मनीषा शर्मा। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सुप्रीम कोर्ट को शुक्रवार को बताया कि आयोग ने सिद्धांत रूप में यह निर्णय लिया है कि दृष्टिबाधित (नेत्रहीन या कम दृष्टि वाले) उम्मीदवारों के लिए अपनी परीक्षाओं में स्क्रीन रीडर सॉफ्टवेयर (Screen Reader Software) लागू करेगा। आयोग ने कहा कि जैसे ही परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षित परीक्षा आयोजन के लिए आवश्यक तकनीकी ढांचा, सॉफ्टवेयर और परीक्षण सुविधाएं उपलब्ध हो जाएंगी, इस व्यवस्था को लागू किया जाएगा। यह कदम UPSC परीक्षाओं में दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों के लिए एक ऐतिहासिक सुधार माना जा रहा है, जो लंबे समय से इस तरह की सुविधाओं की मांग कर रहे थे।
सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में दी गई जानकारी
UPSC ने यह जानकारी सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने अतिरिक्त हलफनामे (Additional Affidavit) के माध्यम से दी। यह हलफनामा उस याचिका के जवाब में दाखिल किया गया था जिसमें आरोप लगाया गया था कि सिविल सेवा परीक्षा (Civil Services Examination) में दृष्टिबाधित उम्मीदवारों को उचित अवसर नहीं मिल रहा है और उन्हें तकनीकी सहायता से वंचित रखा जा रहा है। हलफनामे में UPSC ने कहा, “आयोग ने इस पूरे मामले की गहन समीक्षा की है और सिद्धांत रूप में यह निर्णय लिया गया है कि दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों के लिए स्क्रीन रीडर सॉफ्टवेयर की सुविधा शुरू की जाएगी। हालांकि वर्तमान में इसके लिए आवश्यक इन्फ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध नहीं है।”
‘मिशन एक्सेसिबिलिटी’ संस्था की याचिका से जुड़ा मामला
यह मामला ‘मिशन एक्सेसिबिलिटी (Mission Accessibility)’ नामक संस्था द्वारा दायर याचिका से संबंधित है। संस्था की ओर से अधिवक्ता संचित आइन (Advocate Sanchit Aine) ने सुप्रीम कोर्ट में पैरवी की। संस्था ने अपनी याचिका में कहा था कि दृष्टिबाधित और कम दृष्टि वाले उम्मीदवारों को सिविल सेवा परीक्षा में समान अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि UPSC को ऐसी तकनीकी व्यवस्था (Technology Infrastructure) करनी चाहिए जिससे ये उम्मीदवार डिजिटल प्रश्नपत्र (Digital Question Papers) को स्क्रीन रीडर सॉफ्टवेयर की मदद से पढ़ सकें।
याचिकाकर्ता ने मांग की – अगले परीक्षा सत्र से पहले लागू हो व्यवस्था
याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट से यह अनुरोध किया गया कि UPSC को यह सुविधा समयबद्ध तरीके (Time-bound manner) में लागू करने का निर्देश दिया जाए ताकि यह अगले परीक्षा सत्र (Next Exam Cycle) से पहले उपलब्ध हो सके। याचिकाकर्ता ने यह भी सुझाव दिया कि UPSC को प्रश्नपत्रों की सुगम्यता (Accessibility), चार्ट और डायग्राम की डिजिटल रीडिंग, और क्षेत्रीय भाषाओं में स्क्रीन रीडिंग की क्षमता जैसे पहलुओं पर विशेषज्ञ संस्थाओं से परामर्श लेना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने UPSC से पूछा – कितना समय लगेगा लागू करने में
यह मामला जस्टिस विक्रम नाथ (Justice Vikram Nath) और जस्टिस संदीप मेहता (Justice Sandeep Mehta) की पीठ के समक्ष सुना गया। सुनवाई के दौरान बेंच ने UPSC से पूछा कि इस प्रणाली को लागू करने में कितना समय लगेगा। UPSC के वकील ने बताया कि आयोग अगले वर्ष की परीक्षा चक्र (Next Year’s Exam Cycle) से इस सुविधा को लागू करने की योजना बना रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने UPSC से कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि यह सुविधा सिर्फ कुछ केंद्रों तक सीमित न रहे, क्योंकि ऐसा होने पर दृष्टिबाधित उम्मीदवारों को दूरस्थ शहरों की यात्रा करनी पड़ेगी, जो अनुचित और असमान होगा।
UPSC के पास नहीं है खुद का परीक्षा ढांचा
