलों में कृषि-आधारित उद्योग, खैरथल-तिजारा में ऑटो कंपोनेंट और निर्माण सामग्री उद्योग, तथा सलूंबर में हस्तशिल्प और वन उत्पाद आधारित उद्योग को विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा।
उद्योग विभाग की पहल से स्थानीय रोजगार को बल
राज्य सरकार का मानना है कि इन केन्द्रों के माध्यम से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। केन्द्रों में न केवल उद्यम पंजीकरण होंगे बल्कि औद्योगिक नीति, प्रशिक्षण कार्यक्रम, ऋण योजनाएं और सरकारी अनुदान से संबंधित जानकारी भी दी जाएगी। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2026 तक इन सभी केन्द्रों के माध्यम से कम से कम 50 हजार नए रोजगार अवसर सृजित किए जाएं और ग्रामीण स्तर पर उद्यमिता को बढ़ावा मिले।


