शोभना शर्मा, अजमेर। राजस्थान का अजमेर और पुष्कर केवल तीर्थ या धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि यह राज्य की संस्कृति, कला, और स्थापत्य विरासत का अनमोल प्रतीक हैं। अरावली की गोद में बसे ये दोनों शहर हर साल लाखों देशी-विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। यहां न केवल आस्था का संगम है, बल्कि इतिहास और सौंदर्य का अद्भुत मेल भी देखने को मिलता है। नीचे हम अजमेर और पुष्कर के आसपास स्थित उन 10 प्रमुख पर्यटन स्थलों का विस्तृत परिचय दे रहे हैं, जिनका दर्शन राजस्थान यात्रा को अविस्मरणीय बना देता है।
1. अजमेर शरीफ दरगाह — आस्था और एकता का प्रतीक
अजमेर का सबसे प्रमुख धार्मिक स्थल है ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह। यह स्थान हर धर्म के लोगों के लिए समान रूप से पूजनीय है। दरगाह की वास्तुकला मुगल और राजपूत दोनों शैलियों का सुंदर मिश्रण है। यहां की चादर चढ़ाने की परंपरा और कव्वालियों की स्वर-लहरियां वातावरण को आध्यात्मिक बना देती हैं। अजमेर की यात्रा दरगाह शरीफ के बिना अधूरी मानी जाती है।
2. आना सागर झील — अजमेर का शांत और सुरम्य स्थल
अजमेर के मध्य में स्थित आना सागर झील एक कृत्रिम झील है, जिसे 12वीं सदी में अनाजी चौहान ने बनवाया था। यह झील अपने शांत वातावरण और मनमोहक दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है। यहां बोटिंग, पिकनिक और सैर-सपाटा करने का अनुभव पर्यटकों को बेहद प्रिय लगता है। झील के पास ही दौलत बाग और खूबसरत बगीचे इसकी सुंदरता में चार चांद लगा देते हैं।
3. ढाई दिन का झोपड़ा — इतिहास का जिंदा उदाहरण
अजमेर में स्थित ढाई दिन का झोपड़ा केवल स्थापत्य कला का नमूना नहीं, बल्कि इतिहास का जीता-जागता अध्याय है। इसका निर्माण कुतुबुद्दीन ऐबक ने मात्र ढाई दिन में करवाया था। यहां की दीवारों पर की गई नक्काशी हिंदू, जैन और इस्लामी कलाओं का अद्भुत संगम दर्शाती है। यह स्मारक अजमेर के गौरवशाली अतीत की झलक पेश करता है।
4. पुष्कर झील — आस्था का केंद्र
अरावली पर्वतों के बीच स्थित पुष्कर झील हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र स्थल है। मान्यता है कि भगवान ब्रह्मा के कमल से यहां झील का निर्माण हुआ था। यहां के 52 घाट और 400 से अधिक मंदिर इसे आध्यात्मिकता का केंद्र बनाते हैं। देवउठनी एकादशी और कार्तिक पूर्णिमा पर यहां हजारों श्रद्धालु स्नान और पूजा के लिए एकत्रित होते हैं।
5. ब्रह्मा मंदिर — सृष्टि के रचयिता का एकमात्र मंदिर
पुष्कर झील के समीप स्थित यह ब्रह्मा मंदिर भगवान ब्रह्मा को समर्पित विश्व का सबसे प्रमुख मंदिर है। कहा जाता है कि ब्रह्मा जी ने यहीं यज्ञ कर सृष्टि की रचना की थी। मंदिर में संगमरमर से बनी चारमुखी मूर्ति और ऊंचा गोपुरम अत्यंत मनोहारी है। कार्तिक मास में यहां विशेष पूजा-अर्चना होती है, जिसमें देश-विदेश से भक्त आते हैं।
6. पुष्कर ऊंट मेला — परंपरा, व्यापार और संस्कृति का संगम
हर साल कार्तिक पूर्णिमा पर आयोजित होने वाला पुष्कर ऊंट मेला दुनिया के सबसे बड़े पशु मेलों में से एक है। इस मेले में ऊंट, घोड़े और अन्य पशुओं की खरीद-बिक्री के साथ लोकनृत्य, संगीत प्रतियोगिताएं, मटका फोड़ और सबसे लंबी मूंछ जैसी प्रतियोगिताएं होती हैं। यह मेला राजस्थान की लोकसंस्कृति का जीवंत प्रदर्शन है।
7. तारागढ़ किला — अरावली की ऊंचाइयों पर बसा गौरवशाली किला
तारागढ़ किला एशिया के सबसे पुराने पहाड़ी किलों में से एक माना जाता है। यह अजमेर शहर के ऊपर अरावली पहाड़ियों पर स्थित है। यहां से पूरे अजमेर शहर का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। किले में बने सुरंगों और बारादरी का रहस्य पर्यटकों को रोमांचित करता है।
8. सावित्री मंदिर — आध्यात्मिकता और साहस का प्रतीक
भगवान ब्रह्मा की पत्नी देवी सावित्री को समर्पित यह मंदिर पुष्कर की रत्नागिरी पहाड़ी पर स्थित है। मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग 970 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। ट्रेकिंग के शौकीन पर्यटक इस मार्ग का आनंद लेते हैं। ऊपर से पुष्कर झील और शहर का दृश्य अत्यंत मनमोहक दिखता है।
9. अकबरी किला और संग्रहालय — मुगल कला का अद्भुत नमूना
यह किला अजमेर का एक प्रमुख ऐतिहासिक स्थल है, जिसे सम्राट अकबर ने बनवाया था। किले के भीतर बना संग्रहालय राजस्थान की कला और संस्कृति का जीवंत परिचय देता है। यहां हथियार, शाही फरमान, सिक्के, मूर्तियां और शिलालेख प्रदर्शित हैं। यह जगह इतिहास प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण रखती है।
10. वराह मंदिर — भगवान विष्णु के अवतार का पूजनीय स्थल
यह मंदिर भगवान विष्णु के वराह अवतार को समर्पित है। संगमरमर से बनी भगवान वराह की विशाल मूर्ति यहां का प्रमुख आकर्षण है। मंदिर की दीवारों पर की गई कलात्मक नक्काशी राजस्थान की प्राचीन मूर्तिकला का सुंदर उदाहरण है। आसपास फैले बगीचे और पुष्प इस स्थान को और भी पवित्र बनाते हैं।
अजमेर और पुष्कर न केवल धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि यह राजस्थान पर्यटन का हृदय भी हैं। चाहे वह अजमेर शरीफ दरगाह की आध्यात्मिक अनुभूति हो, पुष्कर झील की शांति, या ऊंट मेले का रंगीन उत्सव—हर स्थान अपनी कहानी कहता है। राजस्थान की संस्कृति, स्थापत्य और अध्यात्म का अनुभव करने के लिए अजमेर-पुष्कर की यात्रा हर यात्री के लिए अवश्य करनी चाहिए।