UPSC ने अपने हलफनामे में बताया कि आयोग के पास स्वयं का परीक्षा ढांचा (Examination Infrastructure) नहीं है। वह पूरी तरह राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, स्कूलों और कॉलेजों के सहयोग पर निर्भर करता है। इस संदर्भ में UPSC ने 7 जुलाई 2025 को सभी समन्वयक अधिकारियों (जैसे जिला कलेक्टर, जिलाधिकारी, मंडल आयुक्त आदि) को पत्र लिखकर स्क्रीन रीडर सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इसके साथ ही सभी राज्यों के मुख्य सचिवों (Chief Secretaries) को भी पत्र भेजकर जिला प्रशासन से आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है।
राज्यों और संस्थानों के साथ हुई बैठकें और तैयारियां
UPSC ने बताया कि 22 से 25 जुलाई 2025 के बीच आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने परीक्षा आयोजन से जुड़े अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की थी।
इन बैठकों में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा हुई, जिनमें शामिल थे —
कंप्यूटर या लैपटॉप पर स्क्रीन रीडर सॉफ्टवेयर की उपलब्धता,
प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर दृष्टिबाधित उम्मीदवारों की संख्या,
सॉफ्टवेयर की खरीद और परीक्षण प्रक्रिया,
डिजिटल प्रश्नपत्रों का सुरक्षित ट्रांसमिशन (Secure Transmission),
और प्रत्येक शहर में कम से कम एक समर्पित केंद्र (Dedicated Centre) की व्यवस्था।
NIEPVD और DEPwD के साथ साझेदारी पर चर्चा
आयोग ने बताया कि उसने देहरादून स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर एम्पावरमेंट ऑफ पर्सन्स विद विजुअल डिसएबिलिटी (NIEPVD) को पत्र लिखकर उनके कंप्यूटर लैब और क्षेत्रीय केंद्रों (Regional Centres) का उपयोग परीक्षा आयोजन के लिए करने का अनुरोध किया है। इसके बाद 28 जुलाई को UPSC और NIEPVD के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच बैठक हुई, जिसमें स्क्रीन रीडर सॉफ्टवेयर के उपयोग और वस्तुनिष्ठ (Objective) व वर्णनात्मक (Subjective) प्रश्नपत्रों के प्रारूप को अनुकूल बनाने के तरीकों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके साथ ही UPSC ने दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (Department of Empowerment of Persons with Disabilities – DEPwD), नई दिल्ली को भी पत्र लिखकर अनुरोध किया कि वे NIEPVD और उसके नौ क्षेत्रीय केंद्रों को परीक्षा केंद्रों के रूप में विकसित करने की संभावना पर विचार करें।
DEPwD का जवाब और UPSC की प्रतिक्रिया
DEPwD ने UPSC को अपने जवाब में कहा कि वे NIEPVD केंद्रों को दृष्टिबाधित उम्मीदवारों के लिए समर्पित परीक्षा केंद्रों (Dedicated Examination Centres) के रूप में विकसित करने के इच्छुक हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सॉफ्टवेयर की आपूर्ति, परीक्षा संचालन प्रोटोकॉल, प्रश्नपत्रों का सुरक्षित प्रारूप और सॉफ्टवेयर सुरक्षा की जिम्मेदारी UPSC की होगी। UPSC ने अपने हलफनामे में कहा कि वह DEPwD द्वारा दिए गए सभी सुझावों पर सक्रिय रूप से विचार कर रहा है और इसके लिए तकनीकी परीक्षण (Technical Testing) एवं सुरक्षा मानक (Security Standards) तय किए जा रहे हैं।
नियम संशोधन की आवश्यकता नहीं – UPSC
UPSC ने यह भी स्पष्ट किया कि दृष्टिबाधित उम्मीदवारों के लिए स्क्रीन रीडर सॉफ्टवेयर लागू करने के लिए सिविल सेवा परीक्षा नियम 2025 (CSE Rules 2025) में किसी संशोधन की आवश्यकता नहीं है। आयोग ने कहा कि यह कदम प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर लागू किया जा सकता है।
दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए बड़ी पहल
UPSC का यह निर्णय दृष्टिबाधित और कम दृष्टि वाले अभ्यर्थियों के लिए समान अवसर (Equal Opportunity) सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यदि आयोग अपने वादे के अनुसार अगले परीक्षा चक्र से यह सुविधा लागू कर देता है, तो यह देश की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा को पूर्ण रूप से समावेशी (Inclusive) बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी।


