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मारिया मचाडो को मिला 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार

मारिया मचाडो को मिला 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार

मनीषा शर्मा।  María Corina Machado (मारिया मचाडो)को 2025 का Nobel Peace Prize प्रदान किया गया है। वेनेजुएला में लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा और तानाशाही से लोकतंत्र की ओर शांतिपूर्ण बदलाव लाने के लिए उनके 20 साल के संघर्ष को यह सम्मान दिया गया। नोबेल समिति ने मचाडो को “आयरन लेडी” बताते हुए कहा कि जब दुनिया के कई हिस्सों में लोकतंत्र पर खतरा बढ़ रहा है, तब उनके जैसे साहसी नेताओं की हिम्मत उम्मीद जगाती है।

समिति ने स्पष्ट कहा— “लोकतंत्र ही स्थायी शांति की आधारशिला है। जब सत्ता हिंसा और डर के जरिए जनता को दबाने लगती है, तो ऐसे साहसी लोगों को सम्मानित करना ज़रूरी हो जाता है।” मचाडो लंबे समय से वेनेजुएला में पारदर्शी चुनावों और नागरिक अधिकारों की आवाज उठाती रही हैं।

लोकतंत्र के लिए दो दशक लंबा संघर्ष

María Corina Machado ने Súmate नामक संगठन की स्थापना की, जो वेनेजुएला में लोकतांत्रिक संस्थाओं को मज़बूत करने के लिए काम करता है। उन्होंने देश में पारदर्शी और निष्पक्ष चुनावों की मांग उठाई और तानाशाही के खिलाफ आवाज बुलंद की। मचाडो ने विपक्ष को एकजुट किया और सैन्यकरण के खिलाफ लगातार खड़ी रहीं। उनकी सबसे चर्चित घटना 14 जनवरी 2012 को हुई जब उन्होंने तत्कालीन राष्ट्रपति Hugo Chávez का भाषण रोक दिया था। शावेज संसद में 9 घंटे 45 मिनट तक बोल रहे थे, तभी मचाडो ने उन्हें ‘चोर’ कहकर चुनौती दी और लोगों की जब्त संपत्तियों को लौटाने की मांग की। इस घटना ने उन्हें पूरे देश में एक साहसी विपक्षी नेता के रूप में स्थापित कर दिया।

ट्रम्प को नोबेल न मिलने पर अमेरिका का विरोध

Donald Trump भी लंबे समय से नोबेल शांति पुरस्कार के दावेदार माने जा रहे थे। लेकिन इस साल उन्हें यह सम्मान नहीं मिला। इसके बाद अमेरिकी सरकार ने नोबेल कमेटी पर पक्षपात का आरोप लगाया। व्हाइट हाउस के एक प्रवक्ता ने कहा कि कमेटी “शांति से ज़्यादा राजनीति को महत्व देती है।” नोबेल नामांकन प्रक्रिया 1 फरवरी से शुरू होकर 31 जनवरी तक चलती है। ट्रम्प ने 20 जनवरी 2025 को दोबारा राष्ट्रपति पद संभाला, और सिर्फ 11 दिन बाद नामांकन बंद हो गया। इतने कम समय में उनके पास कोई ठोस उपलब्धि नहीं थी, जिससे उनकी दावेदारी कमजोर पड़ गई।

ट्रम्प की दावेदारी क्यों कमजोर पड़ी

ट्रम्प के नामांकन को लेकर अमेरिका और कई अन्य देशों में उत्सुकता थी। पाकिस्तान, इजराइल, अमेरिका, आर्मेनिया, अजरबैजान, माल्टा, कंबोडिया और अर्जेंटीना सहित 8 देशों ने उनका नाम नोबेल के लिए आगे बढ़ाया था। हालांकि नोबेल समिति ने स्पष्ट किया कि नामांकन की अंतिम तारीख 31 जनवरी 2025 थी और इस तारीख के बाद आए नामांकनों पर विचार नहीं किया गया। इसलिए ट्रम्प की दावेदारी कमजोर रही। नोबेल समिति की सदस्य निना ग्रेगर ने कहा कि गाजा सीजफायर समझौते का इस साल के निर्णय पर कोई असर नहीं होगा, लेकिन अगर शांति कायम रही तो 2026 में ट्रम्प की दावेदारी मजबूत हो सकती है।

यहूदी संगठनों ने की ट्रम्प के समर्थन की मांग

Republican Jewish Coalition (RJC) ने मांग की है कि नोबेल शांति पुरस्कार ट्रम्प को दिया जाए और इस पुरस्कार का नाम ही उनके नाम पर रखा जाए। RJC ने गाजा में बंधकों को छुड़ाने के लिए ट्रम्प के प्रयासों की सराहना की। इसी बीच Benjamin Netanyahu ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि ट्रम्प नोबेल के योग्य उम्मीदवार हैं। माल्टा के विदेश मंत्री इयान बोर्ग ने भी सार्वजनिक रूप से ट्रम्प के लिए समर्थन जताया।

