मनीषा शर्मा। टोंक में मंगलवार को सातवें पांच दिवसीय अखिल भारतीय कैलीग्राफी आर्ट फेस्टिवल, वर्कशॉप और प्रदर्शनी का शुभारंभ किया गया। यह आयोजन मौलाना अबुल कलाम आज़ाद अरबी-फारसी शोध संस्थान में हुआ, जहां देशभर के प्रसिद्ध कैलीग्राफिस्ट और कला प्रेमी एकत्र हुए। इस प्रतिष्ठित फेस्टिवल का उद्घाटन समारोह शानदार और गरिमामय माहौल में आयोजित हुआ, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार मीना शामिल हुए। उनके साथ संस्थान की निदेशक प्रियंका राठौड़, वित्तीय सलाहकार संगीता राठौड़, और अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कैलीग्राफिस्ट मुख्तार अहमद सहित कई विशिष्ट अतिथि मौजूद थे।
पुलिस अधीक्षक ने किया उद्घाटन, कहा – “यह कला भारतीय इतिहास की धरोहर है”
उद्घाटन के बाद पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार मीना ने प्रदर्शनी और डिस्प्ले हॉल का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि “संस्थान में पुरातत्व एवं कला के जो अद्भुत नमूने रखे गए हैं, उन्हें देखकर मुझे अपने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के दिन याद आ गए। तब इतिहास और कला की पाठ्यपुस्तकों में प्राचीन भारत की विविध कलाओं का विस्तार से उल्लेख पढ़ा था। आज उन्हें सजीव रूप में देखना अद्भुत अनुभव है।”
उन्होंने कहा कि कैलीग्राफी केवल लिखावट की कला नहीं, बल्कि यह भारतीय सभ्यता की गहराई और सौंदर्यबोध का प्रतीक है। इस तरह के आयोजन न केवल कला को संरक्षित करते हैं बल्कि नई पीढ़ी में इसकी समझ और रुचि को भी बढ़ाते हैं।
प्रियंका राठौड़ ने दी संस्थान की प्रगति की जानकारी
संस्थान की निदेशक प्रियंका राठौड़ ने फेस्टिवल, वर्कशॉप और प्रदर्शनी की रूपरेखा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संस्थान लगातार अरबी-फारसी और उर्दू की हस्तलिपि, लिप्यांकन और पारंपरिक कलाओं के संरक्षण एवं प्रोत्साहन के लिए कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि कैलीग्राफी एक ऐसी कला है जो भाषा, संस्कृति और सौंदर्य का संगम है, और इसे जीवित रखना हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी है।
मुख्तार अहमद बोले – “कैलीग्राफी अनुशासन और आत्मसंयम सिखाती है”
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि और अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कैलीग्राफिस्ट मुख्तार अहमद, जो कर्नाटक से आए हैं, ने अपने संबोधन में कहा कि कैलीग्राफी की कला व्यक्ति को अनुशासन में रहना सिखाती है। उन्होंने कहा, “इस कला में संयम, धैर्य और निरंतर अभ्यास की आवश्यकता होती है। इसमें वह सभी तत्व शामिल हैं जो एक सफल जीवन के लिए आवश्यक हैं — एकाग्रता, अनुशासन, और आत्मसंयम।” मुख्तार अहमद ने यह भी कहा कि आज जब डिजिटल युग में सब कुछ टाइपिंग पर निर्भर है, तब भी हस्तलिपि और कलम की अहमियत को बनाए रखना बहुत जरूरी है। यह कला हमें हमारी जड़ों से जोड़े रखती है।
संस्थान को विकास के लिए हरसंभव सहायता का आश्वासन
भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिला मीडिया प्रभारी ओमप्रकाश गुप्ता भी इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने संस्थान के निरंतर विकास के लिए राजस्थान सरकार द्वारा हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि संस्थान जैसे सांस्कृतिक केंद्र हमारी विरासत को जीवित रखने का कार्य कर रहे हैं, और इन्हें हर स्तर पर प्रोत्साहन मिलना चाहिए।
देशभर से आए प्रसिद्ध कैलीग्राफिस्ट
फेस्टिवल में देशभर से कई प्रसिद्ध कैलीग्राफिस्ट अपनी कला के नमूने प्रस्तुत कर रहे हैं। इनमें शामिल हैं —
दिल्ली से आए अब्दुर्रहमान, मुहम्मद जुबैर हैदर अनस, और मुश्ताक अहमद
हैदराबाद से आए अज़ीमुद्दीन
जयपुर से हरिशंकर बालोठिया सहित स्थानीय कलाकार
ये सभी कलाकार पांच दिन तक चलने वाली वर्कशॉप में कैलीग्राफी की विभिन्न शैलियों और तकनीकों को प्रदर्शित करेंगे। वर्कशॉप का उद्देश्य युवा कलाकारों को इस कला की बारीकियां सिखाना और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है।
कार्यक्रम की रूपरेखा और संचालन
फेस्टिवल के पहले दिन प्रदर्शनी हॉल में कैलीग्राफी की प्राचीन और आधुनिक शैलियों का शानदार संगम देखने को मिला। आगंतुकों ने विभिन्न भाषाओं — हिंदी, उर्दू, अरबी और फारसी — में की गई हस्तलिपि कलाओं की सराहना की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. ज़िया टोंकी ने किया, जिन्होंने पूरे समारोह को अनुशासित और जीवंत बनाए रखा। कार्यक्रम के अंत में डॉ. सैय्यद बदर अहमद ने सभी मेहमानों, कलाकारों और सहयोगियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।


