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आसाराम एक बार फिर जोधपुर सेंट्रल जेल लौटा, इलाज की अवधि बढ़ाने की याचिका पर नहीं हुई सुनवाई

आसाराम एक बार फिर जोधपुर सेंट्रल जेल लौटा, इलाज की अवधि बढ़ाने की याचिका पर नहीं हुई सुनवाई

मनीषा शर्मा।  नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम बापू को एक बार फिर जोधपुर सेंट्रल जेल में लौटना पड़ा है। पिछले एक महीने से आसाराम पाली रोड स्थित आरोग्यम हॉस्पिटल में उपचाराधीन था, लेकिन इलाज की अवधि बढ़ाने की याचिका पर मंगलवार को राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई नहीं हो सकी।  कोर्ट ने इस मामले में “एक्सेप्शन (Not Before Me)” लेते हुए इसे दूसरी बेंच को ट्रांसफर करने के निर्देश दिए। इसके बाद आसाराम की ओर से राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) की कोर्ट में याचिका लगाई गई कि इस मामले की सुनवाई नई बेंच बनाकर की जाए और अस्पताल में उपचार की अवधि बढ़ाई जाए। मगर इस पर भी मंगलवार को कोई सुनवाई नहीं हुई। ऐसे में अदालत के आदेशों के अभाव में आसाराम को आरोग्यम हॉस्पिटल से निकलकर फिर से जोधपुर सेंट्रल जेल लौटना पड़ा। देर शाम वह अस्पताल से निकलकर जेल पहुंच गया।

हाईकोर्ट में दो याचिकाओं पर होनी थी सुनवाई

मंगलवार को राजस्थान हाईकोर्ट में आसाराम की दो याचिकाओं पर सुनवाई होनी थी।

  1. पहली याचिका – मेडिकल ग्राउंड पर आजीवन कारावास की सजा स्थगित करने (Suspension of Sentence) की मांग से जुड़ी थी।

  2. दूसरी याचिका – आरोग्यम हॉस्पिटल में भर्ती रहकर इलाज की अवधि बढ़ाने से संबंधित थी। इन दोनों मामलों पर जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस बिपिन गुप्ता की खंडपीठ में सुनवाई निर्धारित थी। मगर अदालत ने इसे “Not Before Me” कहते हुए दूसरी बेंच को भेजने का निर्णय लिया। इससे केस की सुनवाई टल गई और आसाराम को अदालत की अनुमति के बिना जेल से बाहर रहने की कोई वैधता नहीं बची।

राजस्थान हाईकोर्ट में अपील लंबित

उल्लेखनीय है कि आसाराम को वर्ष 2018 में जोधपुर की विशेष पॉक्सो अदालत (POCSO Court) ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आजीवन कारावास (life imprisonment till death) की सजा सुनाई थी। इस फैसले को चुनौती देते हुए आसाराम ने राजस्थान हाईकोर्ट में अपील दायर कर रखी है। अपील में सजा को स्थगित करने की मांग की गई है ताकि वे जेल से बाहर रहकर चिकित्सा सुविधा प्राप्त कर सकें। हालांकि, अदालत ने अब तक इस याचिका पर कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है।

आरोग्यम हॉस्पिटल में चल रहा था इलाज

84 वर्षीय आसाराम पिछले एक महीने से पाली रोड स्थित आरोग्यम पंचकर्म केंद्र (Arogyam Panchakarma Hospital) में भर्ती थे। यह केंद्र न्यू कैंपस के सामने स्थित है और लंबे समय से आसाराम यहीं इलाज करा रहे हैं। पिछले कई अवसरों पर अदालत ने उन्हें स्वास्थ्य कारणों से आरोग्यम में उपचार जारी रखने की अनुमति दी थी। लेकिन इस बार जब अदालत से अवधि बढ़ाने की अनुमति नहीं मिल सकी, तब आसाराम को वापस जेल जाना पड़ा।

