latest-newsदेशराजनीतिराजस्थान

अंता उपचुनाव में नरेश मीणा को टिकट नहीं, रंधावा ने किया तंज

अंता उपचुनाव में नरेश मीणा को टिकट नहीं, रंधावा ने किया तंज

मनीषा शर्मा। राजस्थान की सियासत में अंता विधानसभा उपचुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस ने अपने पुराने और दिग्गज नेता प्रमोद जैन भाया  पर भरोसा जताते हुए उन्हें उम्मीदवार घोषित कर दिया है। इस फैसले से टिकट की उम्मीद लगाए बैठे नरेश मीणा  को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के इस निर्णय के बाद सियासी गलियारों में हलचल बढ़ गई है और नरेश मीणा के समर्थक नाराज बताए जा रहे हैं।

टिकट को लेकर उपजे विवाद पर कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने बीकानेर में तीखा तंज कसा। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा, “ट्विटर पर एमएलए पैदा नहीं होते। मेरी गलती हो गई कि मैं नरेश मीणा का ट्वीट नहीं देख पाया। अगर पहले देख लिया होता, तो मैं उनसे मिलने चला जाता।”

रंधावा के इस बयान ने राजस्थान की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने आगे कहा, “मैं छोटा आदमी हूं और वो बहुत बड़े नेता हैं। लेकिन कांग्रेस में टिकट उसे ही मिलता है जो पार्टी के प्रति निष्ठावान हो और सभी को साथ लेकर चलने की क्षमता रखता हो।” उनका यह बयान प्रदेश कांग्रेस में टिकट वितरण की रणनीति को लेकर संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

नरेश मीणा को टिकट न मिलना बना राजनीतिक चर्चा का विषय

कांग्रेस के इस फैसले के बाद नरेश मीणा के समर्थकों में नाराजगी है। लंबे समय से सक्रिय रहे मीणा को टिकट मिलने की उम्मीद थी, लेकिन आखिरी वक्त पर पार्टी ने फिर से प्रमोद जैन भाया पर भरोसा जताया। राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, अब नरेश मीणा निर्दलीय मैदान में उतरने पर विचार कर रहे हैं। अगर ऐसा होता है तो अंता की लड़ाई और भी दिलचस्प हो सकती है।

अंता विधानसभा सीट पर 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था। अब पार्टी इस उपचुनाव को अपनी साख से जोड़कर देख रही है। कांग्रेस चाहती है कि इस बार प्रमोद जैन भाया की जीत से वह इस हार की भरपाई करे और संगठन को मजबूती दे।

बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने

अंता सीट पर मुकाबला सीधे  बीजेपी और कांग्रेस  के बीच है। बीजेपी इस सीट को किसी भी कीमत पर बचाना चाहती है, जबकि कांग्रेस इसे दोबारा जीतकर अपनी स्थिति मजबूत करने की रणनीति बना चुकी है। प्रमोद जैन भाया को टिकट देकर पार्टी ने संकेत दिया है कि वह चुनाव में अनुभव और जमीनी पकड़ को प्राथमिकता दे रही है। उधर बीजेपी ने भी अपनी पूरी ताकत झोंकने की तैयारी कर ली है। पार्टी के शीर्ष नेता लगातार क्षेत्र में सक्रिय हैं और मतदाताओं को अपने पक्ष में करने में जुटे हैं।

उपचुनाव की वजह और कानूनी पृष्ठभूमि

अंता विधानसभा सीट पर उपचुनाव की नौबत कंवर लाल मीणा को सजा होने के बाद आई। कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्होंने मनोहर थाना कोर्ट में सरेंडर किया था और सजा माफी के लिए राज्यपाल के पास दया याचिका भी दायर की थी। लेकिन कानूनी अड़चनों के चलते यह प्रक्रिया लंबित है। इसी कारण अंता सीट खाली हुई और अब इस पर उपचुनाव होना तय हुआ। राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक, इस उपचुनाव का असर पूरे राजस्थान की राजनीति पर पड़ेगा। यह न सिर्फ स्थानीय सियासत बल्कि प्रदेश में आगामी चुनावों की दिशा तय कर सकता है।

कांग्रेस के लिए साख का सवाल

कांग्रेस इस चुनाव को प्रतिष्ठा से जोड़कर देख रही है। पार्टी को उम्मीद है कि प्रमोद जैन भाया की लोकप्रियता और संगठन की एकजुटता से वह सीट दोबारा जीत सकती है। वहीं, नरेश मीणा के निर्दलीय उतरने की संभावना ने समीकरणों को जटिल बना दिया है। अगर कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवारों में वोट बंटे, तो इसका फायदा बीजेपी को मिल सकता है।

दूसरी ओर, रंधावा के बयान ने टिकट वितरण को लेकर कांग्रेस के भीतर की खींचतान को भी उजागर कर दिया है। बयान से यह भी स्पष्ट हुआ कि पार्टी अब सोशल मीडिया के बजाय जमीनी कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देगी।

post bottom ad

Discover more from MTTV INDIA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading