मनीषा शर्मा। एमबीएम इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय, जोधपुर (MBM Engineering University, Jodhpur) में एक बार फिर गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। विश्वविद्यालय प्रशासन की गलती के कारण बीई सेकंड सेमेस्टर की मार्कशीट में बड़ी गड़बड़ी हुई। 100 अंकों के पेपर में कुछ छात्रों को 116 और 120 तक अंक दे दिए गए। जैसे ही छात्रों ने परिणाम वेबसाइट पर देखा, वे हैरान रह गए। मामले के सामने आते ही विश्वविद्यालय प्रशासन में अफरा-तफरी मच गई। बिना किसी आधिकारिक सूचना या स्पष्टीकरण के प्रशासन ने वेबसाइट से परिणाम तुरंत हटा दिए। इस घटना ने विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तकनीकी उत्कृष्टता के दावे पर सवाल
एमबीएम विश्वविद्यालय राज्य का एक प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान माना जाता है, लेकिन इस तरह की प्राथमिक स्तर की गलती से इसकी साख पर धब्बा लगा है। तकनीकी क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए प्रसिद्ध इस संस्थान से ऐसी बुनियादी गलती की उम्मीद किसी ने नहीं की थी। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की गड़बड़ी केवल तकनीकी त्रुटि नहीं बल्कि विश्वविद्यालय की आंतरिक निगरानी व्यवस्था की पूरी विफलता का प्रमाण है। विश्वविद्यालय प्रशासन न केवल लापरवाह रहा, बल्कि उसने पारदर्शिता के मूल सिद्धांतों की भी अनदेखी की।
पहले भी सामने आ चुकी हैं गड़बड़ियां
छात्रों ने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब एमबीएम विश्वविद्यालय में इस तरह की लापरवाही हुई हो। इससे पहले भी परीक्षा परिणामों, अंक सुधार और डिग्री वितरण में गड़बड़ी के मामले सामने आ चुके हैं। सूत्रों के अनुसार, इस बार गलती ग्रेड शीट तैयार करने के दौरान हुई। इंटरनल और नॉन-इंटरनल अंकों को फीड करते समय अंकों में गड़बड़ी हो गई। न तो डाटा को दोबारा जांचा गया और न ही कोई सत्यापन प्रक्रिया अपनाई गई। बिना जांच के ही परिणाम वेबसाइट पर अपलोड कर दिए गए। इससे यह साफ होता है कि विश्वविद्यालय में परिणाम तैयार करने और जारी करने की प्रक्रिया में गंभीर खामियां हैं।
प्रशासन ने गलती मानने के बजाय मामले को दबाया
छात्रों ने आरोप लगाया है कि प्रशासन ने अपनी गलती स्वीकार करने के बजाय मामले को दबाने की कोशिश की। जैसे ही मामला सार्वजनिक हुआ, परिणाम वेबसाइट से हटा दिए गए। हालांकि, न तो कोई आधिकारिक नोटिस जारी किया गया और न ही छात्रों को यह बताया गया कि गलती कब तक सुधारी जाएगी। इससे छात्रों में भारी नाराजगी है। कई छात्रों का कहना है कि अब उन्हें सही मार्कशीट के लिए चक्कर लगाने पड़ेंगे, जबकि गलती विश्वविद्यालय की थी।
पारदर्शिता पर उठे सवाल
एमबीएम विश्वविद्यालय में हुई इस गड़बड़ी ने पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, किसी छोटे कॉलेज में नहीं, बल्कि राज्य स्तरीय इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय में इस स्तर की गलती होना बेहद चिंताजनक है। तकनीकी संस्थान होने के बावजूद इस प्रकार की गलती यह दर्शाती है कि संस्थान में परिणाम जारी करने की कोई मजबूत निगरानी व्यवस्था नहीं है। विशेषज्ञों ने कहा कि केवल तकनीकी त्रुटि का बहाना बनाकर विश्वविद्यालय जिम्मेदारी से नहीं बच सकता।
छात्रों ने आंदोलन की दी चेतावनी
इस घटना के बाद छात्रों में आक्रोश बढ़ गया है। छात्र संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की और परिणाम सुधार की समयसीमा स्पष्ट नहीं की, तो आंदोलन किया जाएगा। छात्र नेताओं ने कहा कि यह केवल एक तकनीकी गलती नहीं है, बल्कि विश्वविद्यालय की प्रणालीगत विफलता है। जब तक जिम्मेदार अधिकारी जवाबदेह नहीं होंगे, तब तक इस तरह की लापरवाही से छात्रों का भविष्य खतरे में रहेगा।
शिक्षाविदों की सख्त प्रतिक्रिया
शिक्षाविदों और शिक्षा विशेषज्ञों ने इस पूरे मामले पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि इस स्तर के संस्थान से इस तरह की चूक अक्षम्य है। उन्होंने मांग की है कि विश्वविद्यालय को जिम्मेदारी तय करनी चाहिए और दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में केवल माफी मांगना या परिणाम दोबारा जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रणाली को पारदर्शी और जवाबदेह बनाना जरूरी है।
विश्वविद्यालय की साख पर असर
एमबीएम विश्वविद्यालय का नाम राजस्थान में एक प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थान के रूप में लिया जाता है। लेकिन बार-बार सामने आने वाली इस तरह की गड़बड़ियों से उसकी साख पर असर पड़ रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में सटीकता और पारदर्शिता सबसे अहम मानी जाती है। एक छोटे से आंकड़ा फीडिंग की गलती छात्रों के पूरे करियर पर असर डाल सकती है। विशेषज्ञों ने चेताया है कि अगर अब भी सुधार नहीं हुआ तो संस्थान की विश्वसनीयता पर गंभीर खतरा हो सकता है।


