मनीषा शर्मा। भारती एयरटेल की नेटवर्क सर्विस देशभर के कई हिस्सों में पिछले 24 घंटे से ठप पड़ी हुई है। लाखों यूजर्स कॉल, इंटरनेट और डिजिटल पेमेंट सेवाओं में परेशानी का सामना कर रहे हैं। मोबाइल नेटवर्क में सिग्नल न आना, कॉल ड्रॉप होना और डेटा स्पीड न चलने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। कई यूजर्स को UPI ट्रांजैक्शन में भी दिक्कतें आ रही हैं।
नेटवर्क की समस्या 10 अक्टूबर की शाम 7 बजे से शुरू हुई और 11 अक्टूबर की शाम तक भी पूरी तरह बहाल नहीं हो सकी। यह स्थिति कंपनी के करोड़ों ग्राहकों को प्रभावित कर रही है। इस दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यूजर्स ने जमकर नाराजगी भी जाहिर की।
35% यूजर्स को ‘नो सिग्नल’ की समस्या
नेटवर्क और सर्विस स्टेटस मॉनिटर करने वाले प्लेटफॉर्म DownDetector के अनुसार 11 अक्टूबर शाम 6:30 बजे तक यूजर्स की सबसे अधिक शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें 57% लोगों ने मोबाइल इंटरनेट में समस्या की शिकायत की, 9% लोगों को मोबाइल कॉलिंग में परेशानी हुई जबकि 35% लोगों को ‘नो सिग्नल’ की समस्या रही। कई यूजर्स ने सोशल मीडिया पर लिखा कि नेटवर्क सिग्नल होते हुए भी इंटरनेट काम नहीं कर रहा है। एक यूजर ने बताया, “मैं मोबाइल टावर से कुछ ही मीटर की दूरी पर हूं, लेकिन एक ट्वीट (X पोस्ट) तक नहीं भेज पा रहा।” वहीं दूसरे यूजर ने बताया कि उन्होंने शुक्रवार को एयरटेल नेटवर्क को लेकर शिकायत की थी लेकिन जवाब शनिवार तड़के सुबह मिला।
दो महीने में दूसरी बार ठप हुई एयरटेल की सर्विस
एयरटेल की सर्विस दो महीने में दूसरी बार इस स्तर पर ठप हुई है। इससे पहले 18 अगस्त को भी कई यूजर्स ने मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट, कॉलिंग और वॉयस सर्विस में दिक्कतें बताई थीं। उस समय कंपनी ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा था कि “नेटवर्क आउटेज की समस्या को हल करने के लिए टीम सक्रिय रूप से काम कर रही है। असुविधा के लिए खेद है।” हालांकि, इस बार 24 घंटे बीत जाने के बाद भी कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक स्टेटमेंट जारी नहीं किया गया है। इस चुप्पी ने यूजर्स की नाराजगी को और बढ़ा दिया है। कई लोगों ने कंपनी के ग्राहक सेवा केंद्रों से भी संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन समाधान नहीं मिला।
एयरटेल का वित्तीय प्रदर्शन मजबूत
दिलचस्प बात यह है कि सर्विस में बाधा के बावजूद कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन हाल के महीनों में काफी अच्छा रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2025) में कंपनी को ₹7,422 करोड़ का शुद्ध मुनाफा हुआ। यह पिछले वर्ष की समान अवधि के ₹4,718 करोड़ के मुकाबले 57.31% की वृद्धि है। कंपनी का कुल रेवेन्यू 28.46% बढ़कर ₹49,463 करोड़ पर पहुंच गया है, जो कि बीते साल ₹38,506 करोड़ था। रेवेन्यू में यह उछाल मोबाइल सर्विस सेगमेंट और स्मार्टफोन ग्राहकों की बढ़ती संख्या के कारण आया है।
होम्स और डिजिटल टीवी सेगमेंट में मिश्रित प्रदर्शन
कंपनी के होम्स बिजनेस सेगमेंट में राजस्व में 25.7% की वृद्धि दर्ज की गई है। बीती तिमाही में एयरटेल ने 9,39,000 नए ग्राहकों को जोड़ा, जो फाइबर टू होम और फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस सेगमेंट में मजबूत मांग को दर्शाता है। दूसरी ओर, एयरटेल के बिजनेस सेगमेंट में 7.7% की गिरावट देखी गई जबकि डिजिटल टीवी सेगमेंट में सालाना आधार पर 1.8% की कमी आई है। इन आंकड़ों से कंपनी की ग्रोथ मोबाइल और होम इंटरनेट सेवाओं के सहारे टिके होने का संकेत मिल रहा है।
मोबाइल सर्विस से रेवेन्यू में 21.6% की बढ़ोतरी
कंपनी की मोबाइल सर्विस के राजस्व में 21.6% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसका प्रमुख कारण ARPU (एवरेज रेवेन्यू पर यूजर) में बढ़ोतरी और स्मार्टफोन ग्राहकों की संख्या में वृद्धि है। वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में ARPU ₹250 रहा जबकि पिछले वर्ष ₹211 था, यानी 18.4% की बढ़ोतरी हुई। स्मार्टफोन डेटा ग्राहकों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। तिमाही आधार पर 39 लाख और सालाना आधार पर 2.13 करोड़ नए ग्राहक जुड़े हैं। यह कुल मोबाइल यूजर बेस का 77% हिस्सा है। कंपनी के अनुसार प्रति ग्राहक डेटा की खपत में भी 21.6% की वृद्धि दर्ज की गई है, जो अब 26.9 जीबी प्रति माह है।
नेटवर्क डाउन का असर डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन सर्विसेज पर
नेटवर्क समस्या का असर केवल कॉलिंग और इंटरनेट तक सीमित नहीं है। UPI ट्रांजैक्शन, ऑनलाइन बैंकिंग और अन्य डिजिटल सेवाओं में भी यूजर्स को परेशानी हो रही है। कई यूजर्स ने बताया कि उन्हें पेमेंट करते समय ट्रांजैक्शन फेल होने की सूचनाएं मिल रही हैं। यह समस्या खासकर छोटे व्यापारियों और रोजमर्रा के डिजिटल ट्रांजैक्शन करने वाले उपभोक्ताओं को प्रभावित कर रही है। भारत में मोबाइल इंटरनेट और डिजिटल भुगतान की बढ़ती निर्भरता के बीच इस तरह के नेटवर्क फेलियर न केवल ग्राहकों बल्कि कई कारोबारी गतिविधियों को भी बाधित करते हैं।
एयरटेल की शुरुआत 1995 में हुई थी
भारती एयरटेल की स्थापना 1995 में सुनील भारती मित्तल ने की थी। इससे पहले भारत सरकार ने 1992 में पहली बार मोबाइल सेवा के लिए लाइसेंस जारी किए थे। मित्तल ने इस अवसर को समझते हुए फ्रेंच कंपनी विवेंडी के साथ साझेदारी की और दिल्ली व आसपास के इलाकों के लाइसेंस हासिल किए। इसके बाद एयरटेल ब्रांड के तहत सेल्युलर सेवाएं शुरू की गईं। आज एयरटेल देश की दूसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी है, जिसके लाखों यूजर्स मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाओं पर निर्भर हैं। ऐसे में लंबे समय तक नेटवर्क ठप रहना कंपनी की ब्रांड इमेज और ग्राहक अनुभव पर गहरा असर डाल सकता है।


