शोभना शर्मा। राजस्थान के किसान इन दिनों “गरीब का मेवा” कही जाने वाली मूंगफली की कटाई और बिक्री में जुटे हैं। खेतों से अनाज मंडियों तक मूंगफली की बोरियां पहुंचने लगी हैं। इस बार बीकानेर सहित पूरे पश्चिमी राजस्थान में मूंगफली की बंपर पैदावार हुई है। प्रदेश की सबसे बड़ी मूंगफली मंडी बीकानेर में प्रतिदिन करीब 15 हजार बोरी मूंगफली की आवक दर्ज की जा रही है। अनुमान है कि इस साल जिले में करीब तीन लाख बोरी मूंगफली का उत्पादन होगा। प्रति बीघा उत्पादन 7 से 9 क्विंटल के बीच रहा है, जो पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर माना जा रहा है।
एमएसपी से 2000 रुपए कम मिल रहा भाव
मूंगफली का सरकारी समर्थन मूल्य (एमएसपी) 7263 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है, जबकि मंडी में भाव 4500 से 5500 रुपए प्रति क्विंटल के बीच चल रहा है। यानी किसानों को हर क्विंटल पर लगभग 2000 रुपए तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसका प्रमुख कारण यह है कि सरकारी खरीद अभी शुरू नहीं हुई है। ऐसे में व्यापारी कम दाम पर किसानों से सीधी खरीद कर रहे हैं, जिससे बाजार में असंतुलन बढ़ रहा है।
सरकारी खरीद में देरी से बढ़ी मुश्किलें
बीकानेर के किसानों का कहना है कि सरकार हर साल की तरह इस बार भी खरीद में देरी कर रही है। जब तक खरीद शुरू होती है, तब तक किसान अपनी उपज को सस्ते दामों में बेचने को मजबूर हो जाते हैं। इसका फायदा बिचौलिए उठाते हैं, जो किसान से कम दाम पर मूंगफली खरीदकर उसे सरकारी खरीद में बेच देते हैं। सरकारी खरीद 15 अक्टूबर के बाद शुरू होने की संभावना है। मंडी सचिव ने बताया है कि इस बार सरकार प्रति किसान 40 क्विंटल तक मूंगफली खरीदेगी, जबकि पहले यह सीमा 25 क्विंटल थी। साथ ही बंटाईदार किसानों को भी बिक्री की अनुमति मिलेगी।
निर्यात बाजार पर भी असर
बीकानेर की मूंगफली न केवल राजस्थान बल्कि देशभर के बाजारों में सप्लाई होती है। यहां से पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, बिहार और उत्तर प्रदेश तक व्यापारी खरीद करते हैं। गुजरात के बाद राजस्थान देश का दूसरा सबसे बड़ा मूंगफली उत्पादक राज्य है। बीकानेर प्रदेश की सबसे बड़ी मंडी है, जहां से मूंगफली का निर्यात बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल और मलेशिया तक होता है। हालांकि इस साल पाकिस्तान से व्यापार बंद होने और पड़ोसी देशों की आर्थिक स्थिति कमजोर रहने के कारण निर्यात पर असर पड़ा है। कई व्यापारी अब कनाडा, मलेशिया और इंडोनेशिया जैसे देशों में नए निर्यात अनुबंध कर रहे हैं।
सरकारी गोदामों में पुराना स्टॉक बना बाधा
सरकार ने पिछले वर्ष खरीदी गई करीब 20 लाख बोरी मूंगफली अभी तक पूरी तरह से नहीं बेची है। अब सरकार इस पुराने स्टॉक को 5500 से 5900 रुपए प्रति क्विंटल की दर से बेच रही है। बाजार में इस सरकारी बिक्री का सीधा असर नए सीजन की मूंगफली पर पड़ा है। व्यापारी पुरानी मूंगफली के कम दाम का हवाला देकर नई मूंगफली को भी सस्ते में खरीद रहे हैं। किसानों का कहना है कि सरकार अगर समय पर खरीद शुरू करे तो बाजार में भाव स्थिर रह सकते हैं।
बीकानेर मंडी में रिकॉर्ड आवक का अनुमान
बीकानेर की मूंगफली मंडी में इस सीजन सवा करोड़ बोरी से अधिक आवक की उम्मीद है। इसके अलावा ऊन मंडी, श्रीडूंगरगढ़, लूणकरनसर, नोखा, छतरगढ़, खाजूवाला, बज्जू और नापासर की मंडियों में 50 लाख से अधिक बोरी मूंगफली आने का अनुमान है।
पूरे बीकानेर संभाग में मूंगफली उत्पादन का कुल आंकड़ा तीन करोड़ बोरी के आसपास रहने की संभावना जताई जा रही है। पिछले वित्तीय वर्ष (अप्रैल 2024 से मार्च 2025) के दौरान बीकानेर मंडी में 20 लाख 18 हजार 429 क्विंटल मूंगफली की आवक दर्ज की गई थी, जिसकी कुल कीमत 101588.72 लाख रुपए रही।
मंडी प्रशासन की तैयारी पूरी
मंडी सचिव उमेश चन्द्र शर्मा के अनुसार, दीपावली के बाद मूंगफली सीजन जोर पकड़ेगा। मंडी परिसर में सड़क लाइटें, सीसीटीवी कैमरे, ट्रैफिक नियंत्रण, पार्किंग और किसानों के लिए सुविधाएं दुरुस्त की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इस बार व्यवस्था को सुदृढ़ और पारदर्शी बनाने की पूरी कोशिश की जा रही है। मूंगफली से न केवल मंडी बल्कि सरकार को भी बड़ा राजस्व प्राप्त होता है, इसलिए किसानों को अधिकतम मूल्य दिलाने और सरकारी खरीद में पारदर्शिता लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
व्यापारियों और किसानों की राय
स्थानीय व्यापारियों का मानना है कि इस बार मूंगफली की क्वालिटी और उत्पादन दोनों बेहतर हैं। दीपावली के बाद मंडी में 80 से 100 व्यापारी एक साथ बोली लगाना शुरू करेंगे, जिससे किसानों को प्रतिस्पर्धी भाव मिल सके। रोजाना एक से सवा लाख बोरी मूंगफली की खरीद का अनुमान है। किसान चाहते हैं कि सरकार मंडी के चारों गेट खोल दे ताकि ट्रकों की आवाजाही सुचारू हो सके और भीड़भाड़ से राहत मिले।


