मनीषा शर्मा। जोधपुर की जय नारायण व्यास यूनिवर्सिटी (JNVU) में चल रही परीक्षाओं के दौरान 29 सितंबर को सामने आया नकल प्रकरण अब लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। आरोप है कि परीक्षा के दौरान ABVP (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद) की प्रांत मंत्री पूनम भाटी मोबाइल से नकल करते हुए पकड़ी गई थीं। हालांकि, इस मामले पर यूनिवर्सिटी प्रशासन का रुख विरोधाभासी दिखाई दे रहा है, जिससे विवाद और गहराता जा रहा है।
परीक्षा के दौरान पकड़ी गई नकल
29 सितंबर की सुबह 7 से 10 बजे तक आयोजित हिंदी सेकेंड सेमेस्टर की परीक्षा में पूनम भाटी कथित रूप से मोबाइल से नकल करते पकड़ी गईं। डिप्टी सुपरिटेंडेंट राजश्री राणावत ने उन्हें रंगे हाथों पकड़ने के बाद मामला दर्ज किया। लेकिन इस घटना के तुरंत बाद से ही मामले को दबाने और रफा-दफा करने की कोशिशों की खबरें सामने आने लगीं।
देर से आया प्रेस नोट, बढ़ा विवाद
घटना के डेढ़ दिन बाद केंद्र अधीक्षक की ओर से प्रेस नोट जारी किया गया। इसमें कहा गया कि परीक्षा में एक छात्र मोबाइल से नकल करते हुए पकड़ा गया था, जबकि हिंदी विभाग की छात्रा (पूनम भाटी) वीक्षक के मना करने के बाद भी बातचीत कर रही थी, इसलिए उसके खिलाफ प्रकरण बनाया गया।
इस बयान ने विवाद को और गहरा दिया। NSUI ने इसे हास्यास्पद करार देते हुए आरोप लगाया कि यह बयान केवल ABVP की प्रांत मंत्री को बचाने के लिए दिया गया है। संगठन ने सवाल उठाया कि यदि छात्रा केवल बात कर रही थी तो नकल का प्रकरण क्यों बनाया गया और रिपोर्ट गोपनीय शाखा में क्यों भेजी गई।
NSUI का आरोप – सत्ता और संगठन का दबाव
NSUI के जिलाध्यक्ष बबलु सोलंकी ने कहा कि प्रशासन का यह तर्क किसी से छिपा नहीं है। परीक्षा में यदि अनुचित साधनों का प्रयोग नहीं किया गया तो मामला दर्ज करने और रिपोर्ट गोपनीय शाखा में भेजने की क्या जरूरत थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पूनम भाटी के पास से मोबाइल बरामद हुआ था, लेकिन सत्ता और संगठन के दबाव में उसे लौटा दिया गया और अब मामले को छिपाने की कोशिश की जा रही है।
एबीवीपी की सफाई और आंतरिक जांच
विवाद बढ़ने के बाद 30 सितंबर को ABVP की ओर से प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई। इसमें कहा गया कि इस पूरे प्रकरण की आंतरिक जांच समिति बनाएगी और पूनम भाटी से भी स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। ABVP ने इसे संगठन की साख पर हमला बताते हुए निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया।
हालांकि NSUI और अन्य विपक्षी संगठन इस कदम को महज औपचारिकता मान रहे हैं। उनका कहना है कि प्रशासन और संगठन दोनों मिलकर मामले को दबाने में जुटे हैं।
अधीक्षक और वीक्षक की चुप्पी पर सवाल
मामले के समय केंद्र अधीक्षक सुशीला शक्तावत को बार-बार फोन किए गए, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। वहीं डिप्टी सुपरिटेंडेंट राजश्री राणावत, जिन्होंने पूनम भाटी को पकड़ा था, उन्होंने भी अभी तक कोई बयान नहीं दिया है। यह चुप्पी और देर से जारी हुआ प्रेस नोट प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
NSUI की मांग – पारदर्शी कार्रवाई
NSUI का कहना है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन को इस पूरे मामले की पारदर्शी जांच करनी चाहिए और दोषी पाए जाने पर पूनम भाटी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। संगठन का आरोप है कि यदि यह मामला किसी सामान्य छात्र का होता, तो तुरंत नकल का प्रकरण दर्ज कर उसे परीक्षा से बाहर कर दिया जाता। लेकिन प्रांत मंत्री होने की वजह से मामला दबाने की कोशिश की जा रही है।
विवाद ने पकड़ा राजनीतिक रंग
यह विवाद अब महज परीक्षा तक सीमित नहीं रहा। NSUI के अलावा RLP और अन्य संगठनों ने भी प्रशासन की चुप्पी और देरी पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन सत्ता और छात्र संगठन के दबाव में काम कर रहा है।


