मनीषा शर्मा। जयपुर नगर निगम ग्रेटर की कार्यकारी समिति की बैठक में गुरुवार को एक अप्रत्याशित घटनाक्रम देखने को मिला। बैठक शुरू होने से ठीक पहले मेयर सौम्या गुर्जर ने इसे बिना पूर्व सूचना के स्थगित कर दिया। बताया जा रहा है कि हिन्दू शरणार्थी सेवा समिति के प्रस्ताव को एजेंडा में शामिल न किए जाने से नाराज होकर यह कदम उठाया गया। इस दौरान समिति के सदस्य करीब डेढ़ घंटे तक बैठक कक्ष में मेयर का इंतजार करते रहे। इस बैठक में नगर निगम की सफाई, विकास और शहरी प्रबंधन से जुड़े कई अहम प्रस्ताव शामिल होने थे, लेकिन आखिरी समय में रद्दीकरण से अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों में नाराजगी का माहौल देखने को मिला।
हिन्दू शरणार्थी सेवा समिति के प्रस्ताव पर विवाद
जानकारी के अनुसार, हिन्दू शरणार्थी सेवा समिति की ओर से एक प्रस्ताव कार्यकारी समिति की बैठक में शामिल किया जाना था। इस समिति में मेयर के पति राजाराम गुर्जर महासचिव हैं। प्रस्ताव में हिन्दू शरणार्थियों को रहने के लिए नगर निगम के सामुदायिक केन्द्रों और पंचायत भवनों को एक साल के लिए नि:शुल्क उपलब्ध करवाने की मांग की गई थी। हालांकि नगर निगम ग्रेटर कमिश्नर ने इस प्रस्ताव को नियमों का हवाला देकर एजेंडा में शामिल करने से इंकार कर दिया। कमिश्नर का कहना था कि सामुदायिक केन्द्रों और पंचायत भवनों को संस्थाओं को नि:शुल्क एक वर्ष तक देने का कोई प्रावधान नहीं है। इस पर मेयर और कमिश्नर के बीच मतभेद उभरकर सामने आए।
बिना सूचना बैठक स्थगित, सदस्य डेढ़ घंटे तक इंतजार में
करीब एक सप्ताह पहले ही इस कार्यकारी समिति की बैठक का प्रस्ताव जारी कर दिया गया था। इसके बावजूद बैठक के दिन मेयर की ओर से किसी प्रकार की औपचारिक रद्दीकरण सूचना नहीं दी गई। समिति के सदस्य, जिसमें पार्षद, समितियों के चेयरमैन और अधिकारी शामिल थे, बैठक कक्ष में डेढ़ घंटे तक इंतजार करते रहे। इसके बाद अचानक सूचना आई कि बैठक स्थगित कर दी गई है। इस घटनाक्रम से उपस्थित सदस्यों में नाराजगी का माहौल बन गया और कई सदस्यों ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की अवहेलना बताया।
सफाई और विकास से जुड़े प्रस्ताव एजेंडा में नहीं
इस बैठक में नगर निगम के सफाई कार्यों, विकास योजनाओं और अन्य प्रशासनिक विषयों से जुड़ा कोई बड़ा प्रस्ताव मूल एजेंडा में शामिल नहीं था। केवल सड़कों और चौक-चौराहों के नामकरण तथा कर्मचारियों के स्थायीकरण से जुड़े प्रस्ताव ही इसमें रखे गए थे। कुछ अतिरिक्त प्रस्ताव भी लाए जाने थे, जिनमें हिन्दू शरणार्थी सेवा समिति का प्रस्ताव भी शामिल था। लेकिन कमिश्नर द्वारा इस प्रस्ताव को रोके जाने के बाद स्थिति विवादास्पद हो गई और बैठक शुरू होने से पहले ही रद्द कर दी गई।
मेयर सौम्या गुर्जर का बयान
बैठक रद्द होने के बाद मीडिया से बात करते हुए मेयर सौम्या गुर्जर ने कहा कि कुछ ऐसे प्रस्ताव एजेंडा में शामिल कर लिए गए थे, जिनकी कोई अनुशंसा नहीं की गई थी। जबकि कई ऐसे प्रस्ताव, जिन्हें चेयरमैन और पार्षद दो-दो साल से दे रहे थे, उन्हें शामिल नहीं किया गया। उन्होंने इसे एकतरफा निर्णय बताते हुए आपत्ति जताई। मेयर ने कहा कि नगर निगम में पारदर्शिता और सभी सदस्यों की सहभागिता के बिना इस तरह बैठक चलाना उचित नहीं है। उन्होंने संकेत दिए कि जल्द ही इस मुद्दे को लेकर उच्चस्तरीय चर्चा की जाएगी।
टोंक रोड नामकरण प्रस्ताव पर भी टकराव
बैठक में एक और मुद्दा उपमहापौर पुनीत कर्णावत ने उठाया। उन्होंने रामबाग सर्किल से नगर निगम सीमा तक की सड़क (टोंक रोड) का नाम पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत के नाम से करने के प्रस्ताव को क्रियान्वित न किए जाने पर आपत्ति जताई। यह प्रस्ताव पूर्व में कार्यकारी समिति की बैठक में पास हो चुका था, लेकिन क्रियान्वयन नहीं हुआ। उपमहापौर ने इस प्रस्ताव को अतिरिक्त एजेंडा में शामिल करने की मांग की थी, जिसे भी खारिज कर दिया गया। इस पर उपमहापौर ने निगम प्रशासन पर मनमानी का आरोप लगाया।
पार्षदों और अधिकारियों में असंतोष
बैठक रद्द होने और प्रस्तावों को लेकर उत्पन्न विवाद के बाद पार्षदों और अधिकारियों में असंतोष देखने को मिला। कई पार्षदों ने कहा कि विकास कार्यों से जुड़े मुद्दों को दरकिनार कर राजनीतिक प्रभाव वाले प्रस्तावों को प्राथमिकता दी जा रही है, जो नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
अगले कदम पर टिकी निगाहें
जयपुर नगर निगम ग्रेटर में इस तरह का विवाद कोई पहली बार नहीं हुआ है। पिछले कुछ महीनों में भी कार्यकारी समिति की बैठकों में कई बार प्रस्तावों को लेकर मतभेद सामने आ चुके हैं। अब देखना होगा कि निगम प्रशासन और मेयर कार्यालय इस विवाद को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाते हैं। इस घटनाक्रम ने यह भी साफ कर दिया है कि प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर नगर निगम में मतभेद गहराते जा रहे हैं, जो भविष्य में शहर के विकास कार्यों को प्रभावित कर सकते हैं।


