शोभना शर्मा। भारत में धनतेरस का त्योहार हमेशा से सोना खरीदने का शुभ अवसर माना जाता है। यह परंपरा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी सुरक्षित निवेश मानी जाती है। हर साल की तरह इस बार भी लोग सोने के भाव और निवेश विकल्पों पर नजरें टिकाए हुए हैं। लेकिन आज जब बाजार में गोल्ड के कई रूप मौजूद हैं — फिजिकल गोल्ड, डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ETF और Sovereign Gold Bond (SGB) — तो सवाल यह उठता है कि आखिर कौन सा निवेश तरीका सबसे बेहतर है और कहां टैक्स का बोझ कम है।
सोना क्यों है निवेश का भरोसेमंद जरिया
भारतीय निवेश पोर्टफोलियो में सोना हमेशा से एक स्थायी और सुरक्षित विकल्प रहा है। यह न तो शेयर बाजार की तरह अचानक गिरावट से प्रभावित होता है और न ही महंगाई के सामने अपनी कीमत खोता है। यही कारण है कि सोना “सेफ एसेट” कहलाता है। आर्थिक संकट, रुपये की गिरावट या मंदी के दौर में भी सोना परिवार की संपत्ति की रक्षा करता आया है। सोना ब्याज तो नहीं देता, लेकिन मुश्किल वक्त में नकदी की तरह काम आता है। यह किसी भी परिवार के लिए “वेल्थ इंश्योरेंस” के समान होता है।
गोल्ड में निवेश के प्रमुख विकल्प और टैक्स नियम
1. फिजिकल गोल्ड (गहने, सिक्के, बार्स)
यह सबसे पारंपरिक निवेश तरीका है। इसकी खरीद पर 3% GST देना पड़ता है। अगर मेकिंग चार्ज अलग से बिल में है तो उस पर 5% GST अतिरिक्त लगता है।
3 साल से पहले बेचने पर: मुनाफा Short-Term Capital Gain (STCG) कहलाता है और आपकी इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है।
3 साल बाद बेचने पर: यह Long-Term Capital Gain (LTCG) माना जाता है, जिस पर 12.5% टैक्स (बिना इंडेक्सेशन) देना पड़ता है — यह नियम अप्रैल 2024 से लागू है।
अगर आपकी सालाना आय ₹50 लाख से अधिक है, तो आपको इनकम टैक्स रिटर्न में गोल्ड को अपनी संपत्ति में शामिल करना जरूरी है।
2. डिजिटल गोल्ड
डिजिटल गोल्ड आजकल PhonePe, Google Pay, Paytm जैसे प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध है। इसमें ₹10 से भी निवेश शुरू किया जा सकता है। यह छोटे निवेशकों के लिए सुविधाजनक और सुरक्षित तरीका है, क्योंकि इसमें चोरी या स्टोरेज की चिंता नहीं होती। टैक्स नियम फिजिकल गोल्ड जैसे ही हैं — 3 साल से पहले STCG, और 3 साल बाद 12.5% LTCG टैक्स। खरीद पर 3% GST लागू होता है। हालांकि, ध्यान दें कि डिजिटल गोल्ड को RBI या SEBI द्वारा रेगुलेट नहीं किया जाता, इसलिए इसे विश्वसनीय प्लेटफॉर्म से ही खरीदना चाहिए।
3. गोल्ड ETF (Exchange Traded Fund)
यह आधुनिक निवेश तरीका है, जो शेयर बाजार में लिस्टेड होता है। इसके लिए डिमैट अकाउंट जरूरी है। ETF में निवेश करने पर आपको मेकिंग चार्ज नहीं देना पड़ता और यह चोरी से सुरक्षित होता है।
12 महीने से पहले बेचने पर: मुनाफा आपकी इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्सेबल (STCG)।
12 महीने बाद बेचने पर: 12.5% LTCG टैक्स लगता है।
इस पर कोई GST नहीं लगता क्योंकि आप फिजिकल सोना नहीं खरीद रहे।
4. गोल्ड म्यूचुअल फंड / फंड ऑफ फंड्स (FoF)
अगर आपके पास डिमैट अकाउंट नहीं है, तो यह तरीका आसान है। गोल्ड म्यूचुअल फंड अप्रत्यक्ष रूप से गोल्ड ETF में निवेश करते हैं।
ETF की तरह ही इन पर भी टैक्स नियम लागू होते हैं —
12 महीने से पहले बेचने पर STCG,
12 महीने बाद बेचने पर 12.5% LTCG टैक्स।
इन पर कोई GST या मेकिंग चार्ज नहीं होता।
गोल्ड बेचने पर टैक्स कैलकुलेशन कैसे होता है?
उदाहरण के लिए, अगर आपने 2022 में ₹2 लाख का सोना खरीदा और 2025 में ₹2.5 लाख में बेचा, तो आपको ₹50,000 का मुनाफा हुआ।
अगर अवधि 3 साल से कम है: ₹50,000 आपकी टैक्सेबल इनकम में जोड़ा जाएगा और आपकी टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगेगा।
अगर अवधि 3 साल से ज्यादा है: ₹50,000 पर 12.5% LTCG टैक्स देना होगा।
विरासत में मिले सोने पर टैक्स नियम
अगर आपको सोना गिफ्ट या विरासत में मिला है, तो उस पर मिलने के समय कोई टैक्स नहीं लगता। टैक्स तब लगता है जब आप उसे बेचते हैं। यहां मूल मालिक का होल्डिंग पीरियड भी गिना जाएगा। जैसे — अगर आपकी दादी ने 1990 में सोना खरीदा और आपने 2025 में बेचा, तो यह लॉन्ग टर्म गेन माना जाएगा और 12.5% टैक्स लगेगा।
कितना सोना रख सकते हैं आप? (Income Tax के दिशानिर्देश)
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इनकम टैक्स विभाग तलाशी के दौरान बिना बिल के भी इतनी मात्रा में सोने पर सवाल नहीं करता। अगर आपके पास इससे ज्यादा सोना है और उसके सोर्स का प्रमाण (बिल, गिफ्ट डीड, इनहेरिटेंस) है, तो कोई परेशानी नहीं होगी।
धनतेरस पर समझदारी से करें निवेश
सोना सिर्फ गहना नहीं, बल्कि वित्तीय सुरक्षा का प्रतीक है। अगर आप शॉर्ट टर्म के लिए निवेश करना चाहते हैं, तो गोल्ड ETF या डिजिटल गोल्ड बेहतर विकल्प हैं।वहीं लॉन्ग टर्म निवेश के लिए Sovereign Gold Bond (SGB) सबसे समझदारी भरा विकल्प है — क्योंकि इसमें 2.5% वार्षिक ब्याज भी मिलता है और मैच्योरिटी पर टैक्स से छूट होती है। इस धनतेरस, सोना खरीदते वक्त यह जरूर सोचें कि आप सिर्फ परंपरा निभा रहे हैं या अपने भविष्य को सुरक्षित बना रहे हैं।
धनतेरस पर गोल्ड में निवेश तब ही लाभदायक होता है जब आप अपने उद्देश्य, अवधि और टैक्स प्रभाव को समझकर निर्णय लें। फिजिकल गोल्ड जहां पारंपरिक सुरक्षा देता है, वहीं SGB और ETF जैसी आधुनिक योजनाएं बेहतर टैक्स दक्षता और ब्याज का लाभ प्रदान करती हैं। इस बार सोना केवल चमकाने के लिए नहीं, बल्कि अपने वित्तीय भविष्य को स्वर्णिम बनाने के लिए खरीदें।


