मनीषा शर्मा। वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) और गोविंद सिंह डोटासरा (Govind Singh Dotasra) की अचानक हुई मुलाकात ने बीकानेर (Bikaner) के नाल एयरपोर्ट पर गुरुवार दोपहर सियासी तापमान बढ़ा दिया। इस मुलाकात की खास बात यह रही कि डोटासरा ने पूर्व मुख्यमंत्री राजे के लिए करीब 20 मिनट तक इंतजार किया और उनके स्वागत के लिए रुके। दोनों नेताओं के बीच हल्की-फुल्की बातचीत भी हुई, जिसमें राजनीतिक चुटकुले और तंज भी शामिल रहे।
बीकानेर शहर कांग्रेस अध्यक्ष यशपाल गहलोत (Yashpal Gehlot) ने बताया कि राजे और डोटासरा दोनों ही कांग्रेस नेता रामेश्वर डूडी (Rameshwar Dudi) के निधन पर शोक जताने बीकानेर पहुंचे थे। डोटासरा प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर रंधावा(Sukhjinder Singh Randhawa) को नाल एयरपोर्ट तक छोड़ने आए थे। तभी उन्हें सूचना मिली कि वसुंधरा राजे भी एयरपोर्ट आ रही हैं, जिसके बाद उन्होंने वहां रुकने का फैसला किया।
डोटासरा बोले- “मैं तो जा रहा था, आपके आने की खबर लगी तो रुक गया”
जब वसुंधरा राजे एयरपोर्ट पर पहुंचीं तो डोटासरा ने उनका स्वागत किया। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “मैं तो जा रहा था, लेकिन आपके आने की सूचना मिली तो आपका स्वागत करने के लिए रुक गया।” इस पर वसुंधरा राजे ने धन्यवाद देते हुए उनका हाथ पकड़ा और जवाब दिया — “ये अच्छा किया।” यह संवाद वहां मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। मुलाकात भले ही कुछ ही मिनटों की रही, लेकिन इसने राजस्थान की राजनीति में नए सियासी संकेत छोड़ दिए।
टिकट राजनीति पर भी हुई हल्की बातचीत
यशपाल गहलोत के अनुसार, मुलाकात के दौरान टिकट को लेकर भी बातचीत हुई। डोटासरा ने कहा — “आपने खाजूवाला से विश्वनाथ को टिकट दिया तो गोविंद मेघवाल हमारे पास आ गए।” इस पर वसुंधरा राजे ने हंसते हुए जवाब दिया — “गोविंद के लिए अच्छा हो गया, कांग्रेस में आया तो कैबिनेट मंत्री बन गया। हमें विश्वनाथ मिल गए।” डोटासरा ने भी जवाब में कहा — “हमारे यहां पर गोविंद आपको ही याद करते रहते हैं।” यह संवाद दोनों दलों के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के साथ ही एक हल्के अंदाज में रिश्तों की झलक भी दिखा गया।
अंता उपचुनाव का जिक्र और सियासी संकेत
मुलाकात के आखिर में जब दोनों नेता जाने लगे तो वसुंधरा राजे ने डोटासरा से पूछा — “अब आप कहां जा रहे हैं?” इस पर डोटासरा ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया — “यहां से सीधे अंता ही जाएंगे।” वसुंधरा राजे ने तुरंत कहा — “वहां मैं आपको सामने ही मिलूंगी।” इस बयान से साफ हो गया कि अंता उपचुनाव को लेकर दोनों दलों में सीधा मुकाबला होने वाला है। इस हल्की बातचीत में भी आगामी चुनावी जंग की झलक दिखाई दी।
पृष्ठभूमि: शोकसभा में पहुंचे दोनों नेता
दोनों नेता बीकानेर में रामेश्वर डूडी के निधन पर शोक जताने पहुंचे थे। रामेश्वर डूडी राजस्थान की राजनीति में एक प्रभावशाली नाम रहे हैं और उनकी मृत्यु के बाद पूरे राज्य में राजनीतिक दलों के नेताओं ने संवेदना व्यक्त की। डोटासरा और राजे दोनों ने उनके परिवार से मुलाकात कर श्रद्धांजलि दी।
सियासी रिश्तों की झलक
राजस्थान की राजनीति में भले ही भाजपा और कांग्रेस एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी हों, लेकिन कई बार नेताओं के बीच आपसी सौहार्द भी देखने को मिलता है। नाल एयरपोर्ट पर यह मुलाकात इसी सौहार्द का उदाहरण बन गई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की मुलाकातें चुनावी माहौल में भी मानवीय रिश्तों की झलक पेश करती हैं। डोटासरा और वसुंधरा राजे दोनों ही अपने-अपने दलों के सशक्त नेता हैं। एक ओर डोटासरा कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष हैं, तो दूसरी ओर वसुंधरा राजे भाजपा की वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हैं। ऐसे में उनकी मुलाकात का राजनीतिक महत्व स्वाभाविक है।
अंता उपचुनाव की पृष्ठभूमि में बढ़ती हलचल
अंता उपचुनाव को लेकर कांग्रेस और भाजपा दोनों ने अपनी रणनीतियां तेज कर दी हैं। एक ओर कांग्रेस ने Pramod Jain Bhaya पर भरोसा जताया है, वहीं भाजपा भी सीट पर कब्जा बनाए रखने के लिए पूरा जोर लगा रही है। डोटासरा का अंता का दौरा और राजे का वहां जाने का संकेत इस बात का इशारा है कि आने वाले दिनों में वहां पर सियासी गर्मी और बढ़ने वाली है।
राजनीति में हल्के पलों का भी महत्व
नाल एयरपोर्ट पर 20 मिनट की यह मुलाकात भले ही औपचारिक रही, लेकिन इसने राजनीतिक हलकों में चर्चा को जन्म दे दिया है। डोटासरा का रुकना और वसुंधरा राजे का सहज अंदाज दिखाता है कि कड़ी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बावजूद व्यक्तिगत रिश्तों में सौहार्द बरकरार रहता है।


