मनीषा शर्मा। राजस्थान में NEET UG (MBBS) एडमिशन प्रक्रिया के बीच एक बड़ा मामला उजागर हुआ है, जिसने मेडिकल शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार की ओर से तय की गई फीस संरचना के बावजूद 8 निजी मेडिकल कॉलेजों ने एनआरआई और मैनेजमेंट कोटे में प्रवेश लेने वाले छात्रों से निर्धारित सीमा से अधिक फीस वसूली। इस गंभीर लापरवाही के बाद सरकार ने सभी कॉलेजों को आदेश दिए हैं कि वे अतिरिक्त वसूली गई राशि को 12% ब्याज सहित लौटाएं और आगामी काउंसलिंग में केवल निर्धारित फीस ही वसूलें।
जयपुर में हुई अहम बैठक, कॉलेजों की मनमानी पर खिंची लगाम
मंगलवार को जयपुर स्थित एसएमएस मेडिकल कॉलेज में नीट यूजी काउंसलिंग बोर्ड और निजी कॉलेजों के प्रतिनिधियों की एक विशेष बैठक आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता मेडिकल एजुकेशन सचिव अंबरीश कुमार ने की, जो ऑनलाइन माध्यम से जुड़े थे।
बैठक में विभिन्न निजी मेडिकल कॉलेजों के प्रतिनिधियों ने अपने कॉलेजों की इंफ्रास्ट्रक्चर लागत और संचालन खर्च का हवाला देते हुए कहा कि वे एनआरआई और मैनेजमेंट कोटे की सीटों की फीस स्वयं निर्धारित करना चाहते हैं। कॉलेजों ने यह तर्क दिया कि सरकार द्वारा तय की गई फीस उनके आर्थिक ढांचे के अनुरूप नहीं है।
सरकार का स्पष्ट रुख: “फीस स्ट्रक्चर से कोई छेड़छाड़ नहीं”
काउंसलिंग बोर्ड और कमिश्नर ने कॉलेजों की इन दलीलों को सिरे से खारिज करते हुए दो टूक कहा कि राज्य सरकार द्वारा गठित कमेटी ने सभी मेडिकल कॉलेजों के लिए ट्यूशन फीस स्ट्रक्चर तय कर दिया है, जो बाध्यकारी है। कोई भी निजी कॉलेज (जो किसी प्राइवेट यूनिवर्सिटी के अधीन नहीं है) इस फीस स्ट्रक्चर से अलग जाकर अपनी मनमर्जी से फीस नहीं वसूल सकता। सरकार की समिति ने पहले ही स्पष्ट किया था कि एनआरआई और मैनेजमेंट कोटे की ट्यूशन फीस अधिकतम 18.90 लाख रुपये प्रति वर्ष निर्धारित की गई है। इसके बावजूद कई कॉलेजों ने इस सीमा से अधिक रकम वसूल की।
तीसरे राउंड की काउंसलिंग के दौरान खुला मामला
नीट यूजी की दो चरणों की काउंसलिंग पहले ही पूरी हो चुकी थी। जब तीसरे राउंड की प्रक्रिया शुरू की गई, तभी काउंसलिंग बोर्ड को छात्रों की शिकायतों के माध्यम से यह मामला पता चला। छात्रों ने बताया कि कुछ निजी कॉलेज उनसे सरकार द्वारा तय फीस से अधिक रकम जमा करवाने का दबाव बना रहे थे। इस खुलासे के बाद नीट यूजी काउंसलिंग बोर्ड ने तीसरे राउंड की काउंसलिंग को बीच में ही रोक दिया और जांच शुरू की। जांच के दौरान पाया गया कि राज्य के 8 निजी मेडिकल कॉलेजों ने एनआरआई और मैनेजमेंट कोटे के छात्रों से निर्धारित राशि से अधिक फीस वसूली है।
सरकार का आदेश: लौटानी होगी अतिरिक्त राशि ब्याज सहित
मेडिकल एजुकेशन विभाग ने इस मामले को गंभीर मानते हुए तुरंत कार्रवाई की है। सभी संबंधित कॉलेजों को आदेश दिए गए हैं कि वे छात्रों से वसूली गई अतिरिक्त राशि को 12% वार्षिक ब्याज सहित लौटाएं। इसके साथ ही, भविष्य की काउंसलिंग में किसी भी स्थिति में निर्धारित फीस से अधिक राशि नहीं ली जाएगी। अगर किसी कॉलेज द्वारा आगे भी ऐसा किया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसमें मान्यता रद्द करने तक के प्रावधान शामिल हैं।
मेडिकल शिक्षा सचिव ने दिया सख्त संदेश
मेडिकल एजुकेशन सचिव अंबरीश कुमार ने स्पष्ट कहा कि राज्य सरकार ने मेडिकल शिक्षा को पारदर्शी और छात्रों के हित में बनाए रखने के लिए कई सुधार किए हैं। उन्होंने कहा, “किसी भी संस्थान को फीस निर्धारण की स्वतंत्रता नहीं दी जा सकती, क्योंकि इससे छात्रों का आर्थिक शोषण होता है। सरकार की नीति स्पष्ट है — सभी कॉलेजों को तय ढांचे के अनुसार ही फीस लेनी होगी।” उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की निगरानी प्रणाली अब और सख्त होगी, ताकि भविष्य में कोई संस्थान इस तरह की गड़बड़ी न कर सके।
फीस निर्धारण पर सरकार की भूमिका
राजस्थान सरकार ने नीट यूजी और एमबीबीएस एडमिशन प्रक्रिया के तहत फीस निर्धारण के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित की थी। इस समिति ने प्रदेश के सभी प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की वित्तीय स्थिति, इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षक संख्या, और शिक्षा की गुणवत्ता का मूल्यांकन कर फीस तय की थी। इसके अनुसार एनआरआई और मैनेजमेंट कोटे की फीस का निर्धारण ₹18.90 लाख प्रति वर्ष किया गया। लेकिन कई कॉलेजों ने इस सीमा को पार करते हुए छात्रों से ₹25 लाख या उससे अधिक की रकम ली।
छात्रों को राहत और पारदर्शिता की उम्मीद
सरकार के इस निर्णय से छात्रों और अभिभावकों को बड़ी राहत मिली है। लंबे समय से निजी मेडिकल कॉलेजों की मनमानी के खिलाफ शिकायतें मिल रही थीं। अब उम्मीद है कि इस आदेश के बाद मेडिकल एडमिशन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और छात्रों के साथ आर्थिक शोषण नहीं होगा।
राजस्थान मेडिकल एजुकेशन विभाग ने यह भी घोषणा की है कि फीस वापसी प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक विशेष निगरानी सेल गठित की जाएगी, जो यह सुनिश्चित करेगा कि कॉलेज आदेश का पालन करें और छात्रों को उनका पैसा ब्याज सहित लौटाया जाए। राजस्थान सरकार का यह कदम मेडिकल शिक्षा में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने की दिशा में एक बड़ा फैसला माना जा रहा है। इस सख्त कार्रवाई से न केवल छात्रों को राहत मिलेगी, बल्कि भविष्य में निजी कॉलेजों की मनमानी पर भी अंकुश लगेगा।


