शोभना शर्मा। भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में विदेशी ईमेल सेवा Gmail को छोड़कर Zoho Mail पर स्विच करने की घोषणा की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में Twitter) पर लिखा — “Hello everyone, I have switched to Zoho Mail.” उनके इस पोस्ट के बाद से ही Zoho Mail इंटरनेट पर चर्चा का केंद्र बन गया है।
Zoho Mail, भारत की एक स्वदेशी तकनीकी कंपनी “Zoho Corporation” का उत्पाद है, जिसने हाल के वर्षों में वैश्विक स्तर पर भारतीय सॉफ्टवेयर की साख को मजबूत किया है।
Zoho Mail क्या है और क्यों हो रहा है लोकप्रिय
Zoho Mail एक सुरक्षित, विज्ञापन-मुक्त और डेटा प्राइवेसी केंद्रित ईमेल प्लेटफॉर्म है, जिसे खास तौर पर व्यावसायिक और सरकारी उपयोग के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें उपयोगकर्ता को Gmail या Outlook जैसी सभी सुविधाएं मिलती हैं, लेकिन अंतर यह है कि यह पूरी तरह भारत में विकसित और होस्टेड प्लेटफॉर्म है।
Zoho Mail की सबसे बड़ी खासियत है इसकी डेटा सुरक्षा और गोपनीयता नीति। कंपनी का कहना है कि उसके सर्वर भारत में हैं, जिससे किसी विदेशी कंपनी या सरकार को भारतीय डेटा तक पहुंच नहीं मिल सकती।
गुजरात सरकार ने अपनाई स्वदेशी पहल
अमित शाह के Zoho Mail अपनाने के कुछ ही दिनों बाद गुजरात सरकार ने भी एक ऐतिहासिक फैसला लिया। राज्य के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (Science & Technology Department) की ओर से एक सर्कुलर जारी कर सभी सरकारी विभागों, पब्लिक सेक्टर कंपनियों और निगमों को निर्देश दिया गया है कि वे विदेशी एप्लिकेशन की जगह अब Zoho Mail और Zoho Office Suite का प्रयोग करें।
इस फैसले के पीछे मुख्य उद्देश्य है — “विदेशी सॉफ्टवेयर पर निर्भरता घटाना और स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देना।” यह कदम न सिर्फ डिजिटल आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा परिवर्तन है, बल्कि यह भारत के डेटा स्वराज (Data Sovereignty) की दिशा में भी एक ठोस कदम माना जा रहा है।
माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और मेटा को चुनौती
Zoho कंपनी आज विश्व स्तर पर ऐसी टेक कंपनी के रूप में देखी जा रही है, जो Microsoft, Google और Meta जैसी दिग्गज कंपनियों को सीधी चुनौती दे रही है। कंपनी के पास 45 से अधिक सॉफ्टवेयर और टूल्स का विशाल सेट है — जिसमें Zoho Mail, Zoho CRM, Zoho Books, Zoho Projects और मैसेजिंग ऐप Arattai शामिल हैं। ये सभी ऐप्स भारतीय उपयोगकर्ताओं की जरूरतों और डेटा सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं।
Zoho Corporation के संस्थापक श्रीधर वेम्बू, चेन्नई से सुदूर एक गांव में रहते हुए इस वैश्विक कंपनी का संचालन करते हैं। वे ग्रामीण भारत से ही यह साबित कर रहे हैं कि भारत की तकनीक किसी से कम नहीं है।
‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में अहम कदम
गुजरात सरकार का Zoho Mail को अपनाना और अमित शाह का व्यक्तिगत रूप से इसका उपयोग शुरू करना, दोनों ही घटनाएं ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती हैं। इससे पहले तक अधिकांश सरकारी और निजी ईमेल संचार विदेशी कंपनियों जैसे Gmail या Microsoft Outlook पर निर्भर था। लेकिन अब Zoho जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए भारत के पास अपनी सुरक्षित और स्वदेशी ईमेल सेवा उपलब्ध है। इस कदम से न सिर्फ सरकारी डेटा भारत के भीतर सुरक्षित रहेगा, बल्कि देश की तकनीकी कंपनियों को भी नई ताकत मिलेगी।
Zoho के अन्य ऐप्स पर भी लोगों की नज़र
Zoho सिर्फ एक ईमेल प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं है। कंपनी ने Arattai नाम से एक भारतीय मैसेजिंग ऐप भी लॉन्च किया है, जो WhatsApp जैसी सेवाएं प्रदान करता है। इसमें यूजर्स वॉइस और वीडियो कॉल कर सकते हैं, फाइलें साझा कर सकते हैं और चैटिंग कर सकते हैं। हालांकि अभी इस ऐप में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन (E2EE) का फीचर उपलब्ध नहीं है, लेकिन कंपनी ने बताया है कि नवंबर 2025 तक यह सुरक्षा फीचर लॉन्च कर दिया जाएगा। इससे यूजर्स की बातचीत और भी सुरक्षित होगी।
भारत की टेक आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन रहा है Zoho
Zoho की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। कंपनी के पास दुनिया भर में लाखों यूजर्स हैं, जिनमें से बड़ी संख्या अब भारतीय सरकारी संस्थानों और कारोबारियों की है।
अमित शाह और गुजरात सरकार जैसे उच्च-स्तरीय संस्थानों द्वारा Zoho Mail अपनाना यह दर्शाता है कि अब भारत में भी स्वदेशी तकनीक पर भरोसा बढ़ रहा है। यह न सिर्फ डेटा प्रोटेक्शन की दिशा में अहम कदम है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि भारत तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है।
Zoho Mail का बढ़ता प्रभाव भारत की डिजिटल स्वतंत्रता और टेक आत्मनिर्भरता की कहानी को नई दिशा दे रहा है। अमित शाह और गुजरात सरकार जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों का इस प्लेटफॉर्म को अपनाना भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए गर्व की बात है।