मेडिकल ग्राउंड पर राहत का इतिहास

आसाराम को इससे पहले भी कई बार मेडिकल ग्राउंड पर राहत मिल चुकी है। जनवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने स्वास्थ्य कारणों से 12 साल बाद पहली बार उन्हें अंतरिम जमानत (interim bail) दी थी। इसके बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने भी इसी आधार पर जमानत की अवधि बढ़ाई थी। लेकिन अगस्त 2025 में अदालत ने अंतरिम जमानत बढ़ाने से इनकार कर दिया। इसके बाद 30 अगस्त को आसाराम को जोधपुर सेंट्रल जेल में सरेंडर करना पड़ा था। हालांकि, कुछ ही दिन बाद उन्हें चिकित्सकीय कारणों से आरोग्यम हॉस्पिटल में भर्ती कर लिया गया था।

कोर्ट के पिछले फैसले और मेडिकल रिपोर्ट

पहले जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस विनीत कुमार माथुर की खंडपीठ ने अहमदाबाद सिविल हॉस्पिटल की मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर यह माना था कि आसाराम की हालत स्थिर (stable) है और उन्हें लगातार अस्पताल में भर्ती रहने की आवश्यकता नहीं है। इस रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने कहा था कि उन्हें चिकित्सकीय निगरानी में रहना चाहिए, लेकिन स्थायी अस्पताल में भर्ती रहने की आवश्यकता नहीं है। फिर भी आसाराम की ओर से बार-बार आरोग्यम में इलाज जारी रखने की अनुमति मांगी जाती रही है।

रेप मामले का पूरा घटनाक्रम

आसाराम के खिलाफ मामला वर्ष 2013 में दर्ज हुआ था। जोधपुर के मणई गांव स्थित आश्रम में 15 अगस्त 2013 की रात नाबालिग शिष्या के साथ यौन शोषण का आरोप लगा था। इसके बाद 1 सितंबर 2013 को आसाराम को इंदौर से गिरफ्तार किया गया था। पांच साल लंबी सुनवाई के बाद 2018 में विशेष पॉक्सो अदालत ने आसाराम को जीवनभर के लिए जेल भेजने का फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने बाद में राजस्थान हाईकोर्ट को निर्देश दिया था कि अपील की सुनवाई जल्द पूरी की जाए। इसी क्रम में अब 7 अक्टूबर 2025 को मामले की सुनवाई निर्धारित की गई है।

आरोग्यम में इलाज बढ़ाने की अर्जी पर अटका मामला

मंगलवार को जब अदालत में सुनवाई नहीं हो सकी, तो आसाराम की ओर से वकीलों ने जयपुर स्थित चीफ जस्टिस की बेंच में अर्जी दायर की कि नई बेंच बनाकर तुरंत सुनवाई की जाए। परंतु शाम तक कोई आदेश जारी नहीं हुआ, जिससे अदालत के नियमों के तहत आसाराम को आरोग्यम में ठहरने की वैध अनुमति समाप्त हो गई। नतीजतन उन्हें देर शाम आरोग्यम हॉस्पिटल से निकलकर जोधपुर सेंट्रल जेल लौटना पड़ा।

स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर फिर उठे सवाल

आसाराम की उम्र 84 वर्ष है और उनके स्वास्थ्य को लेकर कई बार अदालतों में बहस होती रही है। उनके समर्थक लगातार कहते रहे हैं कि उनकी सेहत जेल की परिस्थितियों में बिगड़ सकती है, वहीं सरकार और अभियोजन पक्ष का कहना है कि जेल में पर्याप्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध है। पिछले कुछ महीनों से जेल प्रशासन और आरोग्यम हॉस्पिटल दोनों पर यह दबाव रहा है कि वे कोर्ट के आदेशों का पालन सुनिश्चित करें और किसी भी तरह की विशेष छूट न दी जाए।

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