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दिलावर बोले- कांग्रेस सरकार में पैसों के बदले होते थे तबादले

दिलावर बोले- कांग्रेस सरकार में पैसों के बदले होते थे तबादले

शोभना शर्मा। राजस्थान में शिक्षकों के तबादलों को लेकर एक बार फिर राजनीति गरमा गई है। बीते सोमवार को शिक्षा विभाग ने 4527 प्रिंसिपलों के तबादले किए, जिसके बाद कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने आ गए। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष और पूर्व शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने इस ट्रांसफर लिस्ट पर सवाल उठाते हुए शिक्षा मंत्री मदन दिलावर पर राजनीतिक द्वेष से काम करने का आरोप लगाया।

डोटासरा के आरोप और दिलावर का पलटवार

डोटासरा का कहना था कि भाजपा सरकार शिक्षा विभाग का दुरुपयोग कर रही है और तबादलों में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही। इसके जवाब में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने जोधपुर के तिंवरी स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय उम्मेदनगर में क्लासरूम का उद्घाटन करते हुए मीडिया से बातचीत की। उन्होंने डोटासरा के आरोपों को नकारते हुए पलटवार किया।

दिलावर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन के दौरान तबादलों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार होता था। उन्होंने कहा, “कांग्रेस के समय शिक्षकों के तबादले पैसों के बदले किए जाते थे। खुद शिक्षकों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सामने डोटासरा की मौजूदगी में यह बात कही थी।” उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार ने इस परंपरा को पूरी तरह समाप्त किया है और वर्तमान में सभी तबादले निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से किए जा रहे हैं।

राष्ट्रपति अवार्डी शिक्षकों पर बयान

मीडिया से बातचीत में दिलावर से राष्ट्रपति अवार्ड प्राप्त शिक्षकों के तबादले पर भी सवाल किया गया। इस पर उन्होंने कहा कि ये शिक्षक समाज के लिए आदर्श होते हैं और इनका दायित्व है कि वे उन स्कूलों में जाएं जहां पढ़ाई का स्तर कमजोर है। दिलावर ने जोर देकर कहा कि ऐसे शिक्षक अपनी योग्यता का लाभ उन बच्चों तक पहुंचाएं जो बेहतर शिक्षा से वंचित हैं। उनका कहना था कि सम्मानित शिक्षकों का कर्तव्य केवल अपनी सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के निचले तबके तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना भी है।

गैर-शैक्षणिक कार्यों में शिक्षकों की तैनाती

दिलावर से यह भी पूछा गया कि शिक्षकों को बार-बार गैर-शैक्षणिक कार्यों जैसे चुनाव और जनगणना में लगाया जाता है, जिससे पढ़ाई प्रभावित होती है। इस पर उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार के पास इतने बड़े पैमाने पर अलग स्टाफ उपलब्ध नहीं होता, इसलिए शिक्षकों की सेवाएं इन कार्यों में ली जाती हैं। उन्होंने कहा कि “चुनाव और जनगणना रोज-रोज नहीं होते। यह केवल राजस्थान की बात नहीं है, बल्कि पूरे देश में यही व्यवस्था लागू है।”

तबादलों पर बढ़ती सियासी जंग

राजस्थान में तबादले हमेशा से राजनीतिक विवाद का विषय रहे हैं। कांग्रेस और भाजपा, दोनों ही दल एक-दूसरे पर मनमानी और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते रहे हैं। डोटासरा का आरोप है कि भाजपा सरकार राजनीतिक द्वेष से प्रभावित होकर शिक्षकों को परेशान कर रही है, जबकि दिलावर का कहना है कि कांग्रेस शासन में तो पूरी तबादला प्रक्रिया ही पैसों पर आधारित थी।

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