शोभना शर्मा। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की वरिष्ठ नेता वसुंधरा राजे एक बार फिर अपने बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। रविवार को राजधानी जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राजे ने कहा कि मोटापा आज दुनिया भर में महामारी का रूप लेता जा रहा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इसे रोकने के लिए केवल राजनेताओं को ही नहीं बल्कि समाज के हर वर्ग को मिलकर प्रयास करना चाहिए।
राजे रविवार को प्रसिद्ध एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. अबरीश मित्तल की पुस्तक “द वेट लॉस रिवोल्यूशन” के विमोचन कार्यक्रम में शामिल हुई थीं। इस मौके पर उन्होंने स्वास्थ्य, फिटनेस और जीवनशैली पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि कई लोग बाहर से पतले दिखते हैं, लेकिन उनके शरीर में अंदरूनी चर्बी होती है, जो सबसे अधिक खतरनाक मानी जाती है। राजे ने कहा, “मैं हमेशा यह सुनिश्चित करती हूं कि मेरा वजन न बढ़े। इसके लिए मैं नियमित व्यायाम करती हूं और समय-समय पर कीटो, एटकिंस, डैश इंटरमिटेंट फास्टिंग और जूस क्लेंज जैसी विधियां अपनाती हूं।”
उनके इस बयान को जहां एक वर्ग ने स्वास्थ्य जागरूकता से जोड़कर देखा, वहीं राजनीतिक हलकों में इसे एक रूपक के तौर पर भी लिया गया। सोशल मीडिया पर लोगों ने यह कहना शुरू कर दिया कि वसुंधरा राजे का “बाहर से पतले और अंदर से चर्बी वाले” बयान का आशय राजनीति के भीतर की चालों और आंतरिक खींचतान से हो सकता है।
राजस्थान भाजपा में लंबे समय से खींचतान और गुटबाजी की खबरें आती रही हैं। ऐसे में राजे का यह बयान पार्टी के अंदर की स्थिति पर इशारा माना जा रहा है। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजे ने इस मंच से अप्रत्यक्ष रूप से अपने विरोधियों पर निशाना साधा है।
राजे के राजनीतिक बयानों की यह पहली बार नहीं है जब सियासी गलियारों में हलचल मची हो। इससे पहले भी उनके कई वक्तव्य और सोशल मीडिया पोस्ट राजनीतिक अर्थों में चर्चा का विषय बने हैं।
राजे के पुराने बयानों ने भी मचाई थी हलचल
पिछले साल राजस्थान की सात विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजों के बाद वसुंधरा राजे ने एक पोस्ट साझा की थी, जिसने भाजपा के भीतर और विपक्ष में भी चर्चाएं तेज कर दी थीं। राजे ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट (अब एक्स) पर लिखा था— “बादल कुछ देर तो सूरज को अदृश्य कर सकते हैं, पर सूर्य की दमक को रोकने का सामर्थ्य उनमें नहीं।”
इस पंक्ति को लेकर राजनीतिक हलकों में अटकलें लगाई गईं कि राजे ने यह संदेश पार्टी के भीतर की गुटबाजी पर तंज कसते हुए दिया है। माना गया कि यह पोस्ट उनके नेतृत्व की अनदेखी और संगठन में अंदरूनी राजनीति पर उनकी प्रतिक्रिया थी।
राजे की इस पंक्ति को उस समय भाजपा के कई कार्यकर्ताओं और उनके समर्थकों ने “नेतृत्व के प्रति आत्मविश्वास” के प्रतीक के रूप में देखा। वहीं, विरोधी गुट ने इसे “राजनीतिक संकेत” मानते हुए कहा कि राजे भाजपा में खुद की प्रासंगिकता का संदेश देना चाहती हैं।
“पीठ में छुरा घोंपने वाले माहिर हैं” बयान पर भी हुआ था विवाद
इसी तरह, पिछले वर्ष नवंबर में जब महाराणा प्रताप की प्रतिमा के अनावरण समारोह में वसुंधरा राजे मंच पर बोल रही थीं, तब उन्होंने कहा था—
“आजकल लोग पीठ में छुरा घोंपने में माहिर हैं। सांप को चाहे कितना भी प्रेम कर लो, वह अपने स्वभाव के अनुरूप कभी न कभी आप पर जहर उगलेगा ही।” इस बयान को भी तत्काल राजनीतिक रंग मिल गया था। उस समय पार्टी के भीतर असंतोष और संगठनात्मक मतभेदों की चर्चाएं जोरों पर थीं। इसलिए माना गया कि राजे का यह बयान भी अंदरूनी विरोधियों की ओर इशारा करता है।
अब “अंदरूनी चर्बी” वाले बयान पर सियासी व्याख्याएं
राजस्थान की राजनीति में वसुंधरा राजे के इस नए बयान ने फिर से हलचल मचा दी है। कांग्रेस नेताओं ने इसे भाजपा के भीतर की अंतर्कलह से जोड़ते हुए टिप्पणी की है। वहीं, भाजपा के कई नेताओं ने कहा कि राजे का बयान पूरी तरह से स्वास्थ्य और फिटनेस के संदर्भ में था और इसे राजनीति से जोड़ना गलत है। राजे के समर्थक इसे उनकी “स्पष्टवादिता” और “व्यक्तित्व की मजबूती” का उदाहरण बता रहे हैं। उनका कहना है कि राजे हमेशा सीधे शब्दों में अपनी बात कहती हैं, चाहे वह राजनीतिक मंच हो या सामाजिक।
स्वास्थ्य के साथ राजनीतिक संकेत भी
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि वसुंधरा राजे ने जिस संदर्भ में ‘अंदरूनी चर्बी’ की बात की, उसमें केवल स्वास्थ्य की चिंता ही नहीं बल्कि राजनीति का एक छिपा हुआ संदेश भी है। यह संभव है कि राजे ने यह संकेत देने की कोशिश की हो कि राजनीति में भी कई चेहरे बाहर से निष्कलंक दिखते हैं लेकिन भीतर कुछ और ही होते हैं।