मचाडो को मिले कई अंतरराष्ट्रीय सम्मान

María Corina Machado को लोकतंत्र और मानवाधिकारों के लिए पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं।

  • 2025 — नोबेल शांति पुरस्कार: लोकतंत्र के लिए लंबे संघर्ष को मान्यता।

  • 2024Sakharov Prize (यूरोपीय संसद) एडमुंडो गोंजालेज के साथ।

  • 2024Václav Havel Human Rights Prize (काउंसिल ऑफ यूरोप)।

  • 2025 — करेज अवॉर्ड (Geneva Summit for Human Rights and Democracy)।

  • 2018BBC द्वारा 100 सबसे प्रभावशाली महिलाओं में शामिल।

2024 में मचाडो राष्ट्रपति चुनाव की विपक्षी उम्मीदवार थीं, लेकिन वेनेजुएला सरकार ने उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी। इसके बाद उन्होंने एडमंडो गोंजालेज का समर्थन किया, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी समर्थन मिला।

लोकतंत्र की जीत लेकिन सत्ता पर कब्जा बरकरार

वेनेजुएला में विपक्ष को भारी जनसमर्थन और चुनाव में बढ़त मिली थी, लेकिन Nicolás Maduro सरकार ने परिणामों को मान्यता नहीं दी और सत्ता पर कब्जा बनाए रखा। मचाडो ने इस स्थिति में भी देश नहीं छोड़ा और भूमिगत रहते हुए आंदोलन जारी रखा। इससे लाखों लोगों को लोकतंत्र की लड़ाई के लिए प्रेरणा मिली।

नोबेल समिति ने कहा: “हम बहादुरों को सम्मानित करते हैं”

Norwegian Nobel Committee ने कहा कि उन्होंने हमेशा उन बहादुर लोगों को सम्मानित किया है जिन्होंने तानाशाही के खिलाफ आवाज उठाई और शांति व स्वतंत्रता की उम्मीद जिंदा रखी। समिति ने मचाडो को लोकतंत्र के लिए संघर्ष और जनता को प्रेरित करने के लिए सम्मानित किया।

समिति ने यह भी कहा कि मचाडो ने नोबेल पुरस्कार के तीनों मापदंड पूरे किए —

  1. विपक्ष को एकजुट किया

  2. सैन्यकरण के खिलाफ मजबूती से खड़ी रहीं

  3. लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा की।

मचाडो को कहा जाता है ‘आयरन लेडी’

वेनेजुएला में मचाडो को ‘आयरन लेडी’ के नाम से जाना जाता है। उन्होंने देश के हर कोने में लोगों को एकजुट कर तानाशाही के खिलाफ मजबूत मोर्चा बनाया। 2024 में राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी छिन जाने के बावजूद उन्होंने पीछे हटने से इनकार किया और लोकतंत्र की लड़ाई को और तेज कर दिया।

अन्य नोबेल नामांकितों में इमरान खान और एलन मस्क भी

इस साल नोबेल शांति पुरस्कार के लिए कई चर्चित नामों पर चर्चा रही। इनमें Imran Khan को पाकिस्तान वर्ल्ड अलायंस ने मानवाधिकार और लोकतंत्र के लिए नॉमिनेट किया था। खान अगस्त 2023 से जेल में बंद हैं और भ्रष्टाचार के मामले में 14 साल की सजा काट रहे हैं। वहीं Elon Musk को European Parliament के सांसद Branko Grims ने अभिव्यक्ति की आजादी के लिए नॉमिनेट किया। हालांकि मस्क ने कहा था कि उन्हें किसी पुरस्कार की इच्छा नहीं है।

गांधी पांच बार रहे नोबेल के दावेदार

नोबेल शांति पुरस्कार 1901 से 2024 तक 141 बार दिया जा चुका है, जिसमें 111 व्यक्तियों और 30 संगठनों को यह सम्मान मिला। Mahatma Gandhi को 1937 से 1948 तक पांच बार नोबेल के लिए नॉमिनेट किया गया, लेकिन हर बार वे पुरस्कार से चूक गए। 1948 में वे सबसे बड़े दावेदार थे, लेकिन उनकी हत्या नॉमिनेशन क्लोज होने से एक दिन पहले हो गई थी। उस वर्ष नोबेल कमेटी ने किसी को भी शांति पुरस्कार नहीं दिया।

लोकतंत्र के लिए साहस और संघर्ष की मिसाल

2025 का नोबेल शांति पुरस्कार María Corina Machado को देकर नोबेल समिति ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि शांति और लोकतंत्र की रक्षा के लिए आवाज उठाने वाले नेताओं को दुनिया हमेशा याद रखेगी। मचाडो ने न केवल अपने देश में लोकतंत्र की लड़ाई को आगे बढ़ाया, बल्कि पूरी दुनिया में उन लाखों लोगों को प्रेरित किया जो तानाशाही के खिलाफ खड़े हैं।

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