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नवंबर 2025 एकादशी व्रत पूर्ण सूची: देवउठनी और उत्पन्ना एकादशी की तिथि, पूजा विधि और पारण मुहूर्त जानें

नवंबर 2025 एकादशी व्रत पूर्ण सूची: देवउठनी और उत्पन्ना एकादशी की तिथि, पूजा विधि और पारण मुहूर्त जानें

शोभना शर्मा। हिंदू धर्म में भगवान श्री हरि विष्णु को जगत का पालनहार कहा गया है। मान्यता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमपूर्वक एकादशी व्रत का पालन करता है, उसके सभी दुख-दरिद्रता का नाश होता है और जीवन में सुख, शांति एवं सौभाग्य का आगमन होता है। एकादशी व्रत हर माह के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। इस प्रकार एक वर्ष में 24 एकादशियां होती हैं और अधिमास में यह संख्या 26 तक पहुंच जाती है। नवंबर 2025 में दो प्रमुख एकादशी व्रत पड़ने जा रहे हैं — देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी और उत्पन्ना एकादशी। आइए जानते हैं इन दोनों व्रतों की तिथि, पूजा विधि और पारण मुहूर्त विस्तार से।

पहला एकादशी व्रत — देवउठनी एकादशी (प्रबोधिनी एकादशी)

तिथि: 1 और 2 नवंबर 2025
मास: कार्तिक शुक्ल पक्ष
विशेषता: इस एकादशी को “देवप्रबोधिनी एकादशी” या “देवउठनी एकादशी” कहा जाता है। यह दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु के शयन काल समाप्त होने और उनके पुनः जागृत होने का प्रतीक माना जाता है।

देवउठनी एकादशी का महत्व

पुराणों के अनुसार, भगवान विष्णु आषाढ़ शुक्ल एकादशी (देवशयनी एकादशी) के दिन क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और चार माह बाद कार्तिक शुक्ल एकादशी को जागते हैं। इस दिन से ही विवाह, मांगलिक कार्य, गृहप्रवेश आदि शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। इसलिए यह एकादशी चार महीनों की चातुर्मास अवधि की समाप्ति और शुभ कार्यों की पुनः शुरुआत का प्रतीक है।

व्रत तिथि और समय (स्मार्त एवं वैष्णव भेद)

काशी के पंडित विनय कुमार पांडेय के अनुसार, कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि
1 नवंबर 2025 को सुबह 09:11 बजे से शुरू होकर 2 नवंबर 2025 की सुबह 07:31 बजे तक रहेगी।

  • स्मार्त परंपरा (गृहस्थों के लिए):
    व्रत 1 नवंबर 2025 को रखा जाएगा।
    पारण का शुभ मुहूर्त 2 नवंबर 2025 को दोपहर 12:55 बजे से 03:11 बजे के बीच रहेगा।

  • वैष्णव परंपरा (इस्कॉन आदि अनुयायियों के लिए):
    उदया तिथि की मान्यता के अनुसार, व्रत 2 नवंबर 2025 को रखा जाएगा।
    पारण का समय 3 नवंबर 2025 की सुबह 06:07 से 08:23 बजे के बीच होगा।

इस प्रकार श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार व्रत तिथि का चयन कर सकते हैं।

पूजा विधि और व्रत नियम

देवउठनी एकादशी के दिन प्रातः स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा पीले पुष्प, तुलसी दल, धूप, दीप और नैवेद्य से करनी चाहिए। विशेष रूप से तुलसी विवाह का आयोजन भी इसी दिन होता है। इस दिन तुलसी जी और शालिग्राम (भगवान विष्णु) का विवाह करने की परंपरा है, जो चातुर्मास के समापन का प्रतीक माना जाता है। पूजा के बाद भक्त “ओम नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप कर सकते हैं और व्रत कथा का श्रवण करना चाहिए। व्रत के दौरान एक समय फलाहार या निर्जला उपवास रखने की परंपरा है।

देवउठनी एकादशी की कथा

एक प्रचलित कथा के अनुसार, जब भगवान विष्णु योगनिद्रा में थे, तब राक्षसों का आतंक बढ़ गया। ब्रह्मा जी ने देवी योगमाया से आग्रह किया कि वे भगवान विष्णु को जगाएं ताकि संसार की रक्षा हो सके। देवी ने भगवान विष्णु को जगाया और उस दिन से देवताओं का पुनः शासन प्रारंभ हुआ। इस दिन से ही धरती पर शुभता लौट आई। इसलिए इसे “देवउठनी” कहा गया।

दूसरा एकादशी व्रत — उत्पन्ना एकादशी

तिथि: 15 नवंबर 2025 (मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष)
पारण मुहूर्त: 16 नवंबर 2025 दोपहर 01:10 से 03:18 बजे तक

उत्पन्ना एकादशी का महत्व

उत्पन्ना एकादशी को पाप विनाशिनी एकादशी भी कहा जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु ने असुर मुर दैत्य का वध किया था। इसलिए यह तिथि धर्म, विजय और निष्ठा का प्रतीक मानी जाती है। जो भक्त इस दिन व्रत रखते हैं, उन्हें सभी प्रकार के भय, रोग और पापों से मुक्ति मिलती है।

उत्पन्ना एकादशी की तिथि और समय

पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 15 नवंबर 2025 को पूर्वाह्न 00:49 बजे से प्रारंभ होकर 16 नवंबर 2025 को पूर्वाह्न 02:37 बजे तक रहेगी। इसलिए व्रत 15 नवंबर को रखा जाएगा और पारण 16 नवंबर को किया जाएगा।

पूजा विधि और उपवास नियम

व्रती व्यक्ति को प्रातःकाल स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। भगवान को तुलसी पत्ती, चंदन, धूप, दीप और फल अर्पित करें। “ओम नमो नारायणाय” मंत्र का जाप करें और श्रीविष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। पूरे दिन मन, वचन और कर्म से संयम रखें तथा रात्रि में भजन-कीर्तन कर भगवान का ध्यान करें। पारण अगले दिन शुभ मुहूर्त में फल या जल से करना चाहिए।

एकादशी व्रत से मिलने वाले पुण्य फल

पुराणों के अनुसार, जो व्यक्ति श्रद्धापूर्वक एकादशी व्रत करता है, उसे हजारों अश्वमेध और सैकड़ों राजसूय यज्ञों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। यह व्रत व्यक्ति के जीवन से नकारात्मकता, आलस्य और दुर्भाग्य को दूर करता है। साथ ही यह मन को स्थिर और आत्मा को शुद्ध करने का श्रेष्ठ साधन माना गया है।

नवंबर 2025 का महीना विष्णु भक्तों के लिए अत्यंत शुभ रहेगा क्योंकि इसमें दो महत्वपूर्ण एकादशी व्रत पड़ रहे हैं — देवउठनी एकादशी और उत्पन्ना एकादशी। जहां देवउठनी एकादशी के साथ शुभ कार्यों की शुरुआत होती है, वहीं उत्पन्ना एकादशी पापों के नाश और आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक है। दोनों व्रतों के पालन से भक्तों को भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, सौभाग्य तथा समृद्धि का वास होता है।

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